अफसर की डेस्क पर मिले 20 हजार आपत्ति फॉर्म, कांग्रेस का आरोप-वोटर लिस्ट से नाम हटवाने की साजिश

राजस्थान के अलवर में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान तब विवाद की स्थिति पैदा हो गई, जब रिटर्निंग ऑफिसर की डेस्क पर नाम हटवाने के 20 हजार आवेदन मिले। कांग्रेस का आरोप है कि अल्पसंख्यक वोटों को कटवाने के लिए खेल रचा जा रहा है।

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Ashish Bhardwaj
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सुनील जैन@अलवर
राजस्थान में अलवर में मतदाता गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर विवाद खड़ा हो गया। बताया जाता है कि मिनी सचिवालय में अलवर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र के रिटर्निंग ऑफिसर (आईएएस) माधव भारद्वाज की डेस्क पर वोटर लिस्ट से नाम हटवाने के 15 से 20 हजार से ज्यादा फॉर्म रखे मिले। यह सीट नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की है।

कांग्रेस का आरोप है कि इन चार विधानसभा सीटों रामगढ़, अलवर ग्रामीण, किशनगढ़ बास और तिजारा विधानसभा में सत्तारूढ़ भाजपा की मंशा 25 से 30 हजार वोट बढ़ाने की है। हालांकि, बाद में अलवर जिला कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि यह सभी आपत्ति के फॉर्म हैं, जो ऑनलाइन किए जाएंगे। उसके बाद इन पर निर्णय लिया जाएगा।

कांग्रेस नेता पहुंचे तो कर्मचारी गायब

कांग्रेस का कहना है कि जब मिनी सचिवालय में वोटर लिस्ट से नाम हटवाने के बारे में जानकारी मिली तो पार्टी के खैरथल-तिजारा जिलाध्यक्ष बलराम यादव, महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष कमलेश सैनी और प्रदेश सचिव लीली यादव समेत कई नेता मौके पर पहुंचे। लेकिन, तब रिटर्निंग अधिकारी के चेंबर में काम करने वाले कर्मचारी वहां से निकल गए। कांग्रेस का आरोप है कि एक-एक व्यक्ति के नाम पर 300 से 500 आपत्ति के फॉर्म मिले हैं। हैरानी की बात यह है कि इन फॉर्मों में आपत्ति दर्ज कराने वाले के मोबाइल नंबर तक नहीं हैं। फॉर्म आधे कम्प्यूटराइज्ड हैं और सीरियल नंबर दिए हुए हैं।

अल्पसंख्यक बहुल सीटों पर अधिक आपत्ति

कांग्रेस के जिलाध्यक्ष बलराम यादव ने कहा कि अलवर ग्रामीण, रामगढ़, तिजारा, किशनगढ़बास और थानागाजी में सबसे ज्यादा आपत्तियों के फॉर्म एक साथ आए हैं। अकेले अलवर ग्रामीण में 20 से 25 हजार आवेदन रिटर्निंग ऑफिसर की टेबल पर मिले हैं, जो ज्यादातर वोटर लिस्ट से नाम कटवाने के थे। यादव का कहना है कि तिजारा, रामगढ़ और किशनगढ़बास में भी हजारों फॉर्म पहुंचे हैं, लेकिन ये आवेदन कहां से आए हैं। ये किसी को नहीं पता है। यहां मिले आपत्तियां के फॉर्म में एक जैसी लिखावट है। 

एक ही नाम के 500 फॉर्म

बलराम यादव का कहना है कि रिटर्निंग अधिकारी की डेस्क पर पड़े मिले आवेदनों में साहून और रमजान सहित अनेक लोगों के नाम पर 300 से 500 आपत्ति के फॉर्म आए हैं। इतना ही नहीं, आपत्ति दर्ज कराने वाले के मोबाइल नंबर भी नहीं हैं। इसके अलावा फॉर्म में आधी जानकारी कम्प्यूटराइज्ड है। सीरियल नंबर भी दिए हुए हैं। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने आरोप लगाया कि यह उनके वोटरों खासकर अल्पसंख्यकों और पिछड़े वर्ग के लोगों के नाम कटवाने की साजिश है। उन्होंने कहा कि तिजारा, रामगढ़ किशनगढ़ बास और अलवर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र में 25 से 30 हजार वोट बढ़ाने की तैयारी चल रही है। साथ ही कुछ वोटो को काटने की रणनीति है।

मीडिया को दिखाए फॉर्म

कांग्रेस नेता बलराम ने कहा कि जब यहां के उपखंड अधिकारी को कॉल किया गया तो वह नहीं मिले और ना ही कोई कर्मचारी यहां जवाब देने को तैयार हैंं उन्होंने मीडिया के सामने फॉर्म दिखाते हुए कहा, यह देखिए एक ही बंडल पर एक ही आदमी के साइन हैं। इन पर भी कोई मोबाइल नंबर नहीं है। यह सारी मुस्लिम मतदाता बहुल विधानसभा सीट हैं। 

जांच के लिए सात दिन का समय

अलवर जिला कलेक्टर आर्तिका शुक्ला ने इन आरोपों पर बताया कि खैरथल तिजारा जिले से कांग्रेस के कुछ पदाधिकारी आए थे। उन्हें बताया गया है कि गुरुवार रात 12:00 तक ऑफलाइन या ऑनलाइन, जो भी आपत्ति आएंगी, उनकी विधिवत जांच की जाएगी। सभी आपत्तियों को ऑनलाइन सिस्टम में दर्ज किया जाएगा।  

उन्होंने यह भी बताया कि 15 दिसंबर से और 15 जनवरी तक एक माह के दौरान जो भी आपत्ति आई हैं, उनको लिया गया है। फिर इन्हें सभी बूथ लेवल अधिकारियों को दिए जाएंगे जिन्हें जांच के लिए 7 दिन का समय दिया जाएगा। वह जांच कर रिपोर्टिंग करेंगे। इसके बाद जो भी फार्म पर आपत्तियां आई हैं उन पर निर्णय लिया जाएगा।

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कांग्रेस भाजपा एसआईआर अलवर टीकाराम जूली
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