IAS आशीष मोदी और भारती दीक्षित का तलाक: हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद एफआईआर रद्द, रिश्तों का 'फाइनल सेटलमेंट'
Mukesh Sharma | Feb 10, 2026, 21:17 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के आईएएस दंपती आशीष मोदी और भारती दीक्षित के बीच आपसी सहमति से समझौता हो गया। हाई कोर्ट ने आशीष के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। अब इस आईएएस दंपती स्वतंत्र हो गए हैं।
News In Short
- आईएएस दंपती आशीष मोदी और भारती दीक्षित के बीच वैवाहिक तकरार कानूनी अंजाम तक पहुंची
- हाई कोर्ट ने आपसी समझोते के बाद आशीष मोदी के खिलाफ दर्ज एफआईआर रद्द कर दी
- फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों की रजामंदी के बाद 15 दिसंबर को तलाक की जारी की थी डिक्री
- भारती दीक्षित ने आशीष के खिलाफ दर्ज कराई थी एफआईआर, जिसमें लगाए गंभीर आरोप
- आशीष मोदी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा कर एफआईआर को दी थी चुनौती
News In Detail
तलाक की डिक्री और कोर्ट का फैसला
तलाक के बाद आईएएस आशीष मोदी ने अपने खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने दलील दी कि चूंकि अब उनके और भारती के बीच स्थायी समझौता हो चुका है। वे कानूनी रूप से अलग हो चुके हैं, इसलिए पुरानी एफआईआर को जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है। हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार करते हुए आशीष मोदी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दर्ज मुकदमे को खत्म करने का आदेश दिया।
वो खौफनाक सुबह: किडनैपिंग और पिस्तौल का साया
भारती का आरोप था कि एसएमएस स्टेडियम के पास उनके पति ने होमगार्ड को उतार दिया और वहां पहले से मौजूद एक सहयोगी सुरेंद्र विश्नोई ड्राइविंग सीट पर बैठ गया। अगले डेढ़ घंटे तक शहर की सड़कों पर आईएएस भारती दीक्षित को बंधक बनाकर घुमाया गया। आरोप था कि उनके मोबाइल छीन लिए गए। आशीष ने उन्हें पिस्तौल दिखाकर धमकी दी कि "अगर तलाक नहीं दिया, तो खानदान खत्म कर देंगे।"
'सूटकेस और शूटर' का सनसनीखेज जिक्र
इस दौरान जब भारती के पिता का फोन आया, तो उन्हें कथित तौर पर बंदूक की नोंक पर यह झूठ बोलने के लिए मजबूर किया गया कि उनकी शुगर बढ़ गई है और वे अस्पताल में हैं। भारती ने पुलिस को बताया था कि उन्होंने अपनी बहन की शादी (जो 3 नवंबर को थी) का वास्ता देकर जान की भीख मांगी, जिसके बाद उन्हें दोपहर 2 बजे घर छोड़ा गया।
शराब, मारपीट और अवैध संबंधों के आरोप
बेटी को लेकर किया समझौता
इस पर अदालत ने कहा कि शिकायतकर्ता को यह तर्क देने की अनुमति नहीं दी जा सकती है कि उसका समझौता केवल उसके पति तक ही सीमित हैं। क्योंकि दोनों सह आरोपियों ने केवल पति की मदद की थी। ऐसे में इस तरह की खंडित कार्रवाई की अनुमति देना निष्पक्षता और न्याय के सिद्धांतों के विपरीत होगी।
आईएएस दंपती से मेच्योरिटी की उम्मीद
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