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Photograph: (the sootr)
News In Detail
- पूर्व मंत्री बनवारी लाल शर्मा के परिवार में गहरी कलह, पत्नि और बहू ने एक-दूसरे पर मारपीट और मानसिक उत्पीड़न के आरोप लगाए।
- मालविका मुद्गल ने अपनी मां नीरजा शर्मा और मौसी पर अभद्रता के आरोप लगाए, जबकि नीरजा शर्मा ने अपनी संतान के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
- नीरजा शर्मा ने आरोप लगाया कि बेटे और बेटी ने उन्हें शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया और पुश्तैनी मकान खाली करने का दबाव डाला।
- पुलिस ने नीरजा शर्मा की शिकायत पर मामला दर्ज किया और जांच शुरू कर दी है।
- यह विवाद अब सार्वजनिक हो गया है, जिससे परिवार के भीतर की स्थिति सामने आ गई है।
News In Detail
राजस्थान में धौलपुर के दिग्गज नेता रहे पूर्व मंत्री बनवारी लाल शर्मा के परिवार में कलह अब सार्वजनिक रूप से सामने आ गई है। अब नौबत एक दूसरे के खिलाफ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज करने की आ गई है। पहले उनकी बेटी मालविका मुद्गल ने अपनी मां नीरजा शर्मा और मौसी वारिजा शर्मा पर अभद्रता और मारपीट के आरोप लगाए थे। इसके बाद दोनों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था।
नीरजा अशोक शर्मा का पलटवार
अब, नीरजा अशोक शर्मा, जो भाजपा के टिकट पर राजाखेड़ा से विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी थीं, ने पलटवार करते हुए अपनी बेटी मालविका और बेटे दुष्यंत के खिलाफ कोतवाली थाने में मामला दर्ज कराया है। नीरजा शर्मा ने रिपोर्ट में आरोप लगाया कि दोनों संतानें लंबे समय से उनके साथ मारपीट, गाली-गलौज और मानसिक उत्पीड़न कर रही हैं।
पीट-पीट कर किया उत्पीड़न
नीरजा शर्मा ने कहा कि गत दिवस उनके बेटे और बेटी ने उन्हें पीटा और शारीरिक उत्पीड़न किया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि दोनों उन्हें डराकर पुश्तैनी मकान खाली करने का दबाव बना रहे हैं।
पुलिस कार्रवाई
नीरजा शर्मा की शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला की एफआईआर दर्ज कर ली है और जांच की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस विवाद ने अब तक परिवार के भीतर की स्थिति को सार्वजनिक कर दिया है और परिवार के सदस्यों के बीच रिश्तों में खटास को उजागर किया है।
कौन है बनवारी लाल शर्मा
पूर्व मंत्री बनवारी लाल शर्मा राजस्थान के धौलपुर से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता थे, जिन्होंने पांच बार विधायक के रूप में कार्य किया। 1980 में उन्होंने वसुंधरा राजे को हराया था और भैरों सिंह शेखावत को भी कड़ी टक्कर दी थी। वे ब्राह्मण समाज के एक प्रमुख हस्ताक्षर थे और राजस्थान सरकार में मंत्री भी रहे। उनका निधन अक्टूबर 2024 में हुआ था।
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