कारगिल के बाद शुरू हुई शहीद प्रतिमाओं की अनूठी परंपरा, देवता की तरह होती है पूजा
Ashish Bhardwaj | Jul 26, 2026, 12:41 IST
शौर्यगाथा को किया मूर्तियों से अमर
राजस्थान के झुंझुनूं में कारगिल युद्ध के बाद शहीदों की प्रतिमाएं बनवाने की परंपरा शुरू हुई। जिले के 489 शहीदों में से 360 से ज्यादा की प्रतिमाएं लग चुकी हैं, बाकी की तैयारी जारी है।
समझें क्या है पूरा मामला
- झुंझुनूं में शहीदों की याद सहेजने की अनोखी परंपरा।
- कारगिल युद्ध के बाद शुरू हुआ प्रतिमाओं का सिलसिला।
- जिले में 489 शहीदों में 360 से ज्यादा की प्रतिमाएं लगीं।
- खुडानिया गांव बना शहीद प्रतिमा निर्माण का बड़ा केंद्र।
- राजस्थान में 8 साल में 700 से ज्यादा शहीद प्रतिमाएं स्थापित।
जिले में अब तक 360 से ज्यादा शहीदों की प्रतिमाएं लग चुकी हैं। खुडानिया गांव में शहीद प्रतिमाएं बनाने का काम बड़े पैमाने पर होता है। सैनिक कल्याण बोर्ड के चेयरमैन प्रेम सिंह बाजौर मुफ्त में प्रतिमाएं बनवाते हैं। जिले के हर गांव में शहीदों को देवताओं की तरह पूजा जाता है।
कारगिल से शुरू हुई अनूठी परंपरा
शुरुआत कारगिल के 19 शहीदों की प्रतिमाओं से हुई थी। धीरे-धीरे यह परंपरा जिले के अन्य शहीदों तक भी फैलती गई। आज जिले में कुल 489 शहीदों में से 360 से अधिक की प्रतिमाएं लग चुकी हैं, जिनमें कारगिल के बाद शहीद हुए 151 जवान भी शामिल हैं। बाकी शहीदों की प्रतिमाएं अभी तैयार की जा रही हैं।
खुडानिया में बन रहीं सैकड़ों प्रतिमाएं
मूर्तिकार वीरेंद्र के अनुसार, प्रतिमा तैयार होते ही उसे संबंधित शहीद के गांव भेज दिया जाता है। पिछले 8 साल से सैनिक कल्याण बोर्ड के चेयरमैन प्रेम सिंह बाजौर अपने खर्च पर शहीद परिवारों को प्रतिमाएं बनवाकर दे रहे हैं।
प्रदेश में 8 साल में 700 से ज्यादा प्रतिमाएं
उनके मुताबिक पिछले 8 साल में राजस्थान में 700 से अधिक शहीदों की प्रतिमाएं लगाई जा चुकी हैं। इसके अलावा 200 से ज्यादा प्रतिमाएं बनकर तैयार हैं और एक हजार से अधिक प्रतिमाओं पर काम चल रहा है। कारगिल के बाद शहीद हुए ज्यादातर जवानों की प्रतिमाएं उनके गांवों में लग भी चुकी हैं।
शहीदों को देवता मानते हैं ग्रामीण
कई गांवों में तो शहीदों को देवताओं की तरह पूजने की परंपरा भी है। यह परंपरा नई पीढ़ी को शहीदों की कुर्बानी से जोड़े रखने का काम करती है।
धनूरी में 15 शहीदों की स्मृति
मोहनपुरा भामरवासी में चार, जयपहाड़ी में चार तथा बगड़ और टीटनवाड़ में दो-दो प्रतिमाएं लगी हैं। जाबासर में 11 शहीदों का स्मारक बना हुआ है, वहीं धनूरी में अब 15 शहीदों की शौर्यगाथा सहेजने के लिए स्मारक तैयार किया जा रहा है।
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