दुनिया की सबसे गर्म जगहों की लिस्ट में क्यों आ रहे एमपी के शहर? जानें इसके पीछे की असली वजह
Aman Vaishnav | May 27, 2026, 15:58 IST
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मध्यप्रदेश के कई शहर दुनिया के सबसे गर्म शहरों की लिस्ट में शामिल हो रहे हैं। तापमान 45 डिग्री से ऊपर तक पहुंच गया है। गर्म हवाओं और तेज धूप ने हालात ऐसे कर दिए हैं कि रात में भी लोगों को राहत नहीं मिल रही है।
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्यप्रदेश के कई शहरों का तापमान 46 डिग्री से ऊपर पहुंच रहा है।
- दुनिया के सबसे गर्म शहरों की सूची में एमपी के शहर भी नजर आने लगे हैं।
- मौसम वैज्ञानिक इसके पीछे सूखी हवाएं, कम नमी और कंक्रीट को वजह मान रहे हैं।
- जंगलों और हरियाली में कमी से तापमान लगातार बढ़ रहा है। भीषण गर्मी से लोग बेहाल हो रहैं।
- कर्क रेखा से गुजरने वाला इलाका होने के कारण यहां धूप ज्यादा तीखी पड़ती है।
आखिर मध्यप्रदेश में ऐसा क्या बदला ?
दोपहर के समय सड़कें सुनसान दिखाई देती हैं। लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। गर्म हवाओं के कारण रात में भी लोगों को राहत नहीं मिल रही है।
वहीं की IMD रिपोर्ट में भी लगातार मध्यप्रदेश के कई जिलों को लेकर अलर्ट जारी किया जा रहा है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि आखिर मध्यप्रदेश में ऐसा क्या बदल गया कि, यहां के शहर दुनिया के सबसे गर्म शहरों में शामिल होने लगे? क्या इसकी वजह सिर्फ मौसम है या फिर इसके पीछे हमारी खुद की गलतियां भी जिम्मेदार हैं?
मौसम वैज्ञानिक एस एस तोमर के अनुसार इसकी वजह सिर्फ एक नहीं है। प्रदेश की भौगोलिक स्थिति, कर्क रेखा, लगातार सूखी चल रही हवाएं, कम बारिश, घटते जंगल, तेजी से बढ़ते शहर और कंक्रीट का फैलाव। ये सभी कारण मिलकर मध्यप्रदेश को पहले से ज्यादा गर्म बना रहे हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि पहले प्रकृति इस गर्मी को काफी हद तक संभाल लेती थी। अब पर्यावरण का संतुलन तेजी से बिगड़ रहा है। यही कारण है कि गर्मी पहले के मुकाबले ज्यादा लंबी, ज्यादा तीखी और ज्यादा खतरनाक महसूस हो रही है।
इसे मौसम वैज्ञानिक अर्बन हीट आइलैंड प्रभाव कहते हैं। इसका मतलब होता है कि किसी शहर में कंक्रीट और निर्माण इतना ज्यादा बढ़ जाए कि, वहां का तापमान आसपास के ग्रामीण इलाकों से ज्यादा हो जाए। यही वजह है कि इस बार सिर्फ दिन ही नहीं, बल्कि रातें भी गर्म बनी हुई है। लोगों को चौबीसों घंटे राहत नहीं मिल रही है।
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उत्तर-पश्चिम की तरफ से आने वाली गर्म हवाएं
प्रदेश के ऊपर इस समय गर्म और शुष्क हवाओं का दबाव बना हुआ है। राजस्थान और उत्तर-पश्चिम भारत की तरफ से आने वाली गर्म हवाएं प्रदेश के बड़े हिस्से को प्रभावित कर रही हैं। यही वजह है कि दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी लगातार ज्यादा बना हुआ है।
जब किसी इलाके में बारिश कम हो जाए, मिट्टी की नमी खत्म होने लगे और लंबे समय तक बादल न बनें, तब जमीन तेजी से गर्म होती है। मध्यप्रदेश में अभी यही स्थिति देखने को मिल रही है। सूखी जमीन सूरज की गर्मी को ज्यादा तेजी से सोख रही है। ऊपर से गर्म हवाएं इस असर को और ज्यादा बढ़ा रही हैं।
इसके अलावा शहरों में तेजी से बढ़ते कंक्रीट ने भी गर्मी को और ज्यादा खतरनाक बना दिया है। पहले रात में तापमान थोड़ा नीचे आ जाता था। अब सीमेंट और डामर दिनभर की गर्मी को रात तक छोड़ते रहते हैं। यही वजह है कि लोगों को रात में भी गर्मी से राहत नहीं मिल पा रही है।
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कर्क रेखा भी बड़ी वजह
मई और जून के दौरान सूरज की किरणें इस इलाके में लगभग सीधी पड़ती हैं। इससे जमीन बहुत तेजी से गर्म होती है और तापमान अचानक ऊपर चला जाता है।
कर्क रेखा वाले इलाकों में सामान्य तौर पर गर्मी ज्यादा पड़ती है, लेकिन यदि वहां हरियाली कम हो जाए, जंगल घट जाएं और नमी खत्म होने लगे, तो हालात और ज्यादा खराब हो जाते हैं। मध्यप्रदेश में भी अभी यही स्थिति बनती दिखाई दे रही है।
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पहाड़ होने के बाद भी क्यों बढ़ रही गर्मी?
प्रदेश के कई पहाड़ी इलाकों में अब पहले जैसी हरियाली नहीं बची है। कई जगहों पर खनन, सड़क निर्माण और विकास परियोजनाओं के कारण जंगल कम हुए हैं।
जब पहाड़ों पर पेड़ कम होने लगते हैं, तब वे ठंडी हवा देने के बजाय दिनभर सूरज की गर्मी सोखने लगते हैं। बाद में वही गर्मी आसपास के इलाकों में फैलती रहती है, जिससे पूरे इलाके में गर्मी का असर और बढ़ जाता है।
शहरों में कंक्रीट कैसे बना हीट आइलैंड?
समस्या यह है कि कंक्रीट, सीमेंट और डामर जैसी सतहें गर्मी बहुत तेजी से सोखती हैं। दिनभर ये सतहें धूप से गर्म होती रहती हैं और फिर रात तक गर्मी छोड़ती रहती हैं। इसी वजह से शहर आसपास के ग्रामीण इलाकों की तुलना में ज्यादा गर्म महसूस होते हैं।
सूखी हवाएं और कम बारिश ने बढ़ाई परेशानी
इसके अलावा इस बार कई इलाकों में प्री-मानसून बारिश भी कमजोर रही है। बारिश कम होने की वजह से मिट्टी सूखी बनी हुई है। सूखी जमीन धूप को ज्यादा तेजी से सोखती है और तापमान तेजी से ऊपर चला जाता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर आने वाले दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई, तो गर्मी का असर और ज्यादा बढ़ सकता है।
अलनीनो ओर कच्छ के रण की हवा ने बढ़ाई गर्मी
एवरेज टेंप्रेचर भी 42 से 44 के बीच दर्ज हो रहा है। उन्होंने द सूत्र को बताया कि अल नीनो के साथ ही कच्छ के रण से गर्म हवाएं सीधे एमपी में आ रही है। जिससे एमपी के कई शहरों में हाई टेंप्रेचर दर्ज हो रहा है। मध्य प्रदेश में भीषण गर्मी का एक कारण पहाड़ी क्षेत्रों में हरियाली घटना भी है।
FAQ
- मध्यप्रदेश के शहर दुनिया के सबसे गर्म शहरों में क्यों शामिल हो रहे हैं?
मध्यप्रदेश में कर्क रेखा से सीधी धूप पड़ती है। इसके साथ सूखी हवाएं, कम बारिश, घटते जंगल और बढ़ता कंक्रीट तापमान को तेजी से बढ़ा रहे हैं। यही वजह है कि कई शहरों में गर्मी रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच रही है। - पेड़ों की कटाई से गर्मी का क्या संबंध है?
हां, पेड़ वातावरण को ठंडा रखने में मदद करते हैं। पेड़ कम होने पर जमीन और इमारतें तेजी से गर्म होती हैं। इससे इलाके का तापमान बढ़ जाता है और गर्मी ज्यादा महसूस होती है। - अर्बन हीट आइलैंड क्या होता है?
जब किसी शहर में हरियाली कम और कंक्रीट ज्यादा हो जाता है, तब वहां की सड़कें और इमारतें गर्मी सोखने लगती हैं। यही गर्मी रात तक बनी रहती है। इस असर को अर्बन हीट आइलैंड कहा जाता है।
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