55 साल बाद वांग छी को भारत छोड़ने का फरमान, परिवार ने लगाई मदद की गुहार

Abhilasha Saksena Chakraborty | Jun 12, 2025, 18:09 IST
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Wang Qi asked to leave India
Wang Qi asked to leave India

1962 के भारत-चीन युद्ध के बाद भारत में बसे 86 वर्षीय पूर्व चीनी सैनिक वांग छी के सामने अब भारत छोड़ने का संकट है। बालाघाट जिले के तिरोड़ी में दशकों से रह रहे वांग छी का वीजा हाल ही में समाप्त हो गया, और सरकार ने उन्हें भारत छोड़ने का नोटिस जारी कर दिया।

MP News: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के तिरोड़ी कस्बे में रह रहे 86 वर्षीय वांग छी (Wang Qi) को भारत सरकार की ओर से भारत छोड़ने का नोटिस (Leave India Notice) मिला है। वांग छी 1962 के भारत-चीन युद्ध (India-China War) के बाद से भारत में रह रहे हैं और पिछले 55 वर्षों से शांतिपूर्ण जीवन व्यतीत कर रहे हैं। उनके वीजा की मियाद हाल ही में खत्म हो गई है, जिसके चलते उन्हें नोटिस भेजा गया।

परिवार की पीड़ा

वांग छी के बेटे विष्णु ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा अपना दुख ज़ाहिर करते हुए कहा-"हमारे पिता भारत में ही रहना चाहते हैं। वे यहां पूरी तरह से रच-बस चुके हैं। यह स्थिति हमारे लिए भावनात्मक रूप से बहुत भारी है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार वर्षों से भारत में ही रह रहा है और वो हर 6 महीने में वीजा नवीनीकरण (Visa Renewal) कराते रहे हैं।6 मई को हमें नोटिस मिला कि पापा का वीज़ा एक्सपायर हो गया है। इस बार समय परप्रक्रिया नहीं हो पाई, इस कारण संकट उत्पन्न हो गया। उन्होंने बताया कि उन्होंने जिला प्रशासन से मदद की अपील की है।

प्रशासन ने जताई असमर्थता

बालाघाट कलेक्टर मृणाल मीना ने साफ कहा कि यह मामला विदेश मंत्रालय से जुड़ा हुआ है और इसमें जिला प्रशासन की किसी तरह की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने परिवार को उचित माध्यम से मंत्रालय से संपर्क करने की सलाह दी है। ये भी पढ़ें: New America Visa Rules : सोशल मीडिया की एक पोस्ट बंद कर सकती है अमेरिका जाने का रास्ता

वांग छी की कहानी: चीन से बालाघाट तक का सफर

वांग छी 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान भारत आए थे। युद्ध के बाद वे भारत में ही रह गए और यहीं पर उनका जीवन, परिवार और सामाजिक संबंध बन गए। उन्होंने भारत को ही अपना घर मान लिया और समाज में घुल-मिल गए। आज उनके रिश्तेदार, मित्र और बच्चे सभी भारतीय नागरिक हैं।

क्यों उठे संवेदनशील सवाल?

यह मामला केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उन हजारों लोगों का है जो दशकों से भारत में शांति से रह रहे हैं लेकिन कानूनी प्रक्रियाओं की जटिलताओं से जूझ रहे हैं। वांग छी का मुद्दा मानवीय आधार (Humanitarian Ground) पर विचार करने योग्य है।

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