NABH ट्रेनिंग के बीच एम्स जोधपुर के रेजिडेंट डॉक्टर ने की आत्महत्या, जांच शुरू
Saurabh Mishra | Sept 22, 2026, 20:41 IST
AIIMS की व्यवस्था पर सवाल
AIIMS जोधपुर के एनस्थीसिया विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर राजनरेश यादव ने आत्महत्या कर ली। पुलिस कारणों की जांच कर रही है। घटना के बाद डॉक्टरों के काम के दबाव और लंबे वर्किंग आवर्स को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
नरेश रमेश@ जोधपुर। AIIMS जोधपुर में एनस्थीसिया विभाग के रेजिडेंट डॉक्टर राजनरेश यादव ने आत्महत्या कर ली। वे अलवर के रहने वाले थे। घटना की जानकारी मिलने के बाद बासनी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। डॉक्टर ने आत्महत्या क्यों की, इसकी वजह अभी साफ नहीं हुई।
पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही। इस बीच एम्स में रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के दबाव और लंबे वर्किंग आवर्स को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। हालांकि राजनरेश की आत्महत्या के पीछे काम का दबाव था या कोई दूसरी वजह, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
घटना के बाद जोधपुर एम्स परिसर में भी इस मामले को लेकर चर्चा है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आत्महत्या से पहले डॉक्टर किन हालात से गुजर रहे थे। फिलहाल जांच पूरी होने से पहले किसी एक वजह को आत्महत्या का कारण नहीं माना जा सकता।
रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या के बाद उनके कामकाज और ड्यूटी के घंटों को लेकर भी सवाल उठ रहे। संस्थान के भीतर लंबे वर्किंग आवर्स और ज्यादा काम के दबाव की चर्चा हो रही। हालांकि अभी ऐसी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई, जिससे यह साबित हो कि राजनरेश यादव ने काम के दबाव के कारण आत्महत्या की। पुलिस की जांच के बाद ही इसकी असली वजह सामने आ सकेगी।
रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या ऐसे समय हुई है, जब एम्स जोधपुर में तीन दिन का NABH प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा था। इसमें अस्पताल की सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर करने और कामकाज में सुधार को लेकर चर्चा की गई।
एम्स की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मरीजों की सुरक्षा, अस्पताल के रोजाना के काम, विभागों के बीच तालमेल, रिकॉर्ड रखने और SOP को बेहतर तरीके से लागू करने जैसे मुद्दों पर फोकस किया गया।इसी दौरान रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या के बाद अब डॉक्टरों के काम के माहौल और उनकी समस्याओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
AIIMS जोधपुर में रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या या इसकी कोशिश से जुड़ा यह पहला मामला नहीं। 2019 में भी एम्स के एक रेजिडेंट डॉक्टर ने हॉस्टल में आत्महत्या की कोशिश की थी। घटना से पहले डॉक्टर ने पीजी स्टूडेंट्स के सोशल मीडिया ग्रुप में मैसेज किया था। मैसेज देखने के बाद साथी डॉक्टर उनके कमरे तक पहुंचे। दरवाजा तोड़कर उन्हें बाहर निकाला गया और अस्पताल में भर्ती कराया गया। समय पर इलाज मिलने से उनकी जान बच गई थी।
उस समय सामने आई रिपोर्ट में एम्स के सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि इससे पहले ईएंडटी विभाग के एक रेजिडेंट डॉक्टर ने भी आत्महत्या की कोशिश की थी। जुलाई 2021 में AIIMS जोधपुर की एक फिजियोथेरेपिस्ट ने भी आत्महत्या की थी। वह संस्थान के क्वार्टर में मिली थीं। उस समय भी आत्महत्या की वजह साफ नहीं हो सकी थी।
राजनरेश यादव की आत्महत्या के मामले में अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल इसकी वजह पता करना है। बासनी थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है। घटना के बाद रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के घंटे, काम का दबाव और संस्थान के भीतर अपनी परेशानी बताने की व्यवस्था जैसे मुद्दे भी चर्चा में आ गए हैं। हालांकि इन मुद्दों का राजनरेश की आत्महत्या से कोई सीधा संबंध था या नहीं, यह अभी जांच में साफ होना बाकी है। फिलहाल पुलिस की जांच और AIIMS प्रशासन की ओर से आने वाली आधिकारिक जानकारी से ही आत्महत्या की असली वजह साफ हो सकेगी।
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पुलिस मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही। इस बीच एम्स में रेजिडेंट डॉक्टरों के काम के दबाव और लंबे वर्किंग आवर्स को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई। हालांकि राजनरेश की आत्महत्या के पीछे काम का दबाव था या कोई दूसरी वजह, इसकी अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
एम्स जोधपुर में रेजिडेंट डॉक्टर ने किया सुसाइड
काम के दबाव को लेकर भी हो रही बात
NABH ट्रेनिंग के बीच घटना
एम्स की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. गोवर्धन दत्त पुरी के नेतृत्व में कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें मरीजों की सुरक्षा, अस्पताल के रोजाना के काम, विभागों के बीच तालमेल, रिकॉर्ड रखने और SOP को बेहतर तरीके से लागू करने जैसे मुद्दों पर फोकस किया गया।इसी दौरान रेजिडेंट डॉक्टर की आत्महत्या के बाद अब डॉक्टरों के काम के माहौल और उनकी समस्याओं को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
2019 में भी सामने आया था मामला
उस समय सामने आई रिपोर्ट में एम्स के सूत्रों के हवाले से बताया गया था कि इससे पहले ईएंडटी विभाग के एक रेजिडेंट डॉक्टर ने भी आत्महत्या की कोशिश की थी। जुलाई 2021 में AIIMS जोधपुर की एक फिजियोथेरेपिस्ट ने भी आत्महत्या की थी। वह संस्थान के क्वार्टर में मिली थीं। उस समय भी आत्महत्या की वजह साफ नहीं हो सकी थी।
अब आत्महत्या की वजह तलाश रही पुलिस
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