राजस्थान पुलिस ने भेजें वाहन मालिकों को 1,188 करोड़ के नोटिस: 1 साल में 27 लाख चालान, AI से 18 लाख कटे
Ashish Bhardwaj | Oct 01, 2026, 12:31 IST
राजस्थान में कटे 1188 करोड़ के चालान
राजस्थान में टोल प्लाजा पर एआई-संचालित ई-डिटेक्शन सिस्टम ने 18 लाख चालान काटे हैं, जिनका कुल जुर्माना लगभग 1188 करोड़ रुपये है। यह प्रणाली निर्बाध रूप से वाहन की नंबर प्लेटों को स्कैन करती है, जिसका उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना है। सभी वाहन मालिकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने जरूरी दस्तावेज समय पर अपडेट करें।
राजस्थान में टोल पार करते ही अब वाहनों के चालान कट रहे हैं। एक साल के अंदर सिर्फ टोल प्लाजा से 18 लाख चालान कट चुके हैं। ये चालान एआई आधारित ई-डिटेक्शन सिस्टम से काटे जा रहे हैं। इनकी जुर्माना राशि करीब 1188 करोड़ रुपए बताई जा रही है।
प्रदेश में ट्रैफिक पुलिस ने करीब 1.5 लाख चालान काटते हैं। एक साल में नियम तोड़ने पर कुल 27.61 लाख चालान काटे गए। लेकिन इनमें सबसे बड़ा हिस्सा टोल प्लाजा पर चालान का है।
अकेले टोल पर ही एक साल में 18 लाख चालान कटे हैं। आसान भाषा में समझें तो रोज करीब 4,900 चालान कटे। इनकी जुर्माना राशि करीब 1188 करोड़ रुपए है। यानी औसतन एक चालान करीब 6,600 रुपए का बैठता है।
कुल चालानों में से करीब दो तिहाई सिर्फ 174 टोल पर कटे हैं। ये चालान चलते वाहनों के टोल पार करते ही कट जाते हैं। यानी Rajasthan Toll Plaza अब चालान का सबसे बड़ा केंद्र बन गए हैं।
यह पूरी जानकारी सीएस वी. श्रीनिवास के सामने पेश रिपोर्ट में सामने आई है। सीएस (CS – Chief Secretary) यानी मुख्य सचिव। रिपोर्ट राजस्थान परिवहन विभाग की है। Rajasthan Transport Department के मुताबिक सड़क सुरक्षा मजबूत करने के लिए यह सिस्टम लगाया गया है।
विभाग ने प्रदेश के टोल प्लाजा पर ई-डिटेक्शन प्रणाली लागू की है। इससे बिना वैध दस्तावेज वाले वाहनों के अपने आप चालान हो रहे हैं। इनमें टैक्स, फिटनेस, बीमा और पीयूसीसी जैसे दस्तावेज शामिल हैं। पीयूसीसी (PUCC – Pollution Under Control Certificate) यानी प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र।
ई-डिटेक्शन चालान एआई (AI – Artificial Intelligence) आधारित सिस्टम से कटता है। इसमें हाईवे या टोल पर वाहन रोकने की जरूरत नहीं पड़ती। पूरी प्रक्रिया कैमरों और डेटा के जरिए चलती है।
पहला, वाहन टोल प्लाजा या ई-डिटेक्शन कैमरे के नीचे से गुजरता है। दूसरा, कैमरा वाहन की नंबर प्लेट स्कैन करता है। तीसरा, नंबर का 5 तरह के डेटाबेस से मिलान होता है। इससे पता चल जाता है कि बीमा या प्रदूषण जैसा कौन सा दस्तावेज अधूरा है। बकाया टैक्स का चालान तो तुरंत कट जाता है।
ओवरलोड वाहनों पर भी यही सिस्टम नजर रख रहा है। ऐसे वाहनों के टोल डेटा का मिलान ई-रवन्ना और माइनिंग रिकॉर्ड से होता है। ई-रवन्ना यानी खनिज ढुलाई का ऑनलाइन परमिट। मिलान के बाद ओवरलोडिंग का चालान काटा जा रहा है।
रिपोर्ट के मुताबिक पुराने वाहन हटाने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश हैं। राजस्थान व्हीकल स्क्रैपिंग नीति-2025 अधिसूचित तो हुई, पर प्रभावी रूप से लागू नहीं हुई। इसी वजह से पुराने वाहन धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रहे हैं।
अफसरों के मुताबिक स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट पर नया वाहन लेने से टैक्स छूट मिलती है। यह छूट 16 से 26 प्रतिशत तक है। अधिकतम छूट एक लाख रुपए तक की है।
राजस्थान रोडवेज के बेड़े में करीब 900 नई बसें आनी थीं। इनमें एसी, ब्लू लाइन और इलेक्ट्रिक बसें शामिल हैं। लेकिन ये बसें अब तक नहीं आई हैं।
अफसरों का कहना है कि बसें शहरों तक पहुंचाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। राजस्थान रोडवेज नई बसें कब सड़क पर उतरेंगी, इसकी तारीख रिपोर्ट में नहीं है। तो यात्रियों को और कितना इंतजार करना होगा?
अजमेर, भरतपुर, दूदू, कोटा, उदयपुर और अलवर में आधुनिक बस स्टैंड बन रहे हैं। कुछ जिला मुख्यालयों और कस्बों में भी यह काम चल रहा है।
एआई से चालान का सिस्टम अब हर टोल पर सक्रिय है। ऐसे में वाहन के सभी कागज अपडेट रखना ही सबसे सुरक्षित रास्ता है। टैक्स, फिटनेस, बीमा और पीयूसीसी, चारों पर नजर रखें।
प्रदेश में ट्रैफिक पुलिस ने करीब 1.5 लाख चालान काटते हैं। एक साल में नियम तोड़ने पर कुल 27.61 लाख चालान काटे गए। लेकिन इनमें सबसे बड़ा हिस्सा टोल प्लाजा पर चालान का है।
अकेले टोल पर ही एक साल में 18 लाख चालान कटे हैं। आसान भाषा में समझें तो रोज करीब 4,900 चालान कटे। इनकी जुर्माना राशि करीब 1188 करोड़ रुपए है। यानी औसतन एक चालान करीब 6,600 रुपए का बैठता है।
174 टोल पर दो तिहाई चालान
सीएस वी. श्रीनिवास ने पेश की रिपोर्ट
विभाग ने प्रदेश के टोल प्लाजा पर ई-डिटेक्शन प्रणाली लागू की है। इससे बिना वैध दस्तावेज वाले वाहनों के अपने आप चालान हो रहे हैं। इनमें टैक्स, फिटनेस, बीमा और पीयूसीसी जैसे दस्तावेज शामिल हैं। पीयूसीसी (PUCC – Pollution Under Control Certificate) यानी प्रदूषण जांच प्रमाण पत्र।
एआई से चालान ऐसे करता है काम
तीन कदम में समझें प्रक्रिया
ओवरलोडिंग पर भी नजर
स्क्रैपिंग नीति कागजों तक सीमित
अफसरों के मुताबिक स्क्रैपिंग सर्टिफिकेट पर नया वाहन लेने से टैक्स छूट मिलती है। यह छूट 16 से 26 प्रतिशत तक है। अधिकतम छूट एक लाख रुपए तक की है।
राजस्थान रोडवेज नई बसें अब तक नहीं
अफसरों का कहना है कि बसें शहरों तक पहुंचाने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। राजस्थान रोडवेज नई बसें कब सड़क पर उतरेंगी, इसकी तारीख रिपोर्ट में नहीं है। तो यात्रियों को और कितना इंतजार करना होगा?
छह शहरों में बन रहे आधुनिक बस स्टैंड
वाहन मालिकों के लिए सीधा संदेश
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