गफरुदीन ने तीन साल की उम्र में बजाना शुरू किया था भपंग, भगवान शिव के डमरू से बना है वाद्ययंत्र

राजस्थान में इस बार भपंग वादक गफरुद्दीन को भी पद्मश्री के लिए चुना है। उन्होंने देश-विदेश में इस अनोखे वाद्ययंत्र को ख्याति दिलाई है। अलवर के भपंग वादक गफरुदीन मेवाती ने अपने हुनर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भपंग वादन को ख्याति दिलाई है।

author-image
Purshottam Kumar Joshi
New Update
Ghafaruddin Mewati Jogi

Photograph: (the sootr)

Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

News In Short

  • अलवर के भपंग वादक गफरुद्दीन को पद्मश्री सम्मान की घोषणा
  • गफरुद्दीन ने देश-विदेश में भपंग वादन को दिलाई ख्याति
  • भपंग विशेष तरह का वाद्य यंत्र, भगवान शिव के डमरू से किया तैयार
  • गफरुद्दीन अब तक 60 से अधिक देशों में दे चुके हैं प्रस्तुति
  • पद्मश्री सम्मान की घोषणा के बाद गफरुद्दीन के घर पर लोगों का हुजूम 

News In Detail

अलवर। राजस्थान से पद्मश्री अवार्ड के लिए राजस्थान से जिन तीन हस्तियों को चुना गया है, उनमें अलवर के भपंग वादक गफरुदीन मेवाती ने अपने हुनर से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भपंग वादन को ख्याति दिलाई है। वे अब तक 60 से ज्यादा देशों में भपंग वादन की प्रस्तुति दे चुके हैं। गफरुदीन ने अपने पिता स्वर्गीय बुध सिंह जोगी के साथ 3 साल की उम्र में भपंग बजाना शुरू किया था। उनके बेटे शाहरुख खान मेवाती भी भपंग बजाते हैं।

शिव के डमरू से बना भपंग

भपंग विशेष तरह का वाद्य यंत्र है। मेवात में खासकर मिरासी समुदाय में इसे कुछ लोग पीढ़ी दर पीढ़ी बजा रहे हैं। यह वाद्य यंत्र भगवान शिव के डमरू से तैयार किया गया है। गफरुदीन के परिवार में आठवीं पीढ़ी इस हुनर का प्रदर्शन कर रही हैं। 

दिनभर बधाई देने वालों की भीड़

राजस्थान में अलवर के मुंगस्का की टाइगर कॉलोनी में रह रहे 68 साल के गफरुदीन को सुबह फोन पर पद्मश्री अवार्ड मिलने की जानकारी मिली। उनके यहां बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। गफरुदीन ने भपंग बजा कर सभी लोगों का स्वागत किया। रिश्तेदारों ने उन्हें कुछ गिफ्ट दी।

 पांडव कड़े का भी करते हैं गायन

मेवात में महाभारत को पांडव कड़े के रूप में गाया व बजाया जाता है। अज्ञातवास के दौरान पांडव जब विराटनगर क्षेत्र पहुंचे थे, तो उस पूरे प्रसंग को महाभारत में शामिल किया गया है। गफरुद्दीन के परिवार ने भ्पंगवादन के जरिए बृज व मेवाती शैली के लोक दोहे व लोक गीत देश विदेश के मंच पर प्रस्तुत किए हैं। इनके गायन को बॉलीवुड में भी कॉपी किया गया है। 

60 से अधिक देशों में प्रस्तुति

गफरुदीन को राजस्थान सरकार और संगीत नाटक अकादमी नई दिल्ली से भी कई अवार्ड मिल चुके हैं। अगर विदेश की बात करें तो गफरुद्दीन इंग्लैंड ऑस्ट्रेलिया कनाडा पेरिस दुबई सहित 60 से ज्यादा देशों में भपंग वादन की प्रस्तुति पेश कर चुके हैं। साथ ही इंग्लैंड में एलिजाबेथ सहित कई अंतरराष्ट्रीय बड़े कार्यक्रमों में अपनी प्रस्तुति दी जा चुकी है। कोरोना हो या स्वच्छता, सभी पर इन्होंने अपने भपंग के माध्यम से लोगों को लोकगीत गाकर संदेश दिया। 

मेवात को दिया श्रेय

गफरुद्दीन मेवाती जोगी ने सम्मान की घोषणा के बाद इसका श्रेय मेवात को दिया। उन्होंने कहा, मुझे गर्व है कि मैं भपंग बजाता हूं। यह हमारा पीढ़ी दर पीढ़ी मिला हुनर है। गफरुद्दीन ने बताया कि वह इस सम्मान के लिए राज्य और केंद्र सरकार के आभारी हैं, जिन्होंने पद्मश्री के लिए मुझे चुना।

केंद्र सरकार ने की यह घोषणा

आपकों बता दे कि केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर पद्म पुरस्कारों की घोषणा की है। इनमें राजस्थान की तीन हस्तियों प्रसिद्ध भपंग वादक गफरुद्दीन मेवाती जोगी, अलगोजा वादक तगा राम भील और स्वामी ब्रह्मदेव महाराज को पद्मश्री से सम्मानित करने की घोषणा की है।

खबरें यह भी पढ़िए...

राजस्थान की इन तीन हस्तियों को मिलेगा पद्मश्री सम्मान, जानिए कौन हैं यह

केंद्र के प्रगति मॉडल पर शुरू हुआ परफॉर्मेंस रिव्यू पोर्टल, ऐसा करने वाला राजस्थान देश का पहला राज्य

मध्यप्रदेश और राजस्थान में बर्फीली ठंड के साथ छाया घना कोहरा, छत्तीसगढ़ को मिलेगी राहत

ट्रक ने इनोवा को मारी टक्कर, राजस्थान के 7 लोगों की दर्दनाक मौत

राजस्थान अलवर स्वामी ब्रह्मदेव महाराज तगा राम भील गफरुद्दीन मेवाती जोगी
Advertisment