IAS शिखर अग्रवाल के बाद IPS पत्नी प्रशाखा माथुर भी APO, 40 विला-कॉटेज की खरीदी से जुड़ा है मामला
Ashish Bhardwaj | Oct 31, 2026, 13:15 IST
IPS प्रशाखा माथुर
राजस्थान में 40 विला और कॉटेज की खरीद का मामला अब IAS-IPS दंपती पर भारी पड़ता दिख रहा है। सरकार ने एक के बाद एक दोनों अधिकारियों को पद से हटाकर APO कर दिया है। पहले वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल पर कार्रवाई हुई और अब उनकी IPS पत्नी प्रशाखा माथुर को भी पदस्थापन की प्रतीक्षा में भेज दिया गया है।
मामला इसलिए भी गंभीर हो गया है, क्योंकि एक दिन पहले ही सरकार ने शिखर अग्रवाल के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को प्रारंभिक जांच की मंजूरी दी थी। इसके अगले ही दिन पत्नी को भी APO करने का आदेश जारी हो गया।
बता दें कि एक ही कंपनी से 40 विला और कॉटेज खरीदने के इस मामले में अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर इतनी बड़ी संख्या में संपत्तियां क्यों खरीदी गईं और इनकी खरीद के पीछे क्या वजह थी? फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच में सामने आने बाकी हैं।
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ, जब IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनके परिवार के नाम पर 40 विला और कॉटेज खरीदने की जानकारी सामने आई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये सभी संपत्तियां एक ही कंपनी से खरीदी गई थीं। इनमें 20 कॉटेज उदयपुर के बूझड़ा और 20 विला अलवर के अजबगढ़ स्थित अनंता रिसॉर्ट में हैं।
बताया जा रहा है कि शिखर अग्रवाल और उनके परिवार ने करीब ढाई साल में गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड से ये संपत्तियां खरीदी थीं। खरीदारी में शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी IPS प्रशाखा माथुर, दोनों बेटों और ससुराल पक्ष के सदस्यों के नाम शामिल बताए गए हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि करीब 6 करोड़ 16 लाख 50 हजार रुपए में खरीदी गई इन संपत्तियों को बाद में उसी कंपनी को किराए पर दे दिया गया, जिससे इन्हें खरीदा गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे परिवार को हर साल करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपए किराया मिलने की बात सामने आई है।
यानी करीब 6.16 करोड़ रुपए की बताई गई संपत्तियों से सालाना 1.80 करोड़ रुपए किराए का दावा किया गया है। इसी खरीद और किराए के सौदे को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) अब यह पता लगाएगा कि IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल ने सरकारी पद पर रहते हुए अपने प्रभाव का गलत इस्तेमाल तो नहीं किया। ACB के महानिदेशक गोविंद गुप्ता के मुताबिक, मीडिया रिपोर्ट्स, उद्योग विभाग से मिली जानकारी और गोपनीय सूचनाओं की जांच के बाद सरकार से अनुमति मांगी गई थी।
राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत शिखर अग्रवाल के खिलाफ जांच की मंजूरी दे दी है।
अब ACB यह पता लगाएगी कि जिन कंपनियों से अग्रवाल और उनके परिवार ने संपत्तियां खरीदीं, क्या उन्हें सरकारी स्तर पर कोई खास फायदा पहुंचाया गया था? रिसॉर्ट बनाने के लिए मिली मंजूरियों, सरकारी रियायतों और विशेष आर्थिक पैकेज की भी जांच होगी।
शिखर अग्रवाल उदयपुर कलेक्टर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष और उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं। ACB इन पदों पर रहते हुए उनके फैसलों की भी जांच करेगी।
जांच में यह देखा जाएगा कि क्या उन फैसलों से संबंधित कंपनी को कोई अनुचित लाभ मिला था। फिलहाल शिखर अग्रवाल के खिलाफ जांच की मंजूरी मिली है। आरोप साबित हुए हैं या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा।
इस पूरे मामले में 27 मार्च 2026 की तारीख ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। ACB के मुताबिक, इसी दिन IAS शिखर अग्रवाल के नाम पर 20 विला की रजिस्ट्री होने की जानकारी सामने आई है। खास बात यह है कि इसी तारीख को गोयल फैशन्स कंपनी को विशेष आर्थिक पैकेज जारी किए जाने की बात भी सामने आई है।
अब ACB यह पता लगाएगी कि एक ही दिन विला की रजिस्ट्री और कंपनी को सरकारी पैकेज मिलने के पीछे कोई संबंध था या यह महज संयोग था। जांच में यह भी देखा जाएगा कि कंपनी को कोई अनुचित फायदा तो नहीं पहुंचाया गया।
इसके अलावा ACB शिखर अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों की भी जांच करेगी। यह पता लगाया जाएगा कि कहीं ये संपत्तियां उनकी वैध कमाई से ज्यादा तो नहीं हैं। हालांकि, अभी ये जांच के विषय हैं और किसी तरह की गड़बड़ी साबित नहीं हुई है।
प्रशाखा माथुर को APO किए जाने के आदेश के साथ इस मामले में प्रशासनिक कार्रवाई का दायरा बढ़ गया है। अब दोनों अधिकारियों को पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया है। हालांकि, उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में प्रशाखा माथुर के APO आदेश के कारणों का अलग से विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।
इस पूरे मामले में संपत्तियों की खरीद, उनकी कीमत, लीज समझौते, सरकारी रियायतों और संपत्ति विवरणों की जांच अहम होगी। शिखर अग्रवाल की ओर से पहले संपत्तियों की खरीद को कानूनी बताते हुए आयकर और संपत्ति विवरण में जानकारी देने की बात कही गई थी।
फिलहाल आरोपों की जांच होनी बाकी है। ACB की जांच और संबंधित विभागों के रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि संपत्तियों की खरीद और कंपनी को मिले सरकारी लाभों के बीच कोई अनुचित संबंध था या नहीं।
बता दें कि एक ही कंपनी से 40 विला और कॉटेज खरीदने के इस मामले में अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। आखिर इतनी बड़ी संख्या में संपत्तियां क्यों खरीदी गईं और इनकी खरीद के पीछे क्या वजह थी? फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच में सामने आने बाकी हैं।
एक ही कंपनी से खरीदे 40 विला और कॉटेज, फिर उसी को किराए पर दे दिए
बताया जा रहा है कि शिखर अग्रवाल और उनके परिवार ने करीब ढाई साल में गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड से ये संपत्तियां खरीदी थीं। खरीदारी में शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी IPS प्रशाखा माथुर, दोनों बेटों और ससुराल पक्ष के सदस्यों के नाम शामिल बताए गए हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि करीब 6 करोड़ 16 लाख 50 हजार रुपए में खरीदी गई इन संपत्तियों को बाद में उसी कंपनी को किराए पर दे दिया गया, जिससे इन्हें खरीदा गया था। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इससे परिवार को हर साल करीब 1 करोड़ 80 लाख रुपए किराया मिलने की बात सामने आई है।
यानी करीब 6.16 करोड़ रुपए की बताई गई संपत्तियों से सालाना 1.80 करोड़ रुपए किराए का दावा किया गया है। इसी खरीद और किराए के सौदे को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।
ACB जांच में क्या-क्या पता लगाएगी?
राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17-A के तहत शिखर अग्रवाल के खिलाफ जांच की मंजूरी दे दी है।
अब ACB यह पता लगाएगी कि जिन कंपनियों से अग्रवाल और उनके परिवार ने संपत्तियां खरीदीं, क्या उन्हें सरकारी स्तर पर कोई खास फायदा पहुंचाया गया था? रिसॉर्ट बनाने के लिए मिली मंजूरियों, सरकारी रियायतों और विशेष आर्थिक पैकेज की भी जांच होगी।
शिखर अग्रवाल उदयपुर कलेक्टर, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अध्यक्ष और उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव जैसे अहम पदों पर रह चुके हैं। ACB इन पदों पर रहते हुए उनके फैसलों की भी जांच करेगी।
जांच में यह देखा जाएगा कि क्या उन फैसलों से संबंधित कंपनी को कोई अनुचित लाभ मिला था। फिलहाल शिखर अग्रवाल के खिलाफ जांच की मंजूरी मिली है। आरोप साबित हुए हैं या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही साफ होगा।
एक ही दिन 20 विला की रजिस्ट्री
अब ACB यह पता लगाएगी कि एक ही दिन विला की रजिस्ट्री और कंपनी को सरकारी पैकेज मिलने के पीछे कोई संबंध था या यह महज संयोग था। जांच में यह भी देखा जाएगा कि कंपनी को कोई अनुचित फायदा तो नहीं पहुंचाया गया।
इसके अलावा ACB शिखर अग्रवाल और उनके परिवार के सदस्यों के नाम पर मौजूद संपत्तियों की भी जांच करेगी। यह पता लगाया जाएगा कि कहीं ये संपत्तियां उनकी वैध कमाई से ज्यादा तो नहीं हैं। हालांकि, अभी ये जांच के विषय हैं और किसी तरह की गड़बड़ी साबित नहीं हुई है।
जांच के बाद ही साफ होगी तस्वीर
इस पूरे मामले में संपत्तियों की खरीद, उनकी कीमत, लीज समझौते, सरकारी रियायतों और संपत्ति विवरणों की जांच अहम होगी। शिखर अग्रवाल की ओर से पहले संपत्तियों की खरीद को कानूनी बताते हुए आयकर और संपत्ति विवरण में जानकारी देने की बात कही गई थी।
फिलहाल आरोपों की जांच होनी बाकी है। ACB की जांच और संबंधित विभागों के रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगा कि संपत्तियों की खरीद और कंपनी को मिले सरकारी लाभों के बीच कोई अनुचित संबंध था या नहीं।
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