जयपुर में कुछ घंटों की बारिश ने खोली पोल, वोट मांगने पहुंच रहे नेताओं से जवाब मांग रही जनता
Raghvendra Singh Rathore | Sept 05, 2026, 18:40 IST
जयपुर में बारिश ने खोली निगम-अफसरों की पोल, शहर बना नाला
जयपुर में शनिवार को हुई बारिश ने नगर निगम चुनाव से पहले शहर की नागरिक व्यवस्था की पोल खोल दी। कई इलाकों में जलभराव और कचरे ने लोगों को परेशान किया। प्रत्याशी वोट मांगने पहुंचे तो लोगों ने टूटी सड़क, गंदगी और जमा पानी दिखाकर सवाल किया।
समझें क्या है पूरा मामला
- जयपुर में बारिश ने खोली निगम-अफसरों की पोल, शहर बना नाला।
- चुनावी वादे और जमीनी हकीकत के बाच लोगों ने प्रत्याशियों को घेरा।
- 1500 करोड़ की द्रव्यवती परियोजना, फिर भी कचरा और बदबू।
- करतारपुरा नाले में कचरा, 300 लोगों ने दी वोट बहिष्कार की चेतावनी।
- 4455 कर्मचारी लगे सफाई अभियान में, फिर भी शहर में क्यों भरा पानी?
चुनाव के बीच हुई बारिश ने प्रत्याशियों की मुश्किल भी बढ़ा दी है। वोट मांगने घर पहुंच रहे उम्मीदवारों को अब लोग अपने मोहल्ले की टूटी सड़क, गंदगी, बंद नालियां और जमा पानी दिखाकर सवाल पूछ रहे हैं
जीतने के बाद क्या करेंगे यह बाद में बताइए, पहले यह बताइए कि अभी इस समस्या का जिम्मेदार कौन है?
यह सवाल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जयपुर नगर निगम के 150 वार्डों में 723 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। इनमें 16 वार्ड ऐसे हैं जहां मुकाबला सीधे भाजपा और कांग्रेस के बीच है। ये वार्ड 41, 42, 45, 49, 53, 60, 83, 90, 91, 94, 122, 123, 129, 131, 142 और 150 हैं। यानी चुनावी मुकाबला तेज है, लेकिन बारिश ने राजनीतिक मुद्दों के बीच नागरिक सुविधाओं को केंद्र में ला दिया है।
निगम खुद चला रहा सफाई अभियान, फिर बारिश में क्यों बिगड़ते हैं हालात?
अभियान में Garbage Vulnerable Points, सड़क किनारे पड़े कचरे, सार्वजनिक स्थानों और निर्माण मलबे को हटाने का लक्ष्य रखा गया। सांगानेर-मानसरोवर से अभियान शुरू हुआ। इसके बाद जगतपुरा-झालाना-मालवीय नगर, विद्याधर नगर-मुरलीपुरा, झोटवाड़ा-वैशाली नगर और सिविल लाइंस को शामिल किया गया। 7 सितंबर को आदर्श नगर में अभियान प्रस्तावित है।
यानी चुनाव से ठीक पहले निगम की मशीनरी शहर की सफाई में लगी है। इसके बावजूद सवाल यही है कि मानसून में बार-बार जलभराव और गंदगी की शिकायत क्यों सामने आती है?
नगर निगम की वेबसाइट पर आमेर, सिविल लाइंस, मानसरोवर, मोती डूंगरी, हवामहल ईस्ट-वेस्ट और सांगानेर जैसे जोन के लिए वार्षिक नाला सफाई का अलग रिकॉर्ड भी उपलब्ध कराया गया है।
झोटवाड़ा-निवारू रोड-पानी में नाव चलाकर जता चुके हैं विरोध
स्थानीय लोगों की शिकायत थी कि क्षेत्र को वर्षों पहले नियमित किए जाने के बावजूद सड़क, सीवरेज और ड्रेनेज जैसी बुनियादी सुविधाओं की समस्या बनी हुई है। बारिश के बाद कई स्थानों पर गंदा पानी जमा होने से दोपहिया वाहन चालकों के लिए गड्ढे और खुले नाले पहचानना मुश्किल हो जाता है।
इसी विधानसभा क्षेत्र के गांधी पथ वेस्ट में भी खराब सड़क और गड्ढों को लेकर प्रदर्शन हो चुका है।
अब निगम चुनाव में यही मुद्दे प्रत्याशियों के सामने आ रहे हैं। यहां जनता का सवाल साफ है- जब हर बारिश के बाद समस्या सामने आती है तो स्थायी ड्रेनेज सिस्टम कब बनेगा?
करतारपुरा नाला-सुल्तान नगर- करीब 300 लोगों ने दी वोट बहिष्कार की चेतावनी
यहां समस्या सिर्फ सोशल मीडिया की शिकायत तक सीमित नहीं है। करीब 300 स्थानीय निवासियों ने नगर निगम चुनाव का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है।
लोगों का आरोप है कि करतारपुरा नाले में निर्माण मलबा और दूसरा कचरा पड़ा है। इससे पानी का बहाव बाधित होता है। नाले के किनारों पर बढ़ी झाड़ियों और लंबे समय से सफाई की समस्या ने आसपास रहने वाले लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।
यानी जहां राजनीतिक दल लोगों को मतदान के लिए घर से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं इसी शहर में नागरिक सुविधाओं से नाराज लोग कह रहे हैं पहले नाला साफ करो, फिर वोट मांगने आओ।
यह निगम चुनाव के लिए महज सफाई का मुद्दा नहीं, बल्कि सीधे मतदाता की नाराजगी का संकेत है।
निगम चुनाव के बीच बारिश ने दिखाई नगरीय व्यवस्था की पोल
मानसरोवर-द्रव्यवती- ₹1500 करोड़ का प्रोजेक्ट, फिर कचरे और बदबू की शिकायत
इसके बावजूद मानसरोवर और हसनपुरा क्षेत्र के लोगों ने हाल में द्रव्यवती के आसपास कचरा जमा होने और दुर्गंध की शिकायत की है। मानसून में आसपास का कचरा बारिश के पानी के साथ नदी में पहुंचने से स्थिति और खराब होने की बात भी सामने आई।
JDA का पक्ष है कि STP सिस्टम काम कर रहा है और मुख्य समस्या घरेलू तथा निर्माण कचरे की अनियंत्रित डंपिंग है।
यही सवाल निगम और JDA दोनों से बनता है- अगर ₹1,500 करोड़ खर्च करने के बाद भी कचरा नदी में पहुंच रहा है तो एजेंसियों के बीच समन्वय कहां है?
यह समस्या शनिवार की बारिश से पहली बार सामने नहीं आई। अगस्त में हुई तेज बारिश के बाद झोटवाड़ा, सांगानेर, मानसरोवर और वैशाली नगर में जलभराव और ट्रैफिक जाम की शिकायतें सामने आई थीं।
यानी बारिश की तीव्रता अलग हो सकती है, लेकिन शहर के कुछ हिस्सों में समस्या बार-बार लौट रही है। इससे सवाल उठता है कि निगम की मानसून से पहले की तैयारियां स्थायी समाधान हैं या बारिश के बाद पानी निकालने तक सीमित हैं।
1500 करोड़ की द्रव्यवती परियोजना, फिर भी कचरा और बदबू
चुनाव ने बदल दिया सवाल- अब जनता को घोषणा नहीं, मौके पर जवाब चाहिए
कहीं घर के सामने जमा पानी है, कहीं कचरा पड़ा है और कहीं नाला जाम है। ऐसे में जनता के सवाल भी सीधे हैं- पिछले पार्षद ने क्या किया? निगम के अधिकारी कहां थे? नाला सफाई पर पैसा खर्च हुआ तो पानी क्यों भरा? और नया प्रत्याशी जीतने के बाद समस्या खत्म करने की समय सीमा क्या देगा?
यह चुनावी समय में सरकार के लिए भी असहज तस्वीर है। शहर में निगम चुनाव की तैयारियों के साथ पूरी प्रशासनिक मशीनरी सक्रिय है। दूसरी तरफ बारिश होते ही नागरिक सुविधाओं की पुरानी शिकायतें फिर सामने आ रही हैं।
निगम के अपने रिकॉर्ड से उठता सवाल
सवाल सीधा है- अगर 4,455 कर्मचारी विशेष अभियान में लगे हैं, नाला सफाई की अलग व्यवस्था है और हर वार्ड में निगरानी हो रही है तो बारिश के बाद सड़क पर कचरा और पानी क्यों दिखाई देता है?
बारिश कुछ घंटों में थम जाएगी। पानी भी धीरे-धीरे उतर जाएगा। लेकिन चुनाव से ठीक पहले हुई इस बारिश ने प्रत्याशियों, नगर निगम और अफसरों के सामने एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है जो मतदान तक उनका पीछा कर सकता है- वोट मांगने से पहले बताइए, पांच साल बाद भी जयपुर की सड़कें बारिश की परीक्षा में क्यों फेल हो जाती हैं?
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