तेजपाल मिर्धा को राजस्थान हाई कोर्ट से मिली राहत, गिरफ्तारी पर लगी रोक
Mukesh Sharma | Sept 20, 2026, 13:36 IST
कुचेरा: तेजपाल मिर्धा को हाईकोर्ट से मिली राहत
कुचेरा नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष तेजपाल मिर्धा को राजस्थान हाई कोर्ट से राहत मिली है। जस्टिस कुलदीप माथुर की बेंच ने गिरफ्तारी पर रोक लगाई है। उनके खिलाफ 2018 के मामले में एसीबी ने एफआईआर दर्ज की थी। रविवार को विशेष सुनवाई हुई थी।
समझें क्या है पूरा मामला
- हाईकोर्ट से तेजपाल मिर्धा को मिली राहत।
- गिरफ्तारी पर फिलहाल लगी रोक।
- जस्टिस कुलदीप माथुर की बेंच ने सुनाया फैसला।
- रविवार को हुई विशेष सुनवाई।
- 2018 के मामले में दर्ज हुई थी एफआईआर।
जस्टिस कुलदीप माथुर की विशेष बेंच ने मिर्धा की याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
तेजपाल मिर्धा के खिलाफ हाल ही में एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) में 2018 के एक मामले में FIR दर्ज हुआ है। गिरफ्तारी की आशंका पर मिर्धा ने राजस्थान हाई कोर्ट का रुख किया और दो दिन के लिए प्रोटेक्शन की मांग की थी।
रविवार को हाई कोर्ट में हुई विशेष सुनवाई
याचिका पर सुबह सुनवाई शुरू हुई और तेजपाल मिर्धा की ओर से उनके अधिवक्ता रामावतार चौधरी एवं सहयोगी अधिवक्ता सुमेर सिंह गौर ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
एसीबी में मुकदमा दर्ज होने के बाद मांगी थी सुरक्षा
मामले में रविवार को हुई सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने मिर्धा को अंतरिम राहत देते हुए गिरफ्तारी पर फिलहाल रोक लगाने का आदेश दिया।
नगर पालिका अध्यक्ष के चुनाव से भी जुड़ा मामला
हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब मिर्धा को तत्काल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है।
क्या है पूरा विवाद?
शिकायत में आरोप था कि कुछ ठेके तत्कालीन चेयरमैन से जुड़े लोगों की फर्मों को दिए गए। इससे उन्हें फायदा पहुंचाया गया। ठेके पर लगे कर्मचारियों का बीमा और PF नहीं कराने का आरोप भी लगाया गया था। इसके अलावा कागजों में जितने कर्मचारी बताए गए, उतने मौके पर काम नहीं करने की शिकायत भी की गई थी।
शिकायत में टेंडर देने के तरीके पर भी सवाल उठाए गए थे। आरोप था कि टेंडर की सूचना बड़े में देने के बजाय छोटे अखबारों में छपवाई जाती थी। इससे ज्यादा लोगों को टेंडर के बारे में पता नहीं चल पाता था और कुछ खास लोगों को ठेके मिलने का रास्ता आसान हो जाता था।
शैतान राम टाक ने 29 दिसंबर 2017 को सूचना का अधिकार लगाकर नगर पालिका से काम और टेंडरों की जानकारी मांगी थी। जानकारी नहीं मिलने पर उन्होंने राज्य मुख्य सूचना आयुक्त के यहां अपील की।
एसीबी के दस्तावेज के मुताबिक, 2015 से 2018 के बीच दिए गए कामों के रिकॉर्ड की जांच में शुरुआती तौर पर गड़बड़ी सामने आई। इसके बाद अब भ्रष्टाचार निवारण कानून की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
करीब सात साल पुराने मामले में यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब कुचेरा नगर पालिका में अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर सियासी खींचतान तेज है। इससे चुनाव से ठीक पहले यह पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
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