विदेश से MBBS डॉक्टरों का परमानेंट रजिस्ट्रेशन अधर में, RMC ने NMC से मांगी क्लैरिटी
Jageshwar prasad | Jun 06, 2026, 08:36 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के करीब एक हजार विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट (FMG) डॉक्टर परमानेंट रजिस्ट्रेशन न मिलने के कारण न तो नौकरी कर पा रहे हैं और न ही प्राइवेट प्रैक्टिस। RMC का कहना है कि कोविड काल में ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर NMC की गाइडलाइन में स्पष्टता नहीं है।
News In Short
- विदेश से MBBS कर लौटे एक हजार डॉक्टरों का परमानेंट रजिस्ट्रेशन RMC ने रोका।
- कोविड काल में हुई ऑनलाइन पढ़ाई के चलते NMC की गाइडलाइन में स्पष्टता न होना बड़ी बाधा।
- FMGE परीक्षा पास करने के बाद भी डॉक्टर न तो नौकरी कर पा रहे और न ही प्राइवेट प्रैक्टिस।
- RMC पर पक्षपात का आरोप- पहले समान परिस्थितियों वालों को रजिस्ट्रेशन मिल चुका है।
- छात्रों ने RMC मुख्यालय पर प्रदर्शन कर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की चेतावनी दी है।
News In Detail
RMC का कहना है कि नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की गाइडलाइन में स्पष्टता न होने के कारण ऐसा हो रहा है। ये डॉक्टर FMGE (विदेशी मेडिकल स्नातक परीक्षा) पास कर चुके हैं और कई ने इंटर्नशिप भी पूरी कर ली है, लेकिन उन्हें स्थायी पंजीकरण नहीं दिया जा रहा है।
क्या है पूरा विवाद?
इस नोटिफिकेशन के जरिए NMC ने 6 मार्च के नोटिफिकेशन को वापस लेते हुए नई गाइडलाइन जारी की, जिसका मुख्य उद्देश्य उन FMG छात्रों की समस्याओं को दूर करना था, जिन्होंने कोविड-19 या रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण अपनी पढ़ाई का कुछ हिस्सा ऑनलाइन माध्यम से पूरा किया था।
गाइडलाइन के प्रमुख बिंदु
इसके दो तरीके हैं, पहला, छात्र उसी विदेशी विश्वविद्यालय से अतिरिक्त कक्षाएं लेकर ऑनलाइन समय की फिजिकल उपस्थिति से भरपाई करें और दूसरा, यदि विदेशी कॉलेज में फिजिकल क्लास से भरपाई नहीं हो पाई तो छात्रों को भारत में 1 या 2 साल की क्लर्कशिप करनी होगी।
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डॉक्टरों की पीड़ा
उन्होंने कहा कि कोरोना काल के दौरान उन्होंने 6 महीने ऑनलाइन क्लास ली थी, लेकिन बाद में वापस जाकर उसकी भरपाई ऑफलाइन में कर ली थी। इसके बावजूद रजिस्ट्रेशन नहीं हो रहा।
इसी तरह जयपुर के डॉ. शुभम भारद्वाज ने बताया कि उन्होंने जॉर्जिया से MBBS करके FMGE क्लियर किया और सवाई माधोपुर मेडिकल कॉलेज से इंटर्नशिप भी पूरी कर ली, लेकिन परमानेंट रजिस्ट्रेशन नहीं मिल रहा।
प्रदर्शन और आरोप
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अप्रैल माह में ही 10 से अधिक ऐसे छात्रों का रजिस्ट्रेशन किया गया, जिन्होंने ऑनलाइन क्लास ली थी। छात्रों का सीधा आरोप है कि रसूखदारों और जान-पहचान वालों को पिछले दरवाजे से लाइसेंस बांटे जा रहे हैं, जबकि आम छात्रों को महीनों से चक्कर कटवाए जा रहे हैं ।
RMC का क्या कहना है?
आरएमसी का कहना है कि प्रदर्शन करने वाले कई छात्रों ने कोविड काल में छह महीने से लेकर दो वर्ष तक ऑनलाइन माध्यम से पढ़ाई की है। ऐसे में कितनी अवधि के ऑनलाइन कोर्स को छूट दी जा सकती है, इस संबंध में NMC से मार्गदर्शन मांगा गया है ।
फर्जी सर्टिफिकेट रैकेट भी सामने आया
अब क्या?
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