​IAS आशीष मोदी और भारती दीक्षित का तलाक: हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद एफआईआर रद्द, रिश्तों का 'फाइनल सेटलमेंट'

राजस्थान के आईएएस दंपती आशीष मोदी और भारती दीक्षित के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया। हाई कोर्ट ने आशीष के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। अब इस आईएएस दंपती स्वतंत्र हो गए हैं।

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Mukesh Sharma
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IAS Ashish

Photograph: (the sootr)

News In Short 

  • आईएएस दंपती आशीष मोदी और भारती दीक्षित के बीच वैवाहिक तकरार कानूनी अंजाम तक पहुंची
  • हाई कोर्ट ने आपसी समझोते के बाद आशीष मोदी के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी
  • फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों की रजामंदी के बाद 15 दिसंबर को तलाक की जारी की थी डिक्री
  • भारती दीक्षित ने आशीष के खिलाफ दर्ज कराई थी एफआईआर, जिसमें लगाए गंभीर आरोप
  • आशीष मोदी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा कर एफआईआर को दी थी चुनौती

News In Detail

Jaipur: राजस्थान कैडर के दो चर्चित आईएएस अधिकारियों आशीष मोदी और भारती दीक्षित की वैवाहिक तकरार अब अपने कानूनी अंजाम तक पहुंच गई है। कभी 'पावर कपल' कहे जाने वाले इन अधिकारियों के बीच का विवाद न केवल पारिवारिक न्यायालय पहुंचा, बल्कि इसमें किडनैपिंग, एक्स्ट्रा-मैरिटल अफेयर और पिस्तौल की नोंक पर धमकी जैसे गंभीर आरोप भी शामिल हुए। ताजा घटनाक्रम में हाई कोर्ट ने आशीष मोदी के खिलाफ दर्ज एफआरईआर को रद्द कर दिया है, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच अब 'आपसी सहमति' से समझौता हो गया है।

​तलाक की डिक्री और कोर्ट का फैसला

आईएएस आशीष मोदी और भारती दीक्षित ने आपसी सहमति से तलाक के लिए फैमिली कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी। मामले की संवेदनशीलता और दोनों पक्षों की रजामंदी को देखते हुए कोर्ट ने 15 दिसंबर 2025 को तलाक की डिक्री जारी कर दी। ​

तलाक के बाद आईएएस आशीष मोदी ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दलील दी कि चूंकि अब उनके और भारती के बीच स्थायी समझौता हो चुका है। वे कानूनी रूप से अलग हो चुके हैं, इसलिए पुरानी एफआईआर को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए आशीष मोदी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे को खत्म करने का आदेश दिया।

​वो खौफनाक सुबह: किडनैपिंग और पिस्तौल का साया

इस मामले ने तब तूल पकड़ा था, जब आईएएस भारती दीक्षित ने अपने आईएएस पति के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया था। भारती के आरोपों ने प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया था। एफआईआर के मुताबिक, घटना 15 अक्टूबर को भारती जब अपनी बेटी को स्कूल छोड़ने जा रही थी, तब आशीष ने मुझे अपनी सरकारी गाड़ी में बैठने को कहा। उन्होंने जानबूझकर नियमित ड्राइवर को नहीं बुलाया और एक होमगार्ड से गाड़ी चलवाई। बेटी को स्कूल छोड़ने के बाद जो हुआ, वो किसी दुःस्वप्न जैसा था।

​भारती का आरोप था कि एसएमएस स्टेडियम के पास उनके पति ने होमगार्ड को उतार दिया और वहां पहले से मौजूद एक सहयोगी सुरेंद्र विश्नोई ड्राइविंग सीट पर बैठ गया। अगले डेढ़ घंटे तक शहर की सड़कों पर आईएएस भारती दीक्षित को बंधक बनाकर घुमाया गया। आरोप था कि उनके मोबाइल छीन लिए गए। आशीष ने उन्हें पिस्तौल दिखाकर धमकी दी कि "अगर तलाक नहीं दिया, तो खानदान खत्म कर देंगे।"

​'सूटकेस और शूटर' का सनसनीखेज जिक्र

​एफआईआर में भारती दीक्षित ने एक बेहद डरावने मंजर का जिक्र किया था। उनके अनुसार, उन्हें एक तीन मंजिला मकान में ले जाकर कमरे में बंद कर दिया गया था। वहां आशीष मोदी ने किसी को फोन कर कहा, एक बड़ा सूटकेस और कुछ शूटर साथ रखना, जरूरत पड़ सकती है।

​इस दौरान जब भारती के पिता का फोन आया, तो उन्हें कथित तौर पर बंदूक की नोंक पर यह झूठ बोलने के लिए मजबूर किया गया कि उनकी शुगर बढ़ गई है और वे अस्पताल में हैं। भारती ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने अपनी बहन की शादी (जो 3 नवंबर को थी) का वास्ता देकर जान की भीख मांगी, जिसके बाद उन्हें दोपहर 2 बजे घर छोड़ा गया।

​शराब, मारपीट और अवैध संबंधों के आरोप

​विवाद की जड़ें सिर्फ उस एक दिन की घटना तक सीमित नहीं थीं। भारती दीक्षित ने एफआईआर में अपने पति पर शराब के नशे में मारपीट करने और कई महिलाओं के साथ अवैध संबंध रखने के आरोप भी लगाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि 14 अक्टूबर की रात भी आशीष ने घर आकर उन्हें और उनकी बेटी को लेकर धमकाया था।

बेटी को लेकर किया समझौता

एफआईआर रद्द करने के मुद्दे पर भारती दीक्षित ने कोर्ट में कहा कि उसने नाबालिग बेटी, सामाजिक स्थिति और अपने पद की गरिमा को देखते हुए समझौता किया हैं। लेकिन दो अन्य आरोपी सुरेन्द्र विश्नोई और आशीष शर्मा से समझौते के लिए तैयार नहीं है। उन्होने कहा कि इन दोनों ने आशीष मोदी की ना केवल सहायता की, बल्कि व्यक्तिगत रूप से मुझे धमकाया, मेरा अपहरण किया और मुझे अवैध हिरासत में रखा।  

इस पर अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता को यह तर्क देने की अनुमति नहीं दी जा सकती है कि उसका समझौता केवल उसके पति तक ही सीमित हैं। क्योंकि दोनों सह आरोपियों ने केवल पति की मदद की थी। ऐसे में इस तरह की खंडित कार्रवाई की अनुमति देना निष्पक्षता और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगी। 

आईएएस दंपती से मेच्योरिटी की उम्मीद

अदालत ने अपने आदेश में  कहा कि पति और पत्नी भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं। ऐसे उच्च पदों पर आसीन व्यक्तियों से उच्च स्तर की परिपक्वता, विवेक और संवेदनशीलता की अपेक्षा की जाती है। कोर्ट ने कहा कि उसे उम्मीद है कि ऐसे उच्च पदों पर आसीन अधिकारियों से जुड़े वैवाहिक विवादों का समाधान उनकी जिम्मेदारियों के अनुरूप संयम और दूरदर्शिता के साथ किया जाएगा। दुर्भाग्यवश, वर्तमान मामले में जो आचरण देखने को मिला है, वह इन अपेक्षाओं से मेल नहीं खाता हैं। फिर भी, चूंकि दोनों पक्षों ने अपने सभी विवादों का सौहार्दपूर्ण ढंग से निपटारा कर लिया है। ऐसे में एसएमएस थाने में दर्ज एफआईआर और उससे जुड़ी समस्त कार्रवाई को रद्द किया जाता हैं।

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