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News in Short
- नालों के पानी में Faecal Coliform मिलने से बड़ा स्वास्थ्य खतरा।
- रोजाना करीब 98.86 MLD बिना ट्रीटमेंट गंदा पानी बहाया जा रहा।
- सिर्फ 73,875 घर ही सीवर लाइन से जुड़े।
- नगर निगम पर 17.80 करोड़ का पर्यावरणीय जुर्माना।
- अगली सुनवाई में देनी होगी जुर्माना जमा करने की जानकारी।
News in Detail
जबलपुर में नालों के गंदे पानी से सब्जियों की सिंचाई का मामला हाईकोर्ट पहुंचा। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की डिविजनल बेंच ने इसे जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ बताया। कोर्ट ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। पर्यावरणीय जुर्माना करोड़ों में बरकरार रखा गया।
मामले की सुनवाई की
इस जनहित याचिका पर 14 जनवरी 2026 को हाईकोर्ट की डिविजनल बेंच ने सुनवाई की। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की बेंच ने मामले की सुनवाई की। विस्तृत और सख्त आदेश 16 जनवरी को अपलोड किया गया। आदेश में नगर निगम की गंभीर लापरवाहियों को उजागर किया गया है।
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सब्जियों की सिंचाई पर गहरी चिंता
कोर्ट ने माना कि जबलपुर के ओमती, मोती, खूनी, उदरना नालों और रविशंकर सोहाने कृषि फार्म के पास के नालों से सब्जियों की सिंचाई हो रही है। यह नागरिकों की सेहत के लिए खतरनाक है। कोर्ट ने इसे बर्दाश्त नहीं करने की बात कही।
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जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा
हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित संयुक्त निरीक्षण दल ने जब पानी के नमूने जांचे, तो उनमें फेकल कोलीफॉर्म पाए गए। रिपोर्ट में साफ कहा गया कि यह पानी पीने, नहाने या खेती के लिए बिल्कुल भी उपयुक्त नहीं है। इससे गंभीर बीमारियां फैल सकती हैं।
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नगर निगम की भारी विफलता
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) की रिपोर्ट के अनुसार, जबलपुर में रोजाना 174 MLD सीवेज उत्पन्न होता है। शहर के 12 सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट पूरी क्षमता से काम नहीं कर रहे। इस कारण 98.86 MLD गंदा पानी बिना उपचार के नालों और नदियों में छोड़ा जा रहा है।
17.80 करोड़ रुपए का जुर्माना
NGT के दिशा-निर्देशों के तहत नगर निगम पर 1 जुलाई 2020 से 31 मार्च 2025 तक 17.80 करोड़ का पर्यावरणीय जुर्माना लगाया गया। कोर्ट ने नाराजगी जताई कि बार-बार नोटिस के बावजूद नगर निगम जबलपुर ने राशि जमा नहीं की। जिला कलेक्टर, जबलपुर को वसूली की जिम्मेदारी दी गई थी। बावजूद इसके भोपाल से पत्राचार के बाद भी पेनाल्टी जमा नहीं की गई।
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हाईकोर्ट के सख्त निर्देश
हाईकोर्ट ने गंदे पानी से सिंचाई पर रोक लगाई है। सभी STP को पूरी क्षमता से चलाने का आदेश दिया है। नालों में अपशिष्ट छोड़ने वाले उद्योगों पर कार्रवाई करने को कहा है। पूरे शहर को सीवर नेटवर्क से जोड़ने के लिए विशेष कमेटी बनाई जाएगी।
4 फरवरी को फिर होगी सुनवाई
इस मामले की अगली सुनवाई 4 फरवरी 2026 को होगी। नगर निगम को जुर्माने के भुगतान का ब्यौरा पेश करना होगा। साथ ही, अब तक की गई कार्रवाई का भी विवरण देना होगा।
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