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Photograph: (the sootr)
News In Short
- हाई कोर्ट ने दिए कर्मचारी को अवकाश के बदले वेतन देने के आदेश
- सेवानिवृत्ति के बाद भी नहीं दिया 13 साल का भुगतान
- लोक अदालत में भुगताने देने के हो चुके हैं आदेश
- हाई कोर्ट ने रोडवेज के खराब मैनेजमेंट को ठहराया जिम्मेदार
- हाई कोर्ट ने दो महीने भुगतान करने के दिए आदेश
News In Detail
राजस्थान हाई कोर्ट ने कहा है कि किसी संस्था की खराब वित्तीय स्थिति के कारण कर्मचारी को कानूनी अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने राजस्थान रोडवेज के सेवानिवृत्त कर्मचारी को अवकाश के बदले मिलने वाले 13 साल का बकाया वेतन अदा करने के आदेश दिए हैं। जस्टिस अशोक कुमार जैन ने यह आदेश मोहन सिंह की याचिका को स्वीकार करते हुए दिए।
खराब मैनेजमेंट व प्रोफेशनल माहौल की कमी
कोर्ट ने कहा है कि राजस्थान रोडवेज अव्यवस्था, ​घटिया मैनेजमेंट तथा प्रोफेशनल मैनेजमेंट नहीं होने के कारण आर्थिक संकट से जूझ रही है। लेकिन इस स्थिति का कर्मचारी के कानूनी अधिकारों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
तो सरकार कतर देती अफसरों के पर
कोर्ट ने कहा है कि यदि सरकार रोडवेज की अव्यवस्था के प्रति सचेत होती तो सबसे पहले वह प्रशासनिक अफसरों के पर कतरती। क्योंकि ड्राईवर,कंडक्टर व सपोर्ट व मैकेनिकल स्टॉफ पब्लिक ट्रांसपोर्ट के लिए जिम्मेदार राजस्थान रोडवेज की रीढ़ हैं। इसलिए राजस्थान रोडवेज खराब आर्थिक स्थिति के आधार पर कर्मचारी का कानूनी अधिकार नहीं छीन सकती।
1998 से बकाया था पैसा
एडवोकेट सुनील समदडिया ने बताया कि प्रार्थी को साप्ताहिक अवकाश के बदले अलग से पैसा मिलता था। लेकिन, उसे 1998 से 2011 तक का पैसा नहीं दिया गया। 2014 में उसने ऐच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली थी। 12 दिसंबर,2015 को नेशनल लोक अदालत ने उसके पक्ष में अवार्ड करते हुए भुगतान करने के आदेश दिए थे।
रोडवेज के वकील का कहना था कि रोडवेज की खराब आर्थिक हालात के कारण 3 नवंबर,2011 के सर्कुलर जारी कर भुगतान की प्राथमिकता तय कर दी थीं। इसलिए उसी के अनुसार भुगतान होगा। लेकिन कोर्ट ने कहा है कि याचिकाकर्ता का मामला उक्त सर्कुलर जारी होने से पहले का है। इसलिए रोडवेज दो महीने में याचिकाकर्ता का बकाया पैसे का भुगतान करे।
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