एथेनॉल में गया 25 लाख टन गन्ना, चीनी की कीमत बढ़ी तो 10 लाख टन रॉ शुगर होगी आयात
Aman Vaishnav | Aug 21, 2026, 10:01 IST
चीनी की कीमत
देश में बीते 3 महीनों में चीनी और गुड़ के दाम तेजी से बढ़े हैं। चीनी की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात की मंजूरी दी है। साथ ही स्टॉक लिमिट भी लागू की है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- देश में चीनी तीन महीने में 40% महंगी हो गई है।
- भोपाल में यह 70 रुपए किलो तक बिक रही है।
- एथेनॉल बनाने में ज्यादा गन्ना खर्च होने से चीनी का स्टॉक घटा है।
- केंद्र सरकार ने 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है।
- थोक कारोबारियों पर अब स्टॉक लिमिट भी लागू कर दी गई है।
रसोई का बजट बिगड़ा
सिर्फ चीनी नहीं, गुड़ भी 24% महंगा हुआ है। तीन महीने पहले गुड़ 50 रुपए किलो था, अब 65 रुपए में मिल रहा है। चावल की कनकी 16%, मक्के का आटा 11%, इडली रवा 10% तक महंगा हो चुका है।
भोपाल किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू के अनुसार शहर में शक्कर थोक में 66 से 67 रुपए किलो बिक रही है। दुकानों पर यही चीनी 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है।
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चीनी क्यों हो रही महंगी
ऑल इंडिया डिस्टलर्स एसोसिएशन के अनुसार पिछले साल देश में 720 करोड़ लीटर एथेनॉल बना। इसे बनाने में करीब 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना और शीरा इस्तेमाल हो गया।
जितनी चीनी एथेनॉल में गई उतनी बाजार में कम पहुंची। इसी वजह से अनाज की उपलब्धता घटने से शराब उद्योग भी 8 से 10% तक प्रभावित हुआ है।
आने वाले महीनों में भी राहत मुश्किल दिख रही है। 1 अक्टूबर से नया सीजन (2026-27) शुरू हो रहा है। अनुमान है कि इस सीजन में भी अतिरिक्त स्टॉक, घरेलू खपत के लिए जरूरी 50 लाख टन से कम रहेगा।
सरकार का फैसला क्या है
इसके साथ ही स्टॉक लिमिट भी लागू कर दी गई है। जो थोक उपभोक्ता हर महीने 10 टन से ज्यादा चीनी इस्तेमाल करते हैं, वे अब सिर्फ 15 दिन की खपत जितनी चीनी ही अपने पास रख सकेंगे। इससे जमाखोरी और मुनाफाखोरी पर लगाम लगाने की कोशिश की जा रही है।
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मिलों का स्टॉक कितना घटा
इंडियन शुगर एंड बायो एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अनुसार 2026-27 सीजन में गन्ने का कुल उत्पादन (गन्ने की फसल) अनुमान 46.3 करोड़ टन है।
चीनी उत्पादन का अनुमान 3.36 करोड़ टन है, जो पिछले साल से 12% ज्यादा है। इसके बावजूद स्टॉक में कमी बनी हुई है, क्योंकि 2025-26 सीजन में करीब 25 लाख टन चीनी बनाने लायक गन्ना-शीरा एथेनॉल की भट्टियों में चला गया।
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निर्यातक से आयातक तक का सफर
2023-24 में यह घटकर 51.35 लाख टन रह गया। 2024-25 में निर्यात और घटकर 38.43 लाख टन पर सिमट गया।
अब हालात इतने बदल गए हैं कि 2026-27 सीजन में देश को चीनी का आयात करना पड़ रहा है। यानी जो देश कभी बड़ी मात्रा में चीनी बाहर भेजता था, अब उसे बाहर से मंगानी पड़ रही है।
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आम आदमी पर असर
छोटे दुकानदारों और स्ट्रीट फूड कारोबारियों पर भी दबाव बढ़ेगा, क्योंकि चीनी उनकी रोजमर्रा की खपत का अहम हिस्सा है।
FAQ
- चीनी की कीमत तीन महीने में कितनी बढ़ी है?
चीनी की कीमत तीन महीने में करीब 40% बढ़ी है। यह 48 रुपए किलो से बढ़कर 67 रुपए किलो हो गई है। भोपाल में रिटेल दाम 70 रुपए किलो तक पहुंच गया है। - चीनी महंगी होने की मुख्य वजह क्या है?
मुख्य वजह एथेनॉल के लिए ज्यादा गन्ना और शीरे का इस्तेमाल है। इससे बाजार में चीनी की उपलब्धता कम हो गई है। मिलों का ओपनिंग स्टॉक भी पिछले साल से कम है। - सरकार ने चीनी और गुड़ की कीमतें काबू करने के लिए क्या किया है?
सरकार ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर के शुल्क-मुक्त आयात को मंजूरी दी है। साथ ही थोक कारोबारियों के लिए स्टॉक लिमिट भी लागू कर दी गई है।
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