पैसे लेकर 15 बेरोजगारों को दे दी सरकारी नौकरी, ज्वॉइनिंग करने गए तो पता चला कि नियुक्ति पत्र फर्जी

Purshottam Kumar Joshi | Feb 02, 2026, 21:17 IST
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alwar
Photograph: (the sootr)

राजस्थान में फर्जी नौकरी के आदेशों का मामला सामने आया, जिसमें बेरोजगारों से लाखों रुपये वसूले गए। आरोपी सरकारी कर्मचारी सोनू मीणा पर आरोप लगाए गए हैं।

News in Short

  • राजस्थान के भरतपुर में एक सरकारी कर्मचारी ने फर्जी नियुक्ति आदेश जारी कर 15 बेरोजगार युवकों से 20 लाख रुपए हड़प लिए।
  • आरोप है कि बेरोजगार युवकों से पैसे लेकर उन्हें फर्जी नियुक्ति पत्र दिए गए थे।
  • आरोपित सोनू कुमार मीणा ने एक चेक दिया, जो बाउंस हो गया, और उसने पैसे लौटाने से इनकार कर दिया।
  • भरतपुर कलेक्टर और चिकित्सा विभाग के नाम से फर्जी आदेश जारी किए गए थे।
  • पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

सुनील जैन @ अलवर

News in Detail

राजस्थान में फर्जी आदेश से सरकारी नौकरी देने का बड़ा मामला सामने आया है। एक सरकारी कर्मचारी ने भरतपुर कलेक्टर के नाम से नौकरी लगाने के फर्जी नियुक्ति आदेश जारी कर करीब 15 बेरोजगार युवकों से 20 लाख रुपए से ज्यादा रकम हड़प ली। ये फर्जी आदेश भरतपुर कलेक्टर कमर उल जमान चौधरी और चिकित्सा विभाग के डायरेक्टर राकेश कुमार शर्मा के नाम से जारी किए गए। इसका खुलासा तब हुआ, जब पीड़ित बेरोजगार युवक चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पहुंचे।


आरोपी कर्मचारी करता है झुंझुंनूं में

बताया जाता है कि बेरोजगार युवकों ने इन आदेशों की एवज में ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर रकम भेजने का दावा किया है। उन्होंने मामले की शिकायत भरतपुर कोतवाली थाने में दी है। युवकों ने ये आरोप झुंझुनूं जिला अस्पताल में कार्यरत सहायक रेडियोग्राफर सोनू कुमार मीणा पर लगाए हैं। आरोपी सोनू कुमार मीणा अभी प्रोबेशन पीरियड पर है। उधर, भरतपुर कलेक्टर ने कहा है कि उन्हें इस मामले में अभी कोई शिकायत नहीं मिली है।

विभाग ने बताए, ये फर्जी आदेश

भरतपुर के पीड़ित बेरोजगार लोकेंद्र मीणा ने बताया कि पहले सोनू ने कहा कि 5 से 10 दिन में ज्वॉइनिंग लेटर मिल जाएगा। 10 दिन बाद पीएमओ, अलवर कलेक्टर व डायरेक्टर के फर्जी आदेश के लैटर बनवाकर भिजवा दिए। इसके बाद भी हमें ज्वॉइनिंग नहीं मिली। तब हम ये आदेश लेकर विभाग में गए, तब पता चला कि ये लेटर सब फर्जी दिए गए।

सोनू का पैसे देने से इनकार

पीड़ित लोकेंद्र के अनुसार फर्जी आदेश की जानकारी होने पर जब हमने आरोपी सोनू मीणा से पैसे मांगे तो उसने एक रुपया भी नहीं लौटाया। एक चेक दिया, वो बाउंस हो गया। बाद में आरोपी सोनू कुमार बोला कि उसने किसी से रुपए नहीं लिए। केवल महेंद्र से रुपए लिए थे, उसे लौटा रहा हूं। मैंने किसी को नौकरी लगाने के नाम पर रकम नहीं ली है। जांच में सामने आ जाएगा।

आरोपी की सफाई, मैंने कोई नौकरी नहीं दी

आरोपी सोनू मीणा का दावा किया कि मैं खुद प्रोबेशन पीरियड पर हूं, ऐसे में किसे नौकरी लगा सकता हूं। कलेक्टर के नाम से युवकों को मिले नियुक्ति आदेश में सीएमएचओ भरतपुर को पत्र लिखा गया है। इसमें कहा है कि आपके यहां अस्पतालों में रिक्त पदों पर हेमंत मीणा व हरिओम को संविदा पर नियुक्ति दी जाए। वहीं चिकित्सा विभाग के डायरेक्टर के नाम से आदेश जारी कर दिया कि उक्त कार्मिकों का वेतन दिया जाए। इन युवकों के लिए निःशुल्क दवा योजना के तहत संविदा पर नौकरी कर चिकित्सा व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम करने का आदेश दिया गया।

कलेक्टर बोले, नहीं आई शिकायत

बाद में आरोपी सोनू मीणा ने भरतपुर के एसजेपी मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल के नाम से लोकेंद्र सहित कई युवाओं को सहायक रेडियोग्राफर पद के नियुक्त पत्र जारी कर दिए। रेडियोग्राफर सोनू मीणा के पिता ओमप्रकाश मीणा अलवर जिला अस्पताल में टीए के रूप में कार्यरत हैं। वे मूल रूप से सलीमपुर खुर्द भुसावर के रहने वाले हैं। भरतपुर कलक्टर कुमर उल जमान चौधरी ने कहा है कि अभी किसी अभ्यर्थी से इस तरह की कोई शिकायत नहीं मिली है। ऐसा है तो आरोपी के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

आरोपी को दिए डेढ़ लाख

एक अन्य पीड़ित सुनील कुमार के अनुसार, एक दोस्त ने उससे कहा कि भरतपुर में एक संविदा पर भर्ती है। उसमें नौकरी लग सकती है, लेकिन उसमें एक से डेढ़ लाख रुपए लगेंगे। झुंझुनूं के अस्पताल में काम कर रहा सहायक रेडियोग्राफर सोनू मीणा लगवाएगा। इसके बाद सुनील कुमार ने सोनू मीणा को डेढ़ लाख रुपए दिए। एक पखवाड़े के बाद उसने मेडिकल विभाग में संपर्क किया तो जानकारी मिली कि कोई संविदा पर नौकरी नहीं निकाली। इसके बाद फर्जी आदेश का खुलासा हुआ।

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