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Photograph: (the sootr)
News In Short
- जैसलमेर में एक फरवरी 2026 से पर्यटकों को देना होगा टैक्स
- यह टैक्स जैसलमेर आने वाले पर्यटक वाहनों से वसूला जाएगा
- एंट्री टैक्स के रूप् में देना होगा 50 से 200 रुपए तक
- जैसलमेर में पर्यटकों के बढ़ते दबाव पर लगाया टैक्स
- स्थानीय नगर परिषदों को ऐसा टैक्स लगाने का अधिकार
News In Detail
Jaisalmer: राजस्थान की 'स्वर्ण नगरी' जैसलमेर में आने वाले पर्यटकों की एक फरवरी 2026 से जेब ढीली होनी वाली है। अब शहर की सीमाओं में प्रवेश करने वाले पर्यटक वाहनों पर नया यात्री/पर्यटक कर (Passenger/Tourist Tax) देना होगा। यह टैक्स जैसलमेर नगर परिषद ने पर्यटकों के बढ़ते दबाव को देखते हुए लगाया है।
वाहनों के प्रवेश पर लगेगा शुल्क
अधिसूचना के अनुसार टूरिस्ट टैक्स के ये नियम एक फरवरी 2026 से प्रभावी हो जाएंगे। ​नगर परिषद की इस व्यवस्था के बाद शहर में प्रवेश करने वाले बस, कार और अन्य वाणिज्यिक पर्यटक वाहनों को निर्धारित शुल्क चुकाना होगा। सरकारी वाहनों, एम्बुलेंस और निजी लोकल वाहनों को इस टैक्स से छूट रहेगी।
क्यों लिया गया यह निर्णय?
नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 103 के तहत शहर के विकास और पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से यात्री कर वसूलने का प्रस्ताव पारित किया गया था। यह प्रस्ताव ​नगर परिषद जैसलमेर की 15 दिसंबर 2025 को हुई बैठक में पास किया गया। बाद में इसे मंजूरी के लिए स्वायत्त शासन विभाग को भेजा गया। वहां से स्वीकृति मिलने के बाद अधिसूचना जारी की गई।
वाहन श्रेणी के अनुसार निर्धारित दरें
​नगर परिषद ने अलग-अलग श्रेणी के वाहनों के लिए अलग-अलग शुल्क निर्धारित किया है। पर्यटकों को अपनी गाड़ी की क्षमता के अनुसार निम्नलिखित राशि का भुगतान करना होगा:
1. 35 सीटर बस पर 200 रुपए
2. 25 सीटर बस पर 150 रुपए
3. फाइव सीटर से बड़ी कार 100 रुपए
4. लोकल टैक्सी 50 रुपए
5. अन्य समस्त प्रकार की कारें 50 रुपए
क्यों आते हैं लोग जैसलमेर
ऐतिहासिक किलें और किलों का संग्रह
जैसलमेर किला, जिसे "सोनार किला" भी कहा जाता है, राजस्थान के सबसे बड़े किलों में से एक है। यह किला, जो लगभग 800 साल पुराना है, पूरी तरह से पीले बलुआ पत्थर से बना है और इसे यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता प्राप्त है। पर्यटक किले की दीवारों, महलों और मंदिरों की वास्तुकला देखने के लिए आते हैं।
सांस्कृतिक विरासत और लोक कला
जैसलमेर का सांस्कृतिक धरोहर इसकी लोक कला, संगीत और नृत्य में समाहित है। यहां की पारंपरिक हवेलियां और कारीगरी, जो सुंदर कटी हुई पत्थर की नक्काशी से सजती हैं, पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। साथ ही, मरुस्थल की सांस्कृतिक धारा से जुड़ी लोक कथाएं और राजस्थानी संगीत पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
रेगिस्तान का अनुभव
जैसलमेर थार रेगिस्तान के बीच स्थित है, और यहां पर यात्रा करने के लिए रेत के धोरों पर सफारी की जाती है। पर्यटक यहां ऊंट की सवारी करते हैं, रेत के टीलों पर कैम्पिंग करते हैं और रेगिस्तान के प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करते हैं।
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