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Photograph: (the sootr)
News In Short
- एसबीआई की आदर्श नगर शाखा से फेक डॉक्यूमेंट के आधार पर करोड़ों रुपए का लोन उठाने का मामला सामने आया है।
- दर्जनभर सरकारी कर्मचारियों ने फर्जी नामों और दस्तावेजों के आधार पर लोन पास कराया और समय पर किस्तें जमा नहीं कीं।
- आरोपियों ने पैन कार्ड, सैलरी स्लिप और बैंक स्टेटमेंट्स में हेराफेरी की थी, जिससे उनका सिविल स्कोर बढ़ा।
- मोतीडूंगरी थाने में बैंक प्रबंधक द्वारा आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
- कुछ आरोपियों ने बैंक अधिकारियों से अभद्र व्यवहार किया और लोन की किस्तें जमा करने से मना कर दिया।
News In Short
राजस्थान के आदर्श नगर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की शाखा से फेक डॉक्यूमेंट के आधार पर करोड़ों रुपए का लोन उठाने का बड़ा मामला सामने आया है। इस धोखाधड़ी में दर्जनभर से अधिक सरकारी कर्मचारी शामिल हैं। फर्जी नामों और कागजात के आधार पर लोन पास कराया। इस मामले में जयपुर के मोतीडूंगरी थाने में बैंक प्रबंधक की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई है।
फेक डॉक्यूमेंट्स पर लोन
पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार एसबीआई की आदर्श नगर शाखा से कई लोगों ने एक्सप्रेस क्रेडिट ऑन सैलरी अकाउंट प्लान के तहत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन प्राप्त किया। आरोपियों ने लोन लेने के बाद समय पर किस्तें जमा नहीं कीं। जांच में सामने आया कि इन आरोपी व्यक्तियों में अधिकतर सरकारी कर्मचारी शामिल हैं।
फेक दस्तावेज
बैंक स्तर पर की गई जांच में यह खुलासा हुआ कि 2023 से 2024 के बीच आरोपियों ने फेक पैन कार्ड, फेक बैंक स्टेटमेंट्स, और सैलरी स्लिप में हेराफेरी की। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सिविल रिपोर्ट में भी छेड़छाड़ की, ताकि उनका सिविल स्कोर बेहतर दिखाई दे। इन दस्तावेजों के आधार पर, आरोपियों ने बैंक से 8 लाख से 15 लाख रुपए तक का लोन पास करवा लिया।
जांच में खुलासा
जांच के दौरान यह सामने आया कि कई आरोपियों के पास एक से अधिक पैन कार्ड थे। जिनमें से कुछ पैन कार्ड फेक थे। इसके अलावा, कुछ आरोपियों ने अपनी सैलरी स्लिप और बैंक अकाउंट्स में भी हेराफेरी की थी। इस मामले में बैंक प्रबंधक गौरव द्विवेदी ने जनवरी 2026 में एफआईआर दर्ज कराई। इसमें एक दर्जन से अधिक आरोपियों के नाम हैं।
नहीं हुई लोन की वसूली
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मदन लाल, ज्ञानचंद, जगदेव सिंह, प्रेम देवी, अमर सिंह, चेतन दास, मनोज कुमार गुप्ता, अनिल, और धर्मचंद रैगर जैसे आरोपियों ने अलग-अलग समय में 8.30 लाख से 15 लाख रुपए तक का लोन लिया। हालांकि, अब तक इन लोन की रकम वापस नहीं की गई है। कुछ आरोपियों ने बैंक अधिकारियों से संपर्क करने पर अभद्र व्यवहार किया और पेमेंट करने से मना कर दिया।
बैंक की ओर से लिया गया कदम
बैंक ने इस मामले में गहन जांच की और आरोपियों के कागजात की जांच की। जांच में सामने आया कि आरोपियों ने जानबूझकर गलत जानकारी दी और बैंक की सिस्टम में गड़बड़ी की। अब पुलिस इस मामले में आगे की जांच कर रही है और आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
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