हनुमान बेनीवाल वो सियासी चेहरा, जिनके तरकश में विवादों के तीरों की कमी नहीं

The Sootr | Mar 25, 2026, 14:22 IST
Share
beniwal
Photograph: (the sootr)

सांसद हनुमान बेनीवाल राजस्थान की सियासत में वो चेहरा बन गए हैं, जिनके तरकश में विवादों की कमी नहीं रहती। अभी वह जाट समुदाय के दिग्गज राजाराम मील पर टिप्पणियों को लेकर चर्चा में हैं।

योगेन्द्र योगी@जयपुर

राजस्थान में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (रालोप) प्रमुख और सांसद हनुमान बेनीवाल अपने तीखे और विवादित बयानों के कारण फिर चर्चा में हैं। इस बार उनके निशाने पर जाट समुदाय के कद्दावर नेता राजाराम मील हैं।

बेनीवाल का विवादों से पुराना नाता रहा है। उन्होंने राजस्थान का शायद ही ऐसा कोई वरिष्ठ नेता हो, जिसे निशाना नहीं बनाया हो। इस फेहरिस्त में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत, मौजूदा मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, मंत्री डॉ किरोड़ी लाल मीणा और जाट समाज के नेताओं सहित दर्जनों दिग्गज शामिल हैं। इन सभी से सांसद बेनीवाल की जमकर तकरार रही है। हालांकि, ज्यादातर नेताओं ने बेनीवाल के विवादित बयानों पर प्रतिक्रिया नहीं दी।

राजाराम मील से क्यों उलझे हैं बेनीवाल

इन दिनों प्रदेश में सबसे ज्यादा गूंज आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल व जाट महासभा के प्रदेशाध्यक्ष राजाराम मील के बीच चल रहे विवाद की है। विवाद की जड़ में अंतरजातीय विवाह का मुद्दा रहा। बेनीवाल ने कांग्रेस विधायक मुकेश भाकर के अंतरजातीय विवाह के बहाने मील पर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जिनके परिवार में दूसरे समाज में शादियां हुई हैं, उन्हें समाज का नेतृत्व करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। यह सीधा हमला राजाराम मील के परिवार पर था।

इसके जवाब में मील ने तर्क दिया कि उच्च शिक्षा प्राप्त युवा अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुन सकते हैं। लेकिन बेनीवाल यहां नहीं रुके। उन्होंने मील को 'बलात्कारी' और 'काला कारनामा' करने वाला बताते हुए सबूतों के साथ पर्दाफाश करने की धमकी दे डाली। पलटवार करते हुए मील ने बेनीवाल को 'चोर' और 'अफीम के नशे में बकने वाला' करार दिया।

19 मार्च को मील के जयपुर आवास पर बेनीवाल समर्थकों के विरोध प्रदर्शन के बाद पुलिसिया कार्रवाई भी हुई, हालांकि मील ने बड़प्पन दिखाते हुए युवाओं को माफ कर दिया और इसे 'गुमराह युवाओं की हरकत' बताया।

मिर्धा और मदेरणा परिवार से अदावत

हनुमान बेनीवाल की राजनीति की एक बड़ी खासियत यह रही है कि उन्होंने जाट समाज के स्थापित राजनीतिक घरानों-मिर्धा और मदेरणा परिवार-को ललकारने में कभी संकोच नहीं किया। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब राजाराम मील ने भाजपा की ज्योति मिर्धा का समर्थन किया, तो बेनीवाल ने उन्हें पूजा-पाठ कराने की धमकी दे डाली।

बेनीवाल ने आरोप लगाया कि राजाराम मील ने अपने दामाद एमएल लाठर को डीजीपी बनवाने के लिए तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत के पैर पकड़े थे। इस पर भाजपा नेता ज्योति मिर्धा ने पलटवार करते हुए बेनीवाल और गहलोत के बीच के 'घालमेल' पर सवाल उठाए।

बेनीवाल ने ओसियां की पूर्व कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा पर कई बार व्यक्तिगत टिप्पणियां कीं। उन्होंने दिव्या की शादी को लेकर सार्वजनिक मंचों से नसीहतें दीं और राहुल गांधी के साथ उनकी तस्वीरों पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। दिव्या मदेरणा ने भी इसका करारा जवाब देते हुए कहा कि वह महिला होने को हथियार नहीं बनाएंगी और बेनीवाल को राजनीति में परास्त व्यक्ति बताया।

धनखड़ पर कर चुके हैं टिप्पणी

बेनीवाल के निशाने पर केवल प्रदेश के नेता ही नहीं, बल्कि देश के उच्च संवैधानिक पदों पर बैठे व्यक्ति भी रहे हैं। उन्होंने उपराष्ट्रपति रहते हुए जगदीप धनखड़ पर टिप्पणी करते हुए यहां तक कह दिया कि यदि धनखड़ अपने गांव से सरपंच का चुनाव भी जीत जाएं तो हम मान लेंगे कि उनके पास वोट है।

इस बयान पर भी उनकी जमकर किरकिरी हुई। ज्योति मिर्धा ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा कि जब समाज का कोई व्यक्ति देश के दूसरे सबसे बड़े पद पर पहुंचता है तो उसका आदर होना चाहिए, न कि उसे हल्का बोलना चाहिए।

जातीय ध्रुवीकरण का कार्ड

बेनीवाल ने अपनी एक जनसभा में राजपूत समाज के शौर्य और इतिहास पर भी टिप्पणी कर विवाद खड़ा कर दिया था। उन्होंने कहा था कि इस देश में तुम अकेले क्षत्रिय नहीं हो, सबसे बड़ा क्षत्रिय जाट है। इसके अलावा मुगलों के समय 'बेटियों के रिश्तों' को लेकर की गई उनकी टिप्पणी ने राजपूत समाज को सड़कों पर उतरने को मजबूर कर दिया था। राजपूत समाज ने उन्हें 'लाशों का सौदागर' तक कह डाला। हालांकि विवाद बढ़ता देख बेनीवाल ने इसे सामाजिक सच्चाई बताकर पल्ला झाड़ने की कोशिश की।

'व्हाइट हाउस' का किस्सा

मई 2025 में बेनीवाल ने भजनलाल सरकार के मंत्री केके विश्नोई पर सीधा हमला बोला। उन्होंने 2021 की सब-इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में धांधली का आरोप लगाते हुए कहा कि सारा लेनदेन जोधपुर में मंत्री के 'व्हाइट हाउस' में हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री पर भी जांच के नाम पर औपचारिकता निभाने का आरोप लगाया। मंत्री विश्नोई ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी और कहा कि बेनीवाल युवाओं को भ्रमित कर रहे हैं।

'चोर' और 'दलाल' तक पहुंची बात

अगस्त 2025 में टीवी डिबेट के दौरान बेनीवाल और दिग्गज मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा आपस में भिड़ गए। किरोड़ी लाल ने बेनीवाल को 'चोर' कहा तो बेनीवाल ने उन पर भ्रष्टाचार और आंदोलन बीच में छोड़कर भागने के आरोप लगाए। बेनीवाल ने दावा किया कि किरोड़ी लाल ने 2013 में अशोक गहलोत से 200 करोड़ रुपये लिए थे। वहीं, किरोड़ी लाल ने बेनीवाल पर राज्यसभा चुनाव में वोट के बदले पैसे लेने का आरोप लगाया।

वसुंधरा राजे और नागिन वाला बयान

पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ बेनीवाल का 36 जैसा आंकड़ा जगजाहिर है। उन्होंने राजे के लिए 'नागिन' और 'शराबी' जैसे अमर्यादित शब्दों का इस्तेमाल किया। सितंबर 2019 में सीकर की एक सभा में उन्होंने फिल्म 'नागिन' का गाना सुनाकर राजे पर तंज कसा और अशोक गहलोत को उनका 'सपेरा' बताया। बेनीवाल का मानना है कि वसुंधरा राजे के राजनीतिक अवसान के कारण ही भजनलाल शर्मा जैसे नेता मुख्यमंत्री बन पाए हैं, जिसे वे अपनी जीत मानते हैं।

तीसरे मोर्चे का अधूरा सपना

जब सचिन पायलट ने अपनी ही गहलोत सरकार के खिलाफ अनशन किया, तो बेनीवाल ने उन्हें नई पार्टी बनाने की सलाह दी। उन्होंने पायलट के साथ गठबंधन कर राजस्थान में तीसरी ताकत की सरकार बनाने का प्रस्ताव रखा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि पायलट मेरे नेता नहीं हो सकते। यह बेनीवाल की उस महत्वाकांक्षा को दर्शाता है, जहां वे खुद को राजस्थान के 'किंगमेकर' या 'किंग' के रूप में देखते हैं।

आक्रामकता व ध्रुवीकरण पर टिकी बेनीवाल की सियासत

हनुमान बेनीवाल की राजनीति पूरी तरह से आक्रामकता और ध्रुवीकरण पर टिकी है। खींवसर उपचुनाव में अपनी पत्नी की हार के बाद बेनीवाल के राजनीतिक गढ़ में सेंध लगती दिखाई दी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बेनीवाल की राजनीति एकला चलो की राह पर रही है। उनकी गतिविधियों ने युवाओं को आकर्षित किया है।

उनकी पश्चिम राजस्थान में अपनी फैंस फॉलोविंग है। हनुमान बेनीवाल राजस्थान की राजनीति के वो खिलाड़ी हैं जिन्हें नजरअंदाज करना नामुमकिन है।

ये भी पढे़:-

पेपर लीक के मास्टरमांइड कटारा की बर्खास्तगी अटकी, पौने तीन साल बाद भी फैसला नहीं

बंगाल चुनाव ने बढ़ाई हलचल, वोट कटने के डर से मजदूरों का पलायन, जयपुर के ज्वेलरी कारोबार पर संकट

आईपीएस पुष्पेन्द्र सिंह राठौड़ को माना अवमानना का दोषी, अगले महीने तय होगी सजा

उदयपुर आईजी पर लगे जमीन की जबरन रजिस्ट्री कराने के आरोप, एफआईआर में आया नाम

Tags:
  • जगदीप धनखड़
  • अशोक गहलोत
  • भजन लाल शर्मा
  • पूर्व सीएम वसुंधरा राजे
  • राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी
  • कांग्रेस विधायक दिव्या मदेरणा
  • आरएलपी सांसद हनुमान बेनीवाल
  • राजाराम मील
  • किरोड़ी लाल मीणा
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा