जोजरी नदी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने लगाई सरकार को फटकार, जांच पर भी सवाल
Ashish Bhardwaj | Jul 23, 2026, 15:57 IST
जोजरी नदी
जोजरी नदी में प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान सरकार को फटकार लगाई और SIT जांच पर सवाल उठाए। कोर्ट ने 20 लाख लोगों की जान बचाने की बात कही, अगली सुनवाई 4 अगस्त को है।
समझें क्या है पूरा मामला
- जोजरी नदी प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाई।
- कोर्ट ने एसआईटी जांच को दिखावा बताया।
- कोर्ट ने 20 लाख लोगों की जान बचाने पर जोर दिया।
- सरकार ने अधिकारियों पर कार्रवाई की जानकारी दी।
- मामले की अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा
कोर्ट ने आगे कहा कि राज्य के हाथों लोगों को जहर नहीं दिया जाएगा। चाहे इसके कारण कितनी भी नौकरियां क्यों न चली जाएं, कोर्ट 20 लाख लोगों की जान की रक्षा करेगा।
कोर्ट ने एसआईटी जांच को लेकर भी नाराजगी जताई। बेंच ने कहा कि नदी में अभी भी बहुत ज्यादा जहरीला पानी बह रहा है और एसआईटी ने अब तक कुछ ठोस नहीं किया है। कोर्ट के अनुसार रिपोर्ट का रिव्यू बताता है कि जांच सही दिशा में नहीं चल रही, बल्कि यह सिर्फ एक दिखावा है।
सरकारी वकील ने कोर्ट को क्या बताया
उन्होंने यह भी बताया कि राजस्थान स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने कुछ अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की है। साथ ही सीईटीपी से पानी के सैंपल लेने के लिए जिम्मेदार रीजनल अधिकारियों को सस्पेंड भी किया गया है।
हालांकि कोर्ट इन जवाबों से संतुष्ट नहीं दिखा। बेंच ने कहा कि गलत रिपोर्टें दी जा रही हैं। इसके जवाब में एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ने भरोसा दिलाया कि निर्देश न मानने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि नदी किनारे बनी सभी फैक्ट्रियां फिलहाल बंद हैं, लेकिन एक्सपर्ट कमेटी उन इंडस्ट्रीज़ के प्रस्तावों पर विचार कर सकती है जो प्रदूषण नियंत्रण के तरीके अपनाने को तैयार हैं।
पिछले साल कोर्ट पहुंचा था मामला
उस समय कोर्ट ने औद्योगिक कचरे और सीवरेज के कारण जोधपुर, पाली और बालोतरा की नदियों के जहरीले होने पर गहरी चिंता जताई थी। जांच में स्टील और टैक्सटाइल जैसी औद्योगिक इकाइयों की बड़ी भूमिका सामने आई थी।
सिंचाई के लिए भी असुरक्षित हुआ पानी
शोधकर्ताओं के अनुसार स्टील और टैक्सटाइल उद्योगों से निकलने वाला रासायनिक अपशिष्ट इसकी मुख्य वजह है। उनका कहना है कि अगर प्रभावी प्रदूषण नियंत्रण और जल शोधन के उपाय जल्द नहीं किए गए, तो नदी से जुड़े गांवों की खेती, भूजल, पशुधन और जैव विविधता पर इसका गंभीर असर पड़ सकता है।
नागौर से निकलकर जोधपुर तक फैला असर
कई सालों से जोधपुर, बालोतरा, जालोर और पाली जिलों की फैक्ट्रियों, खासकर टैक्सटाइल और स्टील री-रोलिंग यूनिट्स का प्रदूषित पानी इस नदी में छोड़ा जा रहा है। नदी किनारे बसे 50 से ज्यादा गांव और बस्तियां इससे सीधे प्रभावित हो रहे हैं।
FAQ
- सुप्रीम कोर्ट ने जोजरी नदी मामले में क्या कहा?
कोर्ट ने राजस्थान सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि राज्य के हाथों लोगों को जहर नहीं दिया जाएगा। कोर्ट ने SIT जांच को सिर्फ दिखावा बताया। अगली सुनवाई 4 अगस्त को होगी। - जोजरी नदी में प्रदूषण की वजह क्या है?
जोधपुर, बालोतरा, जालोर और पाली की फैक्ट्रियों, खासकर टैक्सटाइल और स्टील इकाइयों का प्रदूषित पानी नदी में छोड़ा जा रहा है। इससे नदी का पानी जहरीला हो गया है। शोध में यह पानी सिंचाई के लिए भी असुरक्षित पाया गया है। - जोजरी नदी कहां से निकलती है?
यह नदी नागौर जिले के पाण्डलू गांव की पहाड़ियों से निकलती है। यह जोधपुर जिले के खेजड़ला खुर्द के पास लूनी नदी में मिलती है। नदी किनारे 50 से ज्यादा गांव और बस्तियां बसी हुई हैं।
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