दो दोस्तों की मौत के 14 महीने बाद दोनों घरों में लौटी खुशी, 12 घंटे के अंतर से जन्मे बेटे
Jyoti Mahender Bhardwaj | Oct 07, 2026, 15:36 IST
मेड़ता में दो दोस्तों की मौत, अब दोनों घरों में जन्मे बेटे
मेड़ता इलाके के दो परिवारों के लिए करीब 14 महीने पहले का एक हादसा कभी न भूलने वाला दर्द लेकर आया था। बचपन से साथ रहे दो दोस्तों की एक ही हादसे में मौत हो गई थी। अब दोनों परिवारों में फिर बच्चों की किलकारी गूंजी है। खास बात यह है कि दोनों घरों में बेटों का जन्म सिर्फ 12 घंटे के अंतर से हुआ।
मोकलपुर के रहने वाले नरेंद्र बेड़ा और सातलावास के नरेंद्र मुंवाल बचपन के दोस्त थे। दोनों की दोस्ती कक्षा 6 से शुरू हुई थी। स्कूल में साथ पढ़े। 12वीं तक दोनों का साथ बना रहा। इसके बाद दोनों ने नर्सिंग की पढ़ाई चुनी। यहां भी संयोग से दोनों को एक ही कॉलेज मिल गया। दोनों चित्तौड़गढ़ के बस्सी में नर्सिंग सेकंड ईयर में पढ़ रहे थे।
14 जुलाई 2025 को नरेंद्र बेड़ा और नरेंद्र मुंवाल अपने दोस्त प्रदीप विश्नोई के साथ घूमने निकले थे। प्रदीप जोधपुर का रहने वाला था। तीनों निलिया महादेव झरने पर पिकनिक मनाने पहुंचे थे।
इसी दौरान पानी का बहाव तेज हो गया। तीनों युवक इसकी चपेट में आ गए और डूब गए। हादसे में तीनों की मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही परिवारों में कोहराम मच गया। तलाश शुरू की गई। नरेंद्र बेड़ा का शव उसी दिन मिल गया था। परिवार ने उसी दिन उनका अंतिम संस्कार कर दिया। नरेंद्र बेड़ा अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। बेटे की अचानक मौत से माता-पिता पूरी तरह टूट गए थे।
सातलावास के नरेंद्र मुंवाल का शव तुरंत नहीं मिल पाया था। हादसे के बाद उनकी तलाश चलती रही। करीब 12 घंटे बाद उनका शव मिला। इसके बाद अगले दिन परिवार ने अंतिम संस्कार किया।
दोनों दोस्तों की मौत ने दो परिवारों को एक जैसा दर्द दिया। जिन लड़कों ने स्कूल से लेकर कॉलेज तक का सफर साथ तय किया था, उनकी जिंदगी भी एक ही हादसे में खत्म हो गई। हादसे के बाद दोनों परिवार लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहे। अब करीब 14 महीने बाद दोनों घरों में एक ऐसा संयोग हुआ है, जिसकी पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।
मोकलपुर निवासी सुरेंद्र लटियाल के मुताबिक, नरेंद्र बेड़ा के पिता बाबूलाल बेड़ा के घर 4 अक्टूबर को बेटे का जन्म हुआ। बच्चे का जन्म शाम करीब 7 बजे हुआ। परिवार के लिए यह पल खुशी के साथ बेहद भावुक करने वाला भी था। करीब 14 महीने पहले इसी घर ने अपना इकलौता बेटा खोया था। अब लंबे समय बाद घर में फिर छोटे बच्चे की आवाज सुनाई दी। परिवार के लोग बच्चे के जन्म को अपने जीवन में लौटी खुशी के रूप में देख रहे हैं। लेकिन इसके कुछ घंटे बाद ही सातलावास से भी ऐसी ही खबर आई।
नरेंद्र मुंवाल के पिता सीताराम के घर 5 अक्टूबर की सुबह करीब 9 बजे बेटे का जन्म हुआ। यानी दोनों बच्चों के जन्म के बीच करीब 14 घंटे का अंतर रहा। दोनों परिवारों में बेटों के जन्म की खबर के बाद खुशी का माहौल है। रिश्तेदार और आसपास के लोग भी परिवारों को बधाई देने पहुंच रहे हैं। दोनों दोस्तों की कहानी जानने वाले लोगों के लिए यह खबर काफी भावुक करने वाली है। करीब 14 महीने पहले दोनों घरों ने अपने बेटों को खोया था। अब लगभग एक साथ दोनों घरों में फिर बेटे आए हैं।
इस कहानी का एक और पहलू है। नरेंद्र बेड़ा और नरेंद्र मुंवाल की माताओं ने पहले नसबंदी करवा रखी थी। बेटों की मौत के बाद दोनों परिवारों ने दोबारा संतान के बारे में सोचा। इसके बाद दोनों महिलाओं ने जयपुर जाकर नसबंदी खुलवाई। बाद में दोनों गर्भवती हुईं और अब दोनों ने बेटों को जन्म दिया है।
परिवारों के लिए यह बात इसलिए भी खास है क्योंकि दोनों के जीवन में कई घटनाएं लगभग साथ-साथ हुईं। दोनों नरेंद्र बचपन से दोस्त थे। साथ पढ़े। एक ही कॉलेज में पहुंचे। एक ही दिन हुए हादसे में दोनों की जान गई। अब उनके परिवारों में भी लगभग एक ही समय पर बेटे जन्मे हैं।
दोनों बच्चों के जन्म के बाद परिवारों में खुशी है। साथ ही पुराने दिनों की यादें भी ताजा हो गई हैं। परिवार के लोग इस पूरे घटनाक्रम को अपने दिवंगत बेटों से जोड़कर देख रहे हैं।
कुछ लोग बच्चों के जन्म को पुनर्जन्म से भी जोड़ रहे हैं। हालांकि, यह परिवार और आसपास के लोगों की अपनी मान्यता है। इस बात की पुष्टि करने वाला कोई वैज्ञानिक आधार सामने नहीं आया है।
दोनों परिवारों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी बात यह है कि लंबे समय बाद उनके घरों में फिर खुशी लौटी है। करीब 14 महीने पहले एक हादसे ने दोनों परिवारों से उनके बेटे छीन लिए थे। अब लगभग एक साथ दो बच्चों के आने से दोनों घरों में फिर रौनक है।
बचपन से साथ रहे नरेंद्र बेड़ा और नरेंद्र मुंवाल की दोस्ती की चर्चा पहले भी होती थी। अब दोनों परिवारों में लगभग एक साथ बेटों के जन्म ने उनकी कहानी को एक नया मोड़ दे दिया है।
समरी- मेड़ता इलाके के दो दोस्तों की एक हादसे में मौत के करीब 14 महीने बाद दोनों परिवारों में फिर खुशियां लौटी हैं। दोनों घरों में बेटों का जन्म हुआ है। खास बात यह है कि दोनों दोस्त बचपन से साथ थे और उनकी जिंदगी के कई पड़ाव भी एक जैसे रहे। अब दोनों परिवारों में लगभग एक साथ बेटों के जन्म की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।
पिकनिक मनाने गए थे, तीन दोस्तों की हुई थी मौत
इसी दौरान पानी का बहाव तेज हो गया। तीनों युवक इसकी चपेट में आ गए और डूब गए। हादसे में तीनों की मौत हो गई। हादसे की खबर मिलते ही परिवारों में कोहराम मच गया। तलाश शुरू की गई। नरेंद्र बेड़ा का शव उसी दिन मिल गया था। परिवार ने उसी दिन उनका अंतिम संस्कार कर दिया। नरेंद्र बेड़ा अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे। बेटे की अचानक मौत से माता-पिता पूरी तरह टूट गए थे।
दूसरे नरेंद्र का शव 12 घंटे बाद मिला
दोनों दोस्तों की मौत ने दो परिवारों को एक जैसा दर्द दिया। जिन लड़कों ने स्कूल से लेकर कॉलेज तक का सफर साथ तय किया था, उनकी जिंदगी भी एक ही हादसे में खत्म हो गई। हादसे के बाद दोनों परिवार लगातार एक-दूसरे के संपर्क में रहे। अब करीब 14 महीने बाद दोनों घरों में एक ऐसा संयोग हुआ है, जिसकी पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।
4 अक्टूबर की शाम मोकलपुर में जन्मा बेटा
अगले दिन सुबह दूसरे परिवार में भी आया बेटा
दोनों माताओं ने खुलवाई थी नसबंदी
परिवारों के लिए यह बात इसलिए भी खास है क्योंकि दोनों के जीवन में कई घटनाएं लगभग साथ-साथ हुईं। दोनों नरेंद्र बचपन से दोस्त थे। साथ पढ़े। एक ही कॉलेज में पहुंचे। एक ही दिन हुए हादसे में दोनों की जान गई। अब उनके परिवारों में भी लगभग एक ही समय पर बेटे जन्मे हैं।
परिवार इसे बेटों से जोड़कर देख रहे
कुछ लोग बच्चों के जन्म को पुनर्जन्म से भी जोड़ रहे हैं। हालांकि, यह परिवार और आसपास के लोगों की अपनी मान्यता है। इस बात की पुष्टि करने वाला कोई वैज्ञानिक आधार सामने नहीं आया है।
दोनों परिवारों के लिए फिलहाल सबसे बड़ी बात यह है कि लंबे समय बाद उनके घरों में फिर खुशी लौटी है। करीब 14 महीने पहले एक हादसे ने दोनों परिवारों से उनके बेटे छीन लिए थे। अब लगभग एक साथ दो बच्चों के आने से दोनों घरों में फिर रौनक है।
बचपन से साथ रहे नरेंद्र बेड़ा और नरेंद्र मुंवाल की दोस्ती की चर्चा पहले भी होती थी। अब दोनों परिवारों में लगभग एक साथ बेटों के जन्म ने उनकी कहानी को एक नया मोड़ दे दिया है।
समरी- मेड़ता इलाके के दो दोस्तों की एक हादसे में मौत के करीब 14 महीने बाद दोनों परिवारों में फिर खुशियां लौटी हैं। दोनों घरों में बेटों का जन्म हुआ है। खास बात यह है कि दोनों दोस्त बचपन से साथ थे और उनकी जिंदगी के कई पड़ाव भी एक जैसे रहे। अब दोनों परिवारों में लगभग एक साथ बेटों के जन्म की पूरे इलाके में चर्चा हो रही है।
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