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Photograph: (the sootr)
News in Short
- जतारा जनपद के CEO सिद्ध गोपाल वर्मा ने हाईकोर्ट में अपील दायर की।
- सरपंच के खिलाफ जांच शुरू करने के बाद केंद्रीय मंत्री पर तबादले की सिफारिश के आरोप।
- 3 साल से पहले तबादला करने को बताया ट्रांसफर पॉलिसी के खिलाफ।
- हाईकोर्ट ने दिए ट्रांसफर पर यथा स्थिति के आदेश।
- सरकार सहित कलेक्टर टीकमगढ़ और सरपंच पति को नोटिस।
News in Detail
JABALPUR. जबलपुर में एक सरकारी अधिकारी के तबादले को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। जनपद पंचायत CEO ने आरोप लगाया है कि सरपंच के खिलाफ जांच शुरू करने की वजह से केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक की अनुशंसा से उनका ट्रांसफर करा दिया गया। अब इस मामले में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने यथा स्थिति का आदेश देते हुए सरकार सहित अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जबलपुर में गुरुवार 5 मार्च 2026 को जबलपुर हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच के सामने एक दिलचस्प मामला सामने आया। जतारा जनपद के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) सिद्ध गोपाल वर्मा ने अपने तबादले को चुनौती देते हुए अपील दायर की है।
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच में हुई। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार, कलेक्टर टीकमगढ़ और संबंधित महिला सरपंच को नोटिस जारी कर उनसे जवाब मांगा है। तबादले को लेकर कोर्ट ने यथा स्थिति रखने के आदेश दिए हैं।
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सरपंच के खिलाफ जांच से शुरू हुआ विवाद
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मनोज कुमार चंसोरिया ने कोर्ट को बताया कि वे जतारा जनपद में CEO के पद पर पदस्थ थे। उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाली सतगुवा ग्राम पंचायत की सरपंच संगीता यादव और उनके पति जानकी शरण यादव के खिलाफ अनियमितताओं की शिकायत मिली थी। शिकायत मिलने के बाद उन्होंने नियमों के अनुसार जांच शुरू कर दी। आरोप है कि जांच आगे बढ़ने के साथ ही इसे रोकने के लिए उन पर कई तरह का दबाव बनाया गया। इसके बावजूद उन्होंने जांच प्रक्रिया जारी रखी।
राजनीतिक दबाव में तबादला कराने का आरोप
याचिका में यह बड़ा आरोप लगाया गया है कि सरपंच और उनके पति के राजनीतिक संबंधों के चलते उनका ट्रांसफर कराया गया है। CEO सिद्ध गोपाल वर्मा का कहना है कि क्षेत्र के सांसद और केंद्र सरकार में सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक ने उनके तबादले की अनुशंसा कर दी। उनका दावा है कि बिना किसी गलती के उनका तबादला कर दिया गया, जबकि वे तीन साल का कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाए थे।
तबादला नीति का उल्लंघन बताकर उठाया सवाल
याचिका में कहा गया है कि राज्य की तबादला नीति के अनुसार किसी अधिकारी का सामान्य कार्यकाल तीन वर्ष माना जाता है। सिद्ध गोपाल वर्मा का कहना है कि उनका स्थानांतरण इस अवधि से पहले कर दिया गया, जो नीति के खिलाफ है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका ट्रांसफर प्रशासनिक कारणों से नहीं बल्कि राजनीतिक दबाव के कारण किया गया।
मामले में केंद्रीय मंत्री भी बनाए गए पक्षकार
इस मामले में याचिकाकर्ता ने भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री वीरेंद्र कुमार खटीक को भी प्रतिवादी बनाया है।
हालांकि फिलहाल उनकी ओर से अधिवक्ता की स्थिति स्पष्ट न होने के कारण हाईकोर्ट ने उन्हें नोटिस जारी नहीं किया है। कोर्ट ने फिलहाल राज्य सरकार, कलेक्टर टीकमगढ़ और महिला सरपंच से जवाब मांगा है। जवाब आने के बाद मामले की अगली सुनवाई में आगे की स्थिति साफ होगी।
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पहले सिंगल बेंच से मिल चुकी है निराशा
इससे पहले इस मामले में हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में भी याचिका दायर की गई थी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली थी। अदालत ने उस समय कहा था कि तबादला सरकारी सेवा का सामान्य हिस्सा है और ट्रांसफर नीति केवल दिशानिर्देश होती है। इसी आदेश को चुनौती देते हुए अब सिद्ध गोपाल वर्मा ने डिवीजन बेंच में अपील दायर की है, जिस पर अब सुनवाई शुरू हो गई है।
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