हाईकोर्ट की रोक, जिला कोर्ट से डॉ. विनोद भंडारी की 100 करोड़ की जमीन मुक्त, अपील की तैयारी
Sanjay Gupta | Aug 13, 2026, 12:30 IST
डॉ. विनोद भंडारी की 100 करोड़ की जमीन मुक्त
जिला कोर्ट के चौंकाने वाले फैसले के बाद ईडी अब फिर से हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। जिला कोर्ट ने हाल ही में डॉ. विनोद भंडारी की व्यापमं घोटाले में ईडी द्वारा कुर्क की गई करीब 100 करोड़ की 15 एकड़ जमीन को मुक्त करने का आदेश दिया है।
व्यापमं घोटाले में छात्रों के गलत प्रवेश कराकर की गई अवैध सात करोड़ की कमाई के मामले में डॉ. विनोद भंडारी पर ईडी में केस है। इसके तहत ईडी ने मार्च 2016 में भंवरसला (सांवेर तहसील) गांव की विनोद भंडारी, मंजूश्री भंडारी और महक भंडारी के नाम की करीब 15 एकड़ जमीन कुर्क की थी। इस मामले में हाईकोर्ट की रोक के बाद जिला कोर्ट ने हाल ही में ताजा फैसले में यह जमीन मुक्त करने का आदेश दिया है। इस जमीन की मौजूदा कीमत सौ करोड़ के करीब है।
भंडारी पर आरोप है कि व्यापमं के मेडिकल घोटाले में उनके द्वारा अवैध प्रवेश कराकर सात करोड़ की कमाई की गई। इसी कमाई से उन्होंने यह संपत्तियां अपने और परिजन के नाम खरीदीं। इसी संपत्ति को ईडी ने मार्च 2016 में अटैच किया था।
जिला कोर्ट ने इस मामले में 13 जून 2023 को फैसला दिया और जमीन को मुक्त करने का आदेश दिया। साथ ही कहा कि इस जमीन की कीमत के बदले की गाइडलाइन कीमत की एफडी भंडारी से ली जाए।
जिला कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ ईडी हाईकोर्ट गया और वहां से नवंबर 2023 में फैसला हुआ। इसमें जिला कोर्ट के फैसले को अवैधानिक करार दिया। जस्टिस प्रेम नारायण सिंह ने कहा कि इसमें दावेदार तय नहीं है और यह अपराध से कमाई गई आय है, जिला कोर्ट ने पीएमएलए के प्रावधान को उचित तरीके से नहीं समझा। इसलिए जिला कोर्ट के फैसले को रद्द किया जाता है। जमीन ईडी के पास ही रहेगी।
नवंबर 2023 के हाईकोर्ट के फैसले के बाद 28 मई 2024 को हाईकोर्ट का एक फैसला और आया। यह फैसला इनकम टैक्स अपीलेट ट्रिब्यूनल और डॉ. विनोद भंडारी के मामले में था। ट्रिब्यूनल ने माना कि डॉ. विनोद भंडारी के यहां मिली सात करोड़ की आय हुंडी (ब्याज पर चलाई गई राशि) की थी।
इस फैसले के खिलाफ आयकर विभाग हाईकोर्ट गया था और वहां भी ट्रिब्यूनल के फैसले को सही माना। इस फैसले के बाद भंडारी ने फिर जिला कोर्ट में आवेदन लगाया और जमीन मुक्त करने की मांग की। इस पर जिला कोर्ट ने फैसला दिया कि जमीन मुक्त की जाए और जमीन के बदले की उतनी राशि एफडी कराकर ईडी के पास जमा की जाए।
भंडारी ने जिला कोर्ट में यह तर्क रखे- पहला कि यह सात करोड़ की आय हुंडी की आय है और अपराध की नहीं है, ऐसे में उनकी खरीदी गई संपत्ति सही है। दूसरा यह कि जमीन पर कब्जे हो रहे हैं।
ईडी ने यह तर्क रखे- इस पर ईडी की ओर से बताया गया कि यह अपराध की आय है या हुंडी की, यह केस के ट्रायल के बाद ही तय हो सकेगा, जो अभी जारी है। वहीं जमीन पर कब्जा हटा दिया गया है। ईडी ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट पहले ही जमीन मुक्त करने के फैसले को खारिज कर चुका है। साथ ही यह अपराध से कमाई गई आय है इसलिए इसके बदले में विकल्प में एफडी नहीं रख सकते हैं।
वहीं इस पर जिला कोर्ट ने फैसला दिया कि- हाईकोर्ट के नवंबर 2023 के फैसले के बाद नई परिस्थितियां आई हैं, इनकम टैक्स में आय को हुंडी की आय माना गया है न कि अपराध से कमाई गई। ऐसे में नई परिस्थिति में फिर फैसला लिया जा सकता है। भंडारी इस जमीन का दावेदार हैं, ऐसे में जमीन के बदले एफडी रखेंगे। हालांकि वह जमीन का ट्रांसफर नहीं कर सकेंगे और न ही इस पर कोई कर्ज ले सकेंगे।
वहीं जिला कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि ईडी कुर्क की गई संपत्ति की सही देखभाल और संरक्षण नहीं कर पा रहा है। इस जमीन पर कब्जे हो रहे हैं और यह हाईकोर्ट के पूर्व के फैसले से साबित होता है। साथ ही जगदीश सगर की याचिका में सामने आ चुका है कि उनके 94 स्कीम की जमीन को ईडी ने कुर्क किया और फिर उसी जमीन को सिटी यूनियन बैंक ने कुर्की की सूचना जारी कर दी। इसे फिर जिला कोर्ट में आवेदन देकर आदेश से रोका गया।
उधर ईडी भोपाल अब इस मामले में फिर से हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहा है। जिला कोर्ट के इस फैसले से ईडी की कार्रवाई और कुर्क की गई संपत्तियों को लेकर मामला उलझ सकता है। कारण है कि ईडी जांच में ही घिरे निगम के बेलदार ने भी ऐसे ही ज्वेलरी छोड़ने की मंजूरी मांगी थी और बदले में एफडी की बात हुई थी।
इसे जिला कोर्ट से मंजूरी मिली थी और फिर हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी। ईडी के पास करोड़ों की जमीन कुर्क है। इस फैसले के आधार पर कई अन्य आरोपी भी एफडी रखकर जमीन मुक्ति के आवेदन लगाएंगे। वहीं जमीन की बाजार कीमत और गाइडलाइन कीमत में भारी अंतर होता है। ऐसे में एफडी रखकर जमीन मुक्ति से आरोपी को लाभ होता है।
हाल ही में विनोद भंडारी पर बेनामी संपत्ति खरीदने के आरोप लगे हैं। इस मामले में लिखित शिकायत जांच एजेंसियों को हुई है। इसके बाद ईओडब्ल्यू इंदौर ने इसकी जांच शुरू की है। इसमें शिकायतकर्ता ने विविध जमीनों की सूचियां देकर कहा है कि यह उनके द्वारा अपराध की कमाई से खरीदी गई है।
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यह लगे हैं भंडारी पर आरोप
13 जून 2023 को यह हुआ फैसला
d68338fd-c64
हाईकोर्ट ने फैसले को बताया अवैधानिक
फिर जिला कोर्ट ने जमीन ऐसे की मुक्त
इस फैसले के खिलाफ आयकर विभाग हाईकोर्ट गया था और वहां भी ट्रिब्यूनल के फैसले को सही माना। इस फैसले के बाद भंडारी ने फिर जिला कोर्ट में आवेदन लगाया और जमीन मुक्त करने की मांग की। इस पर जिला कोर्ट ने फैसला दिया कि जमीन मुक्त की जाए और जमीन के बदले की उतनी राशि एफडी कराकर ईडी के पास जमा की जाए।
जिला कोर्ट ने कहा ईडी संपत्ति नहीं संभाल पा रहा
ईडी ने यह तर्क रखे- इस पर ईडी की ओर से बताया गया कि यह अपराध की आय है या हुंडी की, यह केस के ट्रायल के बाद ही तय हो सकेगा, जो अभी जारी है। वहीं जमीन पर कब्जा हटा दिया गया है। ईडी ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट पहले ही जमीन मुक्त करने के फैसले को खारिज कर चुका है। साथ ही यह अपराध से कमाई गई आय है इसलिए इसके बदले में विकल्प में एफडी नहीं रख सकते हैं।
जिला कोर्ट ने आदेश में यह कहा
d611dc72-59e
ईडी पर टिप्पणी, जमीन नहीं संभाल पा रहा
अब हाईकोर्ट जाने की तैयारी
इसे जिला कोर्ट से मंजूरी मिली थी और फिर हाईकोर्ट ने रोक लगाई थी। ईडी के पास करोड़ों की जमीन कुर्क है। इस फैसले के आधार पर कई अन्य आरोपी भी एफडी रखकर जमीन मुक्ति के आवेदन लगाएंगे। वहीं जमीन की बाजार कीमत और गाइडलाइन कीमत में भारी अंतर होता है। ऐसे में एफडी रखकर जमीन मुक्ति से आरोपी को लाभ होता है।
ईओडब्ल्यू जांच में भी घिरे हैं भंडारी
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