UGC के नए नियमों पर दिग्विजय सिंह का बयान, बोले- जरूरी सिफारिश को यूजीसी ने किया नजरअंदाज
Aman Vaishnav | Jan 29, 2026, 11:15 IST
ugc new regulations digvijay singh comments
UGC के नए नियमों पर विवाद और बढ़ गया है। इस बीच, कांग्रेस नेता और राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने इस पूरे विवाद पर अपनी बात रखी है। उन्होंने कहा कि संसदीय स्थाई समिति की सिफारिशों को लेकर लोगों में गलतफहमी फैलाई जा रही है।
UGC के नए नियमों पर बोले दिग्विजय सिंह
इस बीच, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने अपने X अकाउंट पर पोस्ट के जरिए इस मामले में सफाई दी है। उन्होंने कहा कि संसदीय समिति की कुछ अहम सिफारिशों को यूजीसी ने नजरअंदाज कर दिया है।
दिग्विजय सिंह ने ये भी कहा कि यूजीसी ने झूठे मामले दर्ज करने वाले विद्यार्थियों को सजा देने का जो प्रावधान हटाया गया है, इसका संसदीय समिति से कोई लेना देना नहीं था। उन्होंने कहा कि इस मामले को सुलझाने की जिम्मेदारी यूजीसी और शिक्षा मंत्रालय की है।
Note on UGC Equity Regulations
● The mothers of Payal Tadvi and Rohith Vemula - and the prompting of the Supreme Court - Modi Government and the UGC came with draft UGC Equity Regulations in February 2025.
● In December 2025, the Parliamentary Standing Committee on Education…
— Digvijaya Singh (@digvijaya_28) January 28, 2026
और क्या बोले दिग्विजय सिंह
फिर दिसंबर 2025 में शिक्षा पर संसद की स्थाई समिति ने इन नियमों की समीक्षा की और एक रिपोर्ट संसद में पेश की। समिति ने कहा कि ये नियम सही दिशा में हैं, लेकिन इन्हें और सख्त और साफ-साफ किया जाना चाहिए।
ये थी संसदीय समिति की सिफारिश
- ओबीसी छात्रों और अन्य हितधारकों के उत्पीड़न को जाति-आधारित भेदभाव की परिभाषा में शामिल किया जाए।
- दिव्यांगता को भी भेदभाव के एक आधार के रूप में माना जाए।
- इक्विटी कमेटी की संरचना में बदलाव किया जाए, ताकि 10 सदस्यों वाली समिति में एससी, एसटी और ओबीसी का प्रतिनिधित्व 50 प्रतिशत से ज्यादा हो और निर्णय निष्पक्ष हों।
- भेदभाव की स्पष्ट पहचान और उदाहरण नियमों में दिए जाएं, ताकि संस्थान मनमाने ढंग से किसी मामले को सही या गलत न ठहरा सके।
- हर साल जातिगत भेदभाव के मामलों का सार्वजनिक खुलासा किया जाए, फैकल्टी और प्रशासन के लिए संवेदनशीलता प्रशिक्षण अनिवार्य किया जाए, और छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता व कानूनी मदद सुनिश्चित की जाए।
सिफारिशों को UGC ने नजरअंदाज किया
लेकिन, इक्विटी कमेटी में एससी, एसटी और ओबीसी का प्रतिनिधित्व बढ़ाने और भेदभाव की विस्तृत परिभाषा तय करने जैसी सिफारिशों को UGC ने नजरअंदाज कर दिया।
झूठे मामलों पर सजा हटाने का फैसला UGC का
उन्होंने कहा कि अगर UGC ने भेदभाव की साफ परिभाषा और उदाहरण तय कर दिए होते, तो इससे वंचित वर्गों को सुरक्षा मिलती और फर्जी मामलों की संभावना भी कम हो जाती। यह बात संसदीय समिति ने भी कही थी, लेकिन उसे नजरअंदाज कर दिया गया।
पूरी जिम्मेदारी UGC और शिक्षा मंत्रालय की
समझें UGC Regulations 2026 आखिर क्या है?
क्या है UGC और उसका नया रेगुलेशन?
सख्त कार्रवाई का डर
क्या है विरोध के पीछे की असली वजह?
जयपुर में करणी सेना, ब्राह्मण महासभा, कायस्थ महासभा और वैश्य संगठनों ने मिलकर सवर्ण समाज समन्वय समिति (S-4) का गठन किया है, ताकि रेगुलेशन के खिलाफ संगठित विरोध किया जा सके। दुविधा यह है कि अब तक सरकार की ओर से कोई बड़ा नेता इस मसले पर बोलने को तैयार नहीं है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान हैं और जिस UGC ने इस नियम को लागू किया है, उसके चेयरमैन विनीत जोशी हैं।
कैसे बनाई जाएंगी कमेटी
1. इक्विटी कमेटी (Equity Committee) जिस पर विवाद है
अध्यक्ष (Chairperson): संस्थान का प्रमुख (जैसे वाइस चांसलर या प्रिंसिपल)।
सदस्य (Members): नियमों के मुताबिक, कमेटी में इन वर्गों का प्रतिनिधित्व होना ही चाहिए:
- OBC (अन्य पिछड़ा वर्ग) के सदस्य
- SC (अनुसूचित जाति) के सदस्य
- ST (अनुसूचित जनजाति) के सदस्य
- महिलाएं (Women)
- दिव्यांगजन (Persons with Disabilities)
- एंटी-डिस्क्रिमिनेशन ऑफिसर: एक सीनियर फैकल्टी मेंबर
2. राष्ट्रीय निगरानी समिति (National Monitoring Committee)
- यूजीसी के प्रतिनिधि।
- वैधानिक परिषदों (जैसे AICTE, NMC) के प्रतिनिधि।
- सिविल सोसाइटी (नागरिक समाज) के सदस्य।
3. वह लोग जिन्होंने यह नियम बनाया (UGC Commission)
जातिगत भेदभाव की शिकायत कैसे करें
अगर शिकायतकर्ता इक्विटी कमेटी की रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं होता, तो वह एक महीने के अंदर कॉलेज या विश्वविद्यालय में बनाए गए ऑम्बड्समैन के पास अपील कर सकता है। वहां तय समय में निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा, यूजीसी इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा और रैंडम इंस्पेक्शन करके यह सुनिश्चित करेगा कि नियम सही तरीके से लागू हो रहे हैं।
यह नियम किसकी सिफारिश पर लागू हुआ?
इससे पहले ओबीसी जातियों को यूजीसी के ड्राफ्ट में शामिल नहीं किया गया था। इसके अलावा, इस समिति ने सिफारिश की कि Equity Committee में SC/ST/OBC से आधे से ज्यादा प्रतिनिधि होने चाहिए। इन सिफारिशों के बाद यूजीसी ने जनवरी 2026 में फाइनल रेगुलेशंस में बदलाव करते हुए इसे नोटिफाई किया, जिसमें ओबीसी को शामिल किया गया और झूठी शिकायत पर जुर्माने का प्रावधान हटा दिया गया।
ये खबरें भी पढ़िए...
भोजशाला विवाद: दिग्विजय सिंह ने ASI आदेश लागू करने की अपील
UGC के नए नियमों के खिलाफ देशभर में प्रदर्शन, सुप्रीम कोर्ट आज करेगा सुनवाई
UGC के नए नियम: धीरेंद्र शास्त्री की सरकार से अपील, बोले- हमें आपस....
UGC इक्विटी पॉलिसी 2026 पर इंदौर में विरोध प्रदर्शन, जानें क्या है विवाद
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
Top News: खबरें काम की... नेपाल में पहाड़ टूटा, भूस्खलन और बाढ़ में 24 की मौत, डोनाल्ड ट्रंप का दावा- ईरान से जल्द खत्म होगी जंग
By Jitendra Shrivastava
मंत्रालय में बड़ा फेरबदल, 38 अनुभाग अधिकारियों की बदली जिम्मेदारी; वित्त-गृह समेत कई विभागों में नई तैनाती
By VINAY VERMA