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Photograph: (The Sootr)
Jaipir: राजस्थान में कॉलेज छात्राओं को स्कूटी नहीं मिल पा रही है। छात्राओं को पिछले सत्र की भी स्कूटी वितरण का कार्य अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। अब साल 2024-25 और वर्ष 2025-26 के लिए जारी किया गया नया टेंडर भी निरस्त हो गया है। लेकिन बड़ी बात ये है कि छात्राओं से ऑनलाइन पोर्टल के जरिए आवेदन अब भी मांगे जा रहे हैं। हजारों छात्राओं को स्कूटी की आवश्यकता है, लेकिन विभाग की लापरवाही के कारण उन्हें लगातार कॉलेजों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।
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तीन साल से पेंडिंग हजारों स्कूटी
पिछले तीन वर्षों के आंकड़ों पर नजर डाले तो करीब 30,000 से ज्यादा स्कूटियों का वितरण अब तक नहीं हो पाया है। इन स्कूटियों को पाने के लिए छात्राएं लगातार कॉलेज और अधिकारियों के चक्कर लगा रही है। यह हालात तब है जब प्रदेश सरकार बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने का दाम भरती है।
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उप मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया
उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि देवनारायण योजना और कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना के तहत शैक्षणिक सत्र 2021 से 2024 तक योग्य छात्राओं को स्कूटी दी गई है। उन्होंने निर्देश दिया है कि छात्राओं की शिक्षा में निरंतरता बनाए रखने के लिए और उनके सुरक्षित आवागमन को सशक्त बनाने के लिए शीघ्र कार्रवाई की जाए।
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देवनारायण योजना में ऐसे मिलता है लाभ
देवनारायण योजना राजस्थान सरकार की एक प्रमुख योजना है। इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की छात्र-छात्राओं को शिक्षा के क्षेत्र में प्रोत्साहन देना है। इस योजना के तहत 12 वीं कक्षा मे 50% अधिक अंकों से उत्तीर्ण करने वाली छात्राओं को सरकार के उच्च शिक्षा विभाग की ओर से प्रोत्साहित कर स्कूटी वितरण की जाती है।
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क्या है कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना
कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना राजस्थान राज्य सरकार की एक पहल है, जो विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति की मेधावी छात्राओं के लिए है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पढ़ाई में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं को सुविधा प्रदान करना है, ताकि वे अपनी शिक्षा में और अधिक सफलता प्राप्त कर सकें।
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कब शुरू की गई ये योजनाएं
देवनारायण योजना की शुरुआत राजस्थान सरकार ने 2017 में की थी। वही कालीबाई भील मेधावी छात्रा स्कूटी योजना की शुरुआत 2019 में राजस्थान सरकार ने की थी। इसका दोनों ही योजनाओं का उद्देश्य विशेष रूप से अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग की मेधावी छात्राओं को उच्च शिक्षा में प्रोत्साहन देने के लिए स्कूटी प्रदान करना था, ताकि वे अपने स्कूल और कॉलेजों तक आसानी से पहुँच सकें।
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अब तक कितनी छात्रों को मिला है लाभ
सरकारी आकड़ो के अनुसार अब तक इस योजना के तहत लगभग 50,000 से अधिक मेधावी छात्राओं को स्कूटी दी गई हैं। और यह आकड़ा लगातार बढ़ रहा है जैसे-जैसे ये योजना आगे बढ़ रही है। वैसे-वैसे इन आकड़ो में बदलाव आ रहा है।
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आवश्यक सुधार की दिशा में कदम
स्कूटी वितरण में हो रही देरी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण छात्रों के मन में असंतोष बढ़ रहा है। विभाग को इस समस्या का समाधान निकालने के लिए सख्त कदम उठाने की आवश्यकता है। इसके लिए न केवल प्रक्रिया को तेज करना होगा, बल्कि छात्राओं को समय पर लाभ पहुंचाने के लिए प्रभावी योजना बनाई जानी चाहिए।
मुख्य बिंदु
- स्कूटी वितरण में देरी प्रशासनिक विफलता, टेंडर निरस्त होने और व्यवस्थित प्रक्रिया की कमी के कारण हो रही है। पिछले तीन सालों से कई स्कूटी वितरण के लिए पेंडिंग हैं।
- स्कूटी वितरण से छात्राओं को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन मिल सकता है, जिससे उनकी शिक्षा में निरंतरता बनी रहती है और उन्हें अपनी पढ़ाई में कोई रुकावट नहीं आती।
- उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने निर्देश दिए हैं कि छात्राओं को समय पर स्कूटी वितरित की जाए, ताकि उनकी शिक्षा में निरंतरता बनी रहे और उनका सुरक्षित आवागमन सुनिश्चित हो।
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