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News in Short
- डॉ. नारायण व्यास को पुरातत्व क्षेत्र में पद्म श्री सम्मान मिला।
- व्यास ने सांची, रानी की वाव और भिबेटका जैसे महत्वपूर्ण स्थानों पर उत्खनन किया।
- डॉ. व्यास ने कहा कि यह सम्मान उनके परिवार और सहयोग से मिला है।
- उनका पुरातत्व कार्य आने वाली पीढ़ियों के लिए अहम है।
- डॉ. व्यास की पत्नी साधना ने सरकार को धन्यवाद दिया है।
News in Detail
मध्यप्रदेश से 4 शख्स को पद्मश्री मिलेगा। इनमें उज्जैन के डॉ. नारायण व्यास का नाम भी शामिल है। डॉ. व्यास को पुरातत्व क्षेत्र में सम्मान मिल रहा है। उन्होंने देश के कई राज्यों में उत्खनन किया। इससे प्राचीन ऐतिहासिक स्थलों का पता चला। भारत सरकार ने 25 जनवरी को पद्मश्री सम्मान सूची जारी की। इस सूची में 131 विद्वानों के नाम हैं।
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कौन हैं डॉ. नारायण व्यास?
5 जनवरी 1949 को उज्जैन में जन्मे डॉ. नारायण व्यास को पुरापथ के राहगिरी कहा जाता है। उन्होंने डी.लिट, एमए, पीएचडी की डिग्री हासिल की। डॉ. नारायण ने बताया, मेरे पिता स्व. डॉ. अनंत लाल व्यास, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। उन्होंने मुझे खानदानी बर्तन, कपड़े और बेशकीमती सामानों को संजोना सिखाया। यही कारण है कि मुझे इतिहास को संजोने की प्रेरणा मिली।
क्या बोले डॉ. नारायण व्यास?
मीडिया से बातचीत में डॉ. नारायण व्यास ने बताया, मैं 1972 में सेवा में आया और 2009 तक रहा। कुल 37 साल की सेवा के बाद 17 साल रिटायरमेंट हो चुके हैं। उन्होंने कहा, पुरातत्व के क्षेत्र में कार्य लगातार जारी है। 1968 में सेवा में आने से पहले, पद्मश्री विष्णु श्रीधर वाकणकर के मार्गदर्शन में काम शुरू किया। डॉ. व्यास ने कहा, "मां, पिता, पत्नी और बच्चों का सहयोग महत्वपूर्ण है। आज यह सम्मान उनके साथ के कारण ही मिला है।
डॉ. नारायण व्यास ने कहा, पुरातत्व के कार्य में हमने कई त्याग किए। महीनों जंगलों में बिताए, दिन रात एक कर दिया। बच्चे और पत्नी गर्व करते थे कि पिता संस्कृति को बचाने में जुटे हैं। यह काम आने वाली पीढ़ी के लिए था। इसी कारण मुझे 'पुरापथ के राहगीर' का नाम मिला।
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आज पेंशन अच्छी मिलती
डॉ. नारायण व्यास बताते हैं, 1972 में जब सर्विस शुरू की, तो 450 रुपए मासिक वेतन था। उस वक्त 450 रुपए बहुत होते थे। आधा पैसा बचत के लिए पिता को देता था। बाकी खर्च का हिसाब उन्हें देता था। समय के साथ तनख्वाह बढ़ी और प्रमोशन भी मिले। आज पेंशन अच्छी मिलती है।
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नारायण व्यास के 4 बड़े काम
डॉ. नारायण व्यास बताते हैं, मैंने पुरातत्व के क्षेत्र में कई कार्य किए हैं। पद्मश्री विष्णु श्रीधर वाकणकर के मार्गदर्शन में हमनें भिबेटका का उत्खनन किया। दूसरा सांची के स्तूपों पर उत्खनन किया। तीसरा रानी की वाव के उत्खनन पर काम किया, जिसका चित्र आज 100 रुपए के नोट पर है। चौथा, इतिहास संकलन समिति मध्य प्रांत का अध्यक्ष हूं। रायसेन के गांव गौरखपुर में भारत की सबसे बड़ी दीवार के अवशेष मिले, जिस पर अभी भी काम चल रहा है।
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नारायण व्यास के परिजनों में खुशी का माहौल
मीडिया से चर्चा में डॉ. नारायण व्यास की पत्नी साधना ने कहा, मैं शब्दों में नहीं कह सकती। मैं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, सीएम मोहन यादव का धन्यवाद करती हूं। उन्होंने मेरे पति के अथक प्रयासों को सम्मानित किया। डॉ. व्यास का संकल्प था कि वह बच्चों को संस्कृति और सभ्यता से परिचित करवाएं। मैंने भी प्राचार्य की नौकरी छोड़कर संस्कृति और सभ्यता के लिए काम किया।
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