कांग्रेस के नेता ने भरे मंच पर BJP नेता की तारीफ की, कांग्रेस नेतृत्व पर उठाए सवाल

Ramanand Tiwari | May 22, 2026, 07:30 IST
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रीवा में कांग्रेस कार्यक्रम के दौरान सरदार प्रह्लाद सिंह ने केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की खुले तौर पर तारीफ की। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का थिंक टैंक कमजोर हो गया है। पार्टी में अटैक की भावना खत्म हो चुकी है।

मध्य प्रदेश कांग्रेस के भीतर क्या अब भी ज्योतिरादित्य सिंधिया का प्रभाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ? रीवा में गुरुवार को हुए एक कार्यक्रम ने इसी सवाल को फिर हवा दे दी। कांग्रेस के विशेष आमंत्रित सदस्य और दो बार महापौर प्रत्याशी रह चुके सरदार प्रह्लाद सिंह ने भरे मंच से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की खुलकर तारीफ कर दी।

इतना ही नहीं, उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और पार्टी की कार्यप्रणाली पर भी सीधे सवाल खड़े कर दिए। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि मंच पर मौजूद कांग्रेस के कई बड़े नेता पूरी घटना के दौरान चुप बैठे रहे। किसी ने सार्वजनिक तौर पर विरोध नहीं किया। अब पार्टी के अंदर यह मामला अनुशासन बनाम अंदरूनी सहमति की बहस में बदलता दिख रहा है।

इन्द्राज्योति अभियान के मंच से कांग्रेस पर ही हमला

रीवा में कांग्रेस के इन्द्राज्योति अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया था। मंच पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष राजेन्द्र शर्मा, पूर्व मंत्री राजमणि पटेल, पूर्व मंत्री राजेंद्र मिश्रा और अभियान से जुड़े अन्य नेता मौजूद थे। इसी दौरान सरदार प्रह्लाद सिंह ने ऐसा बयान दे दिया, जिसने पार्टी के अंदर हलचल बढ़ा दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का थिंक टैंक कमजोर हो गया है।

पार्टी में अटैक की भावना खत्म हो चुकी है। भाजपा के सवालों का कांग्रेस जवाब नहीं दे पा रही। इसी वजह से कांग्रेस लगातार सिकुड़ रही है। ज्योतिरादित्य सिंधिया को अपमानित किया गया, इसलिए वे चले गए। यानी मंच पर कांग्रेस नेतृत्व पर हमला और सिंधिया की वकालत दोनों साथ दिखाई दिए।

इस बयान ने बढ़ाई बेचैनी

सरदार प्रह्लाद सिंह ने अपने भाषण में कहा कि कांग्रेस को यह सोचना चाहिए कि आखिर ज्योतिरादित्य सिंधिया क्यों पार्टी छोड़कर गए। उन्होंने मंच से कहा उन्हें अपमानित किया गया। वे 20 लोगों को लेकर चले गए और सरकार गिर गई। हमें सोचना चाहिए कि हम क्यों सिकुड़ रहे हैं और भाजपा क्यों बढ़ रही है। इस बयान के बाद कार्यक्रम में मौजूद नेताओं की प्रतिक्रिया देखने लायक थी। मंच पर सन्नाटा रहा और कोई प्रतिवाद सामने नहीं आया।

कांग्रेस नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल

राजनीतिक गलियारों में अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या कांग्रेस रीवा में इतनी असहज स्थिति में है कि मंच से भाजपा नेता की तारीफ होती रही और कोई विरोध नहीं हुआ? क्या पार्टी के अंदर अब भी सिंधिया समर्थक सोच मौजूद है? या फिर स्थानीय स्तर पर नेतृत्व टकराव से बचना चाहता था? क्योंकि मंच पर बैठे वरिष्ठ नेताओं की चुप्पी अब खुद चर्चा का विषय बन गई है।

अपने ही नेताओं पर निशाना

सरदार प्रह्लाद सिंह ने सिर्फ सिंधिया की तारीफ नहीं की, बल्कि कांग्रेस के प्रदेश नेतृत्व की रणनीति पर भी सवाल उठा दिए। उन्होंने कहा भाजपा की बातों का जवाब हम नहीं दे पा रहे हैं। इसलिए कांग्रेस सिकुड़ रही है। यह बयान सीधे तौर पर कांग्रेस के प्रदेश स्तर के नेताओं और उनकी राजनीतिक कार्यशैली पर सवाल माना जा रहा है। संदेश साफ था कि पार्टी कमजोर हो रही है। नेतृत्व प्रभावी जवाब नहीं दे पा रहा। भाजपा आक्रामक है और कांग्रेस रक्षात्मक स्थिति में है।

कौन हैं सरदार प्रह्लाद सिंह?

सरदार प्रह्लाद सिंह कांग्रेस के पुराने नेता माने जाते हैं। पार्टी उन्हें दो बार महापौर का टिकट दे चुकी है, हालांकि दोनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। फिर भी संगठन में उन्हें विशेष आमंत्रित सदस्य की जिम्मेदारी मिली हुई है। इसी वजह से उनका बयान अब साधारण राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि अंदरूनी असंतोष के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

कांग्रेस संगठन अब कार्रवाई के मूड में?

मामला सामने आने के बाद कांग्रेस संगठन ने सख्त संकेत दिए। प्रदेश संगठन महामंत्री संजय कामले ने कहा यदि किसी नेता ने मंच से भाजपा नेताओं की तारीफ की, तो पार्टी जांच करेगी। वीडियो मंगवाया जाएगा और पुष्टि के बाद कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि पार्टी विरोधी गतिविधियों को हल्के में नहीं लिया जाएगा।

कांग्रेस के लिए ज्यादा मुश्किल क्यों बना यह बयान?

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार यह बयान कांग्रेस के लिए असहज स्थिति बना रहा है। बयान कांग्रेस मंच से आया। सिंधिया की खुली तारीफ हुई और वरिष्ठ नेताओं पर सवाल उठे। मंच पर बैठे नेताओं ने विरोध नहीं किया। यह मामला सिर्फ भाषण नहीं, बल्कि कांग्रेस के अंदरूनी मनोविज्ञान की झलक माना जा रहा है।

क्या कांग्रेस में अब भी सिंधिया फैक्टर?

2020 में ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में जाने के बाद कांग्रेस दावा करती रही कि पार्टी “सिंधिया अध्याय” से आगे बढ़ चुकी है। लेकिन रीवा की घटना ने सवाल खड़े कर दिए। कांग्रेस के ही एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने सिंधिया की वकालत की और उन्हें अपमानित बताया।

पार्टी नेतृत्व की रणनीति पर सवाल उठाए

भाजपा की तुलना में कांग्रेस को कमजोर बताया गया। राजनीतिक हलकों में कहा जा रहा है कि कांग्रेस में सिंधिया फैक्टर अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। यह संदेश तेजी से चर्चा का विषय बन गया है।

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