उज्जैन में आरती के लिए जंग! 11 साल बाद रामघाट पर पंडों का जल सत्याग्रह
Sandeep Kumar | Aug 08, 2026, 19:38 IST
उज्जैन में आरती की जंग
उज्जैन के रामघाट पर आरती अधिकार को लेकर पंडा समिति और प्रशासन आमने-सामने हैं। पुलिस कार्रवाई के बाद पुरोहितों ने शिप्रा नदी में जल सत्याग्रह शुरू किया हैं।
समझें क्या है पूरा मामला
- उज्जैन के रामघाट आरती अधिकार को लेकर विवाद बढ़ा है।
- प्रशासन ने आरती की जिम्मेदारी महाकाल मंदिर समिति को सौंपी।
- पंडा समिति ने पुलिस बल प्रयोग का आरोप लगाया है।
- शिप्रा नदी में जल सत्याग्रह शुरू किया गया है।
- दोनों पक्षों की बातचीत अब तक बेनतीजा रही।
11 साल की परंपरा पर संकट
शुक्रवार को विवाद पहुंचा चरम पर
पुरोहितों को घाट से हटाया गया। इसके बाद पुलिस की मौजूदगी में बटुकों ने आरती संपन्न कराई। इसी कार्रवाई के विरोध में 8 अगस्त शाम 4 बजे से पंडा समिति ने जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है।
प्रशासन का पक्ष
एसडीएम एलएन गर्ग ने बताया कि प्रशासन ने पुरोहितों को संयुक्त रूप से आरती करने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन पंडा समिति पूरा नियंत्रण अपने पास रखने पर अड़ी रही। इस वजह से प्रस्ताव आगे नहीं बढ़ सका।
पंडा समिति के आरोप
पंडा समिति का कहना है कि धार्मिक आस्था को प्रशासनिक आयोजन का रूप देना ठीक नहीं है। समिति का दावा है कि करीब 8 से 10 दिन पहले नगर निगम ने आरती में इस्तेमाल होने वाला साउंड सिस्टम जब्त किया था। इसके बाद घाट के तख्तों को अतिक्रमण बताकर हटाने का नोटिस भी दिया गया।
पहले भी हो चुके हैं विवाद
इसके अलावा नगर निगम ने महाकाल की शाही सवारी और श्रावण मास की सुरक्षा को देखते हुए घाट से अवैध गुमटियां और तख्त हटाने का अभियान भी चलाया था। प्रशासन का कहना है कि इन्हीं अव्यवस्थाओं को खत्म करने के लिए व्यवस्था को नियंत्रण में लिया जा रहा है।
आगे की राह
FAQ
- उज्जैन में जल सत्याग्रह क्यों हो रहा है?
प्रशासन ने रामघाट की आरती की जिम्मेदारी महाकाल मंदिर समिति को सौंप दी। इसके विरोध में पंडा समिति ने जल सत्याग्रह शुरू किया। - प्रशासन ने क्या प्रस्ताव दिया था?
प्रशासन ने पुरोहितों को महाकाल मंदिर के बटुकों के साथ संयुक्त आरती करने का प्रस्ताव दिया था। पंडा समिति ने इसे स्वीकार नहीं किया।
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