फर्जी डिग्री मामले में कोर्ट सख्त, भाजपा MLA जयदीप बिहानी खिलाफ गिरफ्तारी वारंट
Ashish Bhardwaj | Jul 31, 2026, 12:58 IST
जयदीप बिहानी होंगे गिरफ्तार
राजस्थान के श्रीगंगानगर कोर्ट ने फर्जी डिग्री मामले में विधायक जयदीप बिहानी सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के आदेश दिए हैं। एक साल से वारंट तामील न होने पर अदालत ने पुलिस अधीक्षक की कार्यशैली पर नाराजगी जताई।
समझें क्या है पूरा मामला
- फर्जी डिग्री केस में भाजपा विधायक जयदीप बिहानी पर वारंट।
- कोर्ट ने सभी आरोपियों की गिरफ्तारी के दिए आदेश।
- समन तामील नहीं होने पर पुलिस पर नाराजगी।
- एसपी को रोजाना कार्रवाई रिपोर्ट देने के निर्देश।
- BIFT संस्थान से जुड़ा है पूरा फर्जी डिग्री मामला।
श्रीगंगानगर में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-2 ने बड़ा आदेश दिया है। यह आदेश एक चर्चित फर्जी डिग्री प्रकरण से जुड़ा है। इसमें विधायक जयदीप बिहानी भी आरोपी हैं। अदालत ने इनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने को कहा है।
कोर्ट में क्या हुआ
इस दलील पर अदालत ने गंभीरता दिखाई। सभी आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने का फैसला हुआ। प्रकरण की अगली सुनवाई अब 5 अगस्त को रखी गई है।
एसीजेएम का आदेश
इसके बाद आरोपियों को कई बार समन भेजे गए। जमानती वारंट भी जारी किए गए। पुलिस अधीक्षक के माध्यम से अर्द्धशासकीय पत्र भी भेजे गए। फिर भी आरोपियों की उपस्थिति सुनिश्चित नहीं हो सकी।
अदालत ने इस पर कड़ी टिप्पणी की। हर पेशी पर तामीलकर्ता केवल औपचारिक रिपोर्ट देता रहा। गिरफ्तारी या पेशी के लिए कोई ठोस प्रयास नहीं दिखा। अदालत ने इसे अपने आदेशों की अवहेलना बताया।
आदेश में राजस्थान हाई कोर्ट की जयपुर पीठ का जिक्र भी हुआ। हाईकोर्ट ने 12 मई 2025 को निर्देश दिए थे। इनमें कहा गया था कि सांसदों और विधायकों से जुड़े मामलों में तेज तामील जरूरी है। इसकी जिम्मेदारी संबंधित पुलिस अधीक्षक की तय की गई थी।
एसपी और आईजी को भी निर्देश
यदि तामील फिर भी नहीं होती, तो सख्त कार्रवाई तय है। संबंधित अधिकारी को खुद अदालत में हाजिर होना होगा। उसे लिखित में स्पष्टीकरण भी देना होगा। इसके अलावा अदालत ने आईजी बीकानेर को भी पत्र लिखने को कहा है। सामान्य नियम (सिविल एवं दाण्डिक) 2018 के तहत अधिकारियों पर कार्रवाई पर विचार होगा।
कैसे शुरू हुआ था मामला
परिवादिया रविंद्र कौर ने पुलिस को अपनी आपबीती बताई थी। उन्होंने 2009 में बीआईएफटी में फैशन डिजाइनिंग डिप्लोमा में दाखिला लिया था। बाद में उन्होंने बीबीए कोर्स में भी प्रवेश लिया। संस्थान ने यूजीसी, एआईसीटीई और कई विश्वविद्यालयों से मान्यता का दावा किया था। इसी आधार पर उनसे करीब 1.80 लाख रुपए फीस ली गई।
साल 2015 में सच्चाई सामने आई। जिस विश्वविद्यालय के नाम पर डिग्री दी गई, वह वह कोर्स चलाता ही नहीं था। बीआईएफटी उसका अधिकृत अध्ययन केंद्र भी नहीं था। इसके बाद एफआईआर दर्ज कराई गई।
एफआईआर में कई नाम शामिल किए गए। इनमें संस्थान के तत्कालीन अध्यक्ष जयदीप बिहानी का नाम है। प्रबंधक गोविंद सक्सेना और समन्वयक कविता चौधरी भी आरोपी हैं। कोषाध्यक्ष श्याम कोठारी और आईआईएफटी के सीईओ रतनादीप लाल भी नामजद हैं। संस्थान की प्रबंध समिति के अन्य सदस्यों पर भी आरोप हैं।
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