राजस्थान में कागजी जंगलों से 100 करोड़ का गबन; न गड्ढे खोदे, न पौधे लगे, बस बजट डकार गए
Jageshwar prasad | Apr 26, 2026, 13:59 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान वन विभाग में 100 करोड़ का पौधरोपण घोटाला सामने आया है। 246 साइट्स पर बिना गड्ढे खोदे और पौधे लगाए बजट डकार लिया गया। 48 डिवीजन में योजनाएं पूरी तरह फेल रहीं। निगरानी रिपोर्ट के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी कार्रवाई के बजाय फाइलें दबाकर बैठे हैं।
News In Short
- राजस्थान वन विभाग में हरियाली के नाम पर 100 करोड़ रुपए का हुआ गबन।
- 246 साइट्स पर बिना पौधरोपण किए ही कागजों में जंगल दिखाकर उठाया बजट।
- अजमेर की एक साइट में प्लांटेशन एरिया को छोटा पाया गया।
- भ्रष्टाचार की पुष्टि के बाद भी बड़े अधिकारियों ने फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी।
- गड्ढे खोदने से लेकर चौकीदारी तक, पांच चरणों में सरकारी धन लूटा गया।
News In Detail
246 साइट्स और करोड़ों का खेल
48 साइट्स पूरी तरह फेल: यहाँ पौधों के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति की गई।
गड्ढे ही नहीं खुदे: कई जगहों पर तो पौधरोपण की पहली प्रक्रिया (गड्ढे खोदना) भी पूरी नहीं हुई, फिर भी भुगतान उठा लिया गया।
एरिया चोरी: अजमेर जैसी जगहों पर तो स्वीकृत प्लांटेशन एरिया को ही फाइलों में छोटा कर दिया गया ताकि बचे हुए पैसों का गबन किया जा सके।
कैसे हुआ 100 करोड़ का खेल?
RFBP-2 योजना: इसमें 50 हेक्टेयर की एक साइट पर 10 हजार पौधे लगाने के लिए 5 साल में 42 लाख रुपए मिलते हैं।
RFBP-1 योजना: यहाँ 25 हजार पौधों के लिए 51 लाख रुपए का बजट आवंटित होता है।
यदि इन 246 विवादित साइट्स का औसत हिसाब लगाया जाए, तो यह गबन का आंकड़ा 102 करोड़ रुपए के पार पहुंच जाता है। यह पैसा जनता की जेब का था, जिसे हरियाली के नाम पर भ्रष्टाचार की दीमक चाट गई।
डिवीजन वार भ्रष्टाचार की लिस्ट
बीकानेर संभाग (67 साइट्स): श्रीगंगानगर, चूरू, चित्तौड़गढ़ और हनुमानगढ़ में सबसे ज्यादा गड़बड़ी पाई गई।
भरतपुर संभाग (46 साइट्स): धौलपुर, करौली और सवाई माधोपुर में भी भारी अनियमितताएं मिलीं।
जयपुर संभाग (45 साइट्स): राजधानी के नाक के नीचे अलवर, सीकर और झुंझुनूं में करोड़ों का बजट ठिकाने लगाया गया।
कोटा व अन्य: बारां, कोटा और झालावाड़ की 18 साइट्स पूरी तरह फेल पाई गईं, इसके अलावा अन्य भी हैं।
फाइलें दबाकर बैठे जिम्मेदार
भ्रष्टाचार की सीढ़ियां
दूसरे साल में नर्सरी से पौधों का उठाव दिखाकर परिवहन और मजदूरी के खर्च का गबन किया जाता है। तीसरे साल में भ्रष्टाचार का नया तरीका अपनाया जाता है, जिसमें पौधों के मरने का बहाना बनाकर उनके 'रिप्लेसमेंट' यानी दोबारा पौधे लगाने के नाम पर भारी वसूली की जाती है।
चौथे साल में उन पौधों की चौकीदारी के नाम पर बजट निकाला जाता है जो असल में कभी लगाए ही नहीं गए थे। अंत में, पांचवें साल में पौधों की देखरेख और संरक्षण के बहाने बचा-कुचा सरकारी फंड भी साफ कर दिया जाता है, जिससे पांच सालों में करोड़ों रुपए की राशि बिना किसी वास्तविक हरियाली के भ्रष्टाचारियों की जेबों में पहुँच जाती है।
ये भी पढ़ें:-
भीषण गर्मी के कारण स्कूलों के समय में किया बदला, 11.30 बजे हो जाएगी छुट्टी
कांच व्यापारी का दिनदहाड़े अपहरण, 10 घंटे तक बनाया बंधक, 14 लाख की फिरौती वसूल कर छोड़ा
जयपाल पूनिया मर्डर केस में पूर्व विधायक के भाई सहित 9 आरोपियों को उम्रकैद, 2 को मिला संदेह का लाभ
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
By Atul Dwivedi
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
By Ramanand Tiwari
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
By Jitendra Shrivastava
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
By Sanjay Dhiman
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
By Sanjay Gupta
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा
By Arun Tiwari