अनूपगढ़ में घग्घर नदी के टूटे बांध से फसलें जलमग्न, लोगों की पलायन करने की मजबूरी
Amit Baijnath Garg | Sept 14, 2025, 14:03 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के अनूपगढ़ में घग्घर नदी के बांध के टूटने से किसानों की फसलें जलमग्न हो गईं। बांध की कमजोरी और प्रशासन की अनदेखी से स्थिति और बिगड़ी। लोग पलायन करने पर मजबूर।
राजस्थान के अनूपगढ़ के गांव 35 एपीडी के पास घग्घर नदी के बांध में अचानक 50 फीट चौड़ा कटाव हो गया, जिसके बाद बांध से पानी फैल गया और इसके कारण भारी तबाही मची। नदी के बंधों के टूटने से 1200 बीघा जमीन में उगाई गई नरमा और धान की फसलें जलमग्न हो गईं।
पिछले 36 घंटों में रिसाव और बांध के टूटने से हजारों बीघा भूमि पर पानी भर चुका है। बांध के टूटे हिस्से में करीब 5 से 6 फीट तक पानी भर गया है, जिससे इलाके में स्थितियां और भी विकट हो गईं।
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किसानों की हालत और बढ़ता
किसान धनराज और गुलजार सिंह ने बताया कि बांध के टूटने से उनकी फसल बचाने की समस्या और भी गंभीर हो गई है। पानी का दबाव इतना अधिक है कि न तो ट्रैक्टर, ना ही अन्य कृषि उपकरण वहां तक पहुंच पा रहे हैं। किसान अपनी ओर से प्रयास कर रहे हैं, लेकिन बढ़ते पानी के बहाव ने हर घंटे उनका नुकसान बढ़ा दिया है। कई सौ बीघा खेत प्रतिदिन पानी में डूब रहे हैं, जिससे किसानों का जीवन संकट में है।
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घग्घर नदी के कटाव से आसपास की ढाणियां भी पानी में घिर गई हैं। लोग अपने घरेलू सामान और पशुधन को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पानी का बहाव और बढ़ा या किसी अन्य बांध में टूट-फूट हुई, तो स्थिति और भी खराब हो सकती है।
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किसान कश्मीर कंबोज ने बताया कि एक दिन पहले ही कलेक्टर को बांध की कमजोर स्थिति के बारे में सूचित किया गया था, लेकिन प्रशासन ने तत्काल कदम नहीं उठाए। अगर बांध को मजबूत करने के लिए समय रहते संसाधन जुटाए जाते तो यह बड़ी तबाही टल सकती थी।
अब नुकसान का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नदी का बहाव कुछ कम हुआ है, लेकिन बांध की स्थिति बेहद खराब है। किसानों ने प्रशासन से तुरंत जेसीबी, मिट्टी के कट्टे और अन्य संसाधन मुहैया कराने की मांग की है ताकि कटाव को रोका जा सके और नुकसान को कम किया जा सके।
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स्थानीय किसानों ने बताया कि वे कई दिनों से खेतों में पहरा दे रहे थे और खुद मिट्टी डालकर बंधों को बचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन नदी का पानी इतना तेज था कि उनके सारे प्रयास विफल हो गए। इसके परिणामस्वरूप, किसानों की फसलें डूब गईं और उनका भारी नुकसान हुआ।
पिछले 36 घंटों में रिसाव और बांध के टूटने से हजारों बीघा भूमि पर पानी भर चुका है। बांध के टूटे हिस्से में करीब 5 से 6 फीट तक पानी भर गया है, जिससे इलाके में स्थितियां और भी विकट हो गईं।
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किसानों की हालत और बढ़ता नुकसान
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लोग सुरक्षित स्थानों पर पलायन कर रहे
इससे पहले जिला कलेक्टर डॉ. मंजू ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया था और किसानों को आश्वासन दिया था कि प्रशासन नुकसान को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाएगा, लेकिन शनिवार सुबह बांध टूटने से किसानों को बड़ा नुकसान हुआ।
किसानों ने सहायता की मांग की
अब नुकसान का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। नदी का बहाव कुछ कम हुआ है, लेकिन बांध की स्थिति बेहद खराब है। किसानों ने प्रशासन से तुरंत जेसीबी, मिट्टी के कट्टे और अन्य संसाधन मुहैया कराने की मांग की है ताकि कटाव को रोका जा सके और नुकसान को कम किया जा सके।
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पानी के दबाव से नाकाम हुए प्रयास
FAQ
- 1. घग्घर नदी के बांध का टूटना क्यों हुआ?
घग्घर नदी के बांध में कटाव होने के कारण पानी का बहाव बढ़ गया, जिससे फसलें जलमग्न हो गईं। - 2. किसानों को हुए नुकसान का क्या होगा?
प्रशासन ने किसानों को राहत देने के लिए कदम उठाने का आश्वासन दिया है, और जांच भी की जा रही है। - 3. क्या प्रशासन ने समय रहते कदम उठाए?
किसानों ने पहले ही कमजोर बंधों के बारे में प्रशासन को सूचित किया था, लेकिन तत्काल कोई कदम नहीं उठाए गए, जिससे नुकसान हुआ।
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