केंद्रीय मंत्री भागीरथ ने 99 लाख की सब्सिडी वापस की, विवाद के बाद लौटाई राशि

The Sootr | Jun 27, 2026, 13:06 IST
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केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने 99 लाख की सब्सिडी वापस की, विवाद के बाद लौटाई राशि
केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने 99 लाख की सब्सिडी वापस की, विवाद के बाद लौटाई राशि

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने खीरे के फार्म के लिए प्राप्त 99 लाख रुपए की सब्सिडी वापस कर दी है। यह जानकारी केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में दी।

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने अपने ही मंत्रालय की एक योजना के तहत अपने खीरे के फार्म के लिए प्राप्त 99 लाख रुपए की सब्सिडी वापस कर दी है। केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में यह जानकारी दी।

यह घटनाक्रम ठीक एक महीने बाद सामने आया है। द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच रिपोर्ट में खुलासा किया गया था कि भागीरथ चौधरी ने अपने ही मंत्रालय के अधीन संचालित एक बागवानी (हॉर्टिकल्चर) योजना के तहत 99 लाख रुपए की सब्सिडी प्राप्त की थी।

तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी के सवाल के लिखित जवाब मांगा था। जिसमें कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने कहा कि भागीरथ चौधरी ने सूचित किया है कि उन्होंने योजना के तहत संबंधित बैंक को सब्सिडी की राशि वापस कर दी है। संबंधित बैंक को निर्देश दिया गया है कि वह सब्सिडी की राशि राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड को लौटा दे।

मंत्री के खेत में चार बड़े पॉलीहाउस

केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ का पीह गांव में विशाल फार्म हाउस है। इसके चारोंं तरफ पत्थर की दीवारें और कंटीले तार हैं। इसमें बाग-बगीचे, तालाब और चार बड़े पॉलीहाउस हैं।

यहां एक साइनबोर्ड पर साफ-साफ लिखा है, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार से सहायता प्राप्त। इसी फार्महाउस को बागवानी के लिए लागत की 50 फीसदी सब्सिडी 99 लाख रुपए मिली। यह राशि आधुनिक खेती के लिए राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) देता है।

इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल में पता चला था कि उन्हें करीब तीन महीने पहले यह सब्सिडी मिली थी। उन पर हितों के टकराव (Conflict of Interest) को लेकर सवाल उठने लगे थे।


केंद्रीय मंत्री को अपने मंत्रालय से 99 लाख सब्सिडी
केंद्रीय मंत्री को अपने मंत्रालय से 99 लाख सब्सिडी

क्या है योजना?

बागवानी को बढ़ावा देने 2014-15 में मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) योजना शुरू की गई थी। इसका संचालन राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) करता है। यह सीधे केंद्रीय कृषि मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करता है।

​इस योजना में बागवानी प्रोजेक्ट लागत की अधिकतम 50 प्रतिशत या एक करोड़ रुपए तक की सब्सिडी दी जाती है। यह सब्सिडी शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर की हाईटेक खेती के लिए मिलती है। योजना में गुलाब, एंथुरियम व ऑर्किड जैसी आठ किस्मों के फूल भी शामिल हैं।


मंत्रीजी का प्रोजेक्ट

केंद्रीय राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने 16,592 वर्ग मीटर में खीरे की खेती की थी। इसे सब्सिडी के लिए 2025 में स्वीकृत 467 प्रोजेक्ट्स में शामिल किया गया था।

कॉन्फ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट की बात करें तो राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स के पदेन अध्यक्ष खुद केंद्रीय कृषि मंत्री होते हैं। कृषि राज्य मंत्री इसके पदेन उपाध्यक्ष होते हैं।

हालांकि कागजों पर इस योजना में प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने में राज्य मंत्री की कोई सीधी भूमिका नहीं होती। अंतिम मंजूरी एक प्रोजेक्ट अप्रूवल कमेटी देती है। इसमें बोर्ड के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष शामिल नहीं होते।

फंड ट्रांसफर और प्रोजेक्ट का ब्योरा

सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि 11 मार्च, 2026 को मंत्रीजी के प्रोजेक्ट को एनएचबी से अंतिम मंजूरी मिली थी। ठीक 19 दिन बाद यानी 30 मार्च को 99.03 लाख रुपए की कैपिटल इन्वेस्टमेंट सब्सिडी उनके किशनगढ़ स्थित एचडीएफसी बैंक लोन खाते में जमा कर दी गई थी।
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साइट पर लगे साइनबोर्ड के अनुसार पूरे प्रोजेक्ट की कुल लागत 1.99 करोड़ रुपए थी। इस पर एचडीएफसी बैंक से 1.49 करोड़ रुपए का लोन लिया गया थी। इसमें मंत्री का खर्चा 49.8 लाख रुपए आया थी। मंत्रालय से 99. 03 लाख रुपए मंजूर हुए थे।

पहले भी मंत्रीजी कर चुके थे आवेदन

अजमेर से भाजपा सांसद भागीरथ चौधरी के पास पीह गांव में खसरा नंबर 315 के तहत 9.7 हेक्टेयर कृषि भूमि है।

मंत्री की ओर से पीएमओ को 31 मार्च, 2025 को दिए गए संपत्ति विवरण में इस जमीन की कीमत 5.85 लाख रुपए आंकी गई, लेकिन उसमें इस भारी-भरकम एनएचबी प्रोजेक्ट का कोई जिक्र नहीं था।

​यह पहली बार नहीं था, जब मंत्री ने इस सब्सिडी के लिए आवेदन किया था। रिकॉर्ड बताते हैं कि उन्होंने सितंबर 2018 में भी आवेदन किया था। तब हार्ड कॉपी मिलने में देरी के कारण इसे खारिज कर दिया गया था।

उसी वर्ष उनके बेटे सुभाष चौधरी ने भी इसी गांव में मिश्रित सब्जी और खीरे के प्रोजेक्ट के लिए आवेदन किया था। प्रोजेक्ट में इस्तेमाल किए गए एक स्ट्रक्चर के नियमों के तहत अपात्र होने के कारण उनका आवेदन भी खारिज कर दिया गया था।

मंत्री भागीरथ ने दी थी सफाई

पहले केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने इस मामले में सफाई दी थी। उनका कहना था कि वह एक किसान हैं। पूरे नियमों का पालन करके सब्सिडी योजना का लाभ लिया है।

उन्होंने कहा था कि पुष्कर के पास उनका निजी फार्म है। इस फार्म पर कमर्शियल हॉर्टिकल्चर को बढ़ावा देने के लिए बैंक से 2 करोड़ रुपए का लोन लिया है। 16,592 वर्ग मीटर क्षेत्र में नई तकनीक से खेती का काम शुरू किया है।

मंत्री के अनुसार बारिश के पानी को सहेजने के लिए 2 करोड़ लीटर की क्षमता वाले चार फार्म पूल भी बनाए हैं। कुछ भी छिपाकर नहीं किया है, बल्कि अपने फार्म पर पूरी जानकारी वाला बोर्ड भी लगाया है, जिससे दूसरे किसान भी उन्नत और आधुनिक खेती करने के लिए प्रेरित हो सकें।

कैसे पास होती है सब्सिडी?

उत्पादन और कटाई के बाद प्रबंधन के माध्यम से वाणिज्यिक बागवानी का विकास योजना दरअसल राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) के तहत एक उप-योजना है।

इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर बागवानी फसलों की व्यावसायिक खेती (मुनाफे के लिए) को बढ़ावा देना है। इसके तहत तीन तरह की सब्जियां शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर आती हैं। फूलों की आठ किस्मों में एंथुरियम, ऑर्किड, गुलाब, लिलियम, गुलदाउदी, कार्नेशन, जिप्सोफिला और जरबेरा शामिल हैं।

प्रोजेक्ट की लागत का 50 प्रतिशत तक ​सब्सिडी दी जाती है। इसकी अधिकतम सीमा प्रति परिवार 1 करोड़ रुपए तय की गई है।
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इस योजना में किसान, स्वयं सहायता समूह (SHG), उत्पादक संघ, ट्रस्ट, सहकारी समितियां, कंपनियां, किसान उत्पादक संगठन (FPO), सहकारी विपणन संघ और कृषि उपज विपणन समितियां (APMC) लाभान्वित हो सकते हैं।

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