इंदौर में स्वामी हरीकृष्ण दास स्कूल लोकार्पण से विवाद, दो मंत्रियों की पुरानी शिलालेख हटाई

इंदौर में एक सरकारी स्कूल के 11 साल बाद फिर लोकार्पण कार्यक्रम ने सिंधी समाज में राजनीति तेज कर दी है। इस लोकार्पण को करने वाले वर्तमान नेताओं ने अपनी ही पार्टी के पुराने वरिष्ठ नेताओं के नाम की शिलालेख हटा दी और अपनी चिपका दी।

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Sanjay Gupta
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इंदौर में सरकारी स्कूल हरिकृष्णदास जी उदासी स्कूल वार्ड 65 को लेकर सिंधी समाज और राजनेताओं के बीच में श्रेय की राजनीति आडे़ आ गई। शनिवार 7 फरवरी को स्कूल का लोकार्पण किया गया था। बताया गया था कि स्कूल में 48 लाख रुपए से काम किए हैं इसलिए ऐसा किया गया है।

ये स्कूल 11 साल पहले ही बना था। तब 20 अक्टूबर 2014 को हुए लोकार्पण कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री विक्रम वर्मा, तत्कालीन मंत्री सुरेंद्र पटवा के साथ ही तत्कालीन महापौर कृष्णमुरारी मोघे और क्षेत्रीय विधायक मालिनी गौड़ सभी मौजूद थे।

इन सभी के नाम की शिलालेख भी थी। अब इसे हटा दिया गया है और नए सिरे से लोकार्पण कर नई शिलालेख लगा दी गई है।

पुरानी शिलालेख

नई शिलालेख में इनके नाम लिखे गए

नई शिलालेख में मुख्य अतिथि महापौर पुष्यमित्र भार्गव और विधायक मालिनी गौड़ का नाम है। वहीं क्षेत्रीय पार्षद कमलेश कालरा, नगर मंत्री महेश कुकरेजा, मंडल अध्यक्ष जितू चेलानी भी नामित हैं। सिंधी कॉलोनी व्यापारिक एसोसिएशन अध्यक्ष ललित पारानी समेत दर्जन भर नेताओं के नाम शामिल हैं।

नई शिलालेख

पहले लिखा लोकार्पण, फिर विवाद हुआ तो हटाया

इस शिलालेख पर पहले 'लोकार्पण' लिखा गया था, और कार्यक्रम के निमंत्रण में भी यही शब्द था। फिर जब विवाद हुआ और यह कहा गया कि स्कूल का लोकार्पण तो 11 साल पहले हो चुका था, तो इसे बदल दिया गया।

उस समय सिंधी समाज से निगम के एमआईसी सदस्य जवाहर मंगवानी ने इसका काम कराया था। एक बड़ा आयोजन भी हुआ था, जिसमें बीजेपी नेता, मंत्री, महापौर और विधायक सभी आए थे।

इसके बाद शिलालेख पर 'लोकार्पण' शब्द को छिपा दिया गया और इसे 'जीर्णोद्धार' का नाम दे दिया गया। पार्षद कमलेश कालरा ने बताया कि स्कूल में जगह-जगह से पानी टपक रहा था और शौचालय भी खराब थे। इन्हें ठीक करने के लिए 48 लाख रुपए की लागत आई।

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इंदौर न्यूज पार्षद कमलेश कालरा पुष्यमित्र भार्गव विधायक मालिनी गौड़ बीजेपी नेता सिंधी समाज सरकारी स्कूल
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