मोतीमहल पर फिर लहराया रियासतकालीन परचम: पुत्र से मिलने के बाद विश्वेंद्र ने उठाया यह कदम

राजस्थान में भारतपुर के शाही मोती महल पर पूर्व परिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह ने बुधवार को रियासतकालीन झंड़ा फहरा दिया। इस झंड़े के लहराने के साथ ही भरतपुर के पूर्व राजपरिवार में चल रहा घमासन अब थमने के आसार हैं।

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Ashish Bhardwaj
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Photograph: (the sootr)

News In Short

  • विश्वेंद्र सिंह ने भारतपुर के मोती महल पर फहराया रियासतकालीन झंड़ा
  • विश्वेंद्र ने झंड़ा फहराने की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की
  • यह घटनाक्रम पिता विश्वेंद्र और पुत्र अनिरुद्ध् की मुलाकात के एक दिन बाद हुआ
  • अनिरुद्ध ने रियासतकालीन झंड़ा उतार कर फहराया दिया था दूसरा झंड़ा
  • झंड़ा फहराने के साथ ही पूर्व राजपरिवार का विवाद सुलझने के आसार

News In Detail

राजस्थान की राजनीति और राजसी परंपराओं में 'लोहागढ़' का किला हमेशा से अपनी अजेय शक्ति के लिए जाना जाता रहा है। लेकिन, कुछ दिनों से यह किला एक अलग तरह की 'जंग' और फिर उसके सुखद अंत का गवाह बन रहा है। भरतपुर के पूर्व राजपरिवार में चल रहे मनमुटाव के बाद अब सुलह की ऐसी बयार बही है कि बरसों पुराने मान-सम्मान के प्रतीक फिर से अपनी जगह पर लौट आए हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री और पूर्व राजपरिवार के सदस्य विश्वेंद्र सिंह ने बुधवार को खुद अपने हाथों से मोती महल परिसर में लोहागढ़ का रियासतकालीन झंडा फिर से फहराया।

शान से लहराया 'पीला' परचम

पूर्व कैबिनेट मंत्री विश्वेंद्र सिंह ने झंडा फहराने की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की। उन्होंने लिखा-भरतपुर की अजय रियासत लोहागढ़ व हमारे पूर्वजों व समस्त सरदारी की आन-बान-शान मोती महल परिसर में भरतपुर रियासत के रियासत कालीन झंडे को स्वयं मेरे द्वारा पुनः सह-सम्मान के साथ आज फहरा दिया गया है। विश्वेंद्र ने इसके जरिए संदेश दिया कि भरतपुर की 'सरदारी' और विरासत की गरिमा को फिर से स्थापित कर दिया गया है। 

​एक दिन पहले वायरल हुई 'मिलन की तस्वीर'

​मोती महल पर झंडा फहराने की रस्म उस समय हुई है, जब ठीक एक दिन पहले विश्वेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया पर एक ऐसी तस्वीर साझा की, जिसने पूरे प्रदेश का ध्यान खींच लिया। लंबे समय से चल रहे पारिवारिक विवाद और दूरियों के बाद पिता विश्वेंद्र सिंह और पुत्र अनिरुद्ध सिंह आपस में मिलते दिखे। ​इस तस्वीर ने उन तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया, जिनमें पिता-पुत्र के बीच तल्खियों की खबरें सुर्खियां बनती थीं।

मोती महल: जहां धड़कता है रियासत का दिल

​मोती महल परिसर भरतपुर रियासत के लिए केवल एक इमारत नहीं, बल्कि उनकी अजेय परंपराओं का केंद्र है। इसी परिसर से भरतपुर के जाट शासकों ने इतिहास की बड़ी-बड़ी लड़ाइयों की रणनीति बनाई थी। मोती महल पर रियासतकालीन झंड़ा फहराने से ​स्थानीय लोगों और पूर्व राजपरिवार के समर्थकों (सरदारी) के बीच इस खबर से भारी उत्साह है। समर्थकों का मानना है कि 'अजय दुर्ग' लोहागढ़ की असली ताकत परिवार की एकता में ही निहित है।

​सियासी और सामाजिक मायने

​भरतपुर रियासत का झंडा फहराने के इस कदम को रणनीतिक रूप से भी देखा जा रहा है। विश्वेंद्र सिंह ने अपने पोस्ट में 'समस्त सरदारी' शब्द का इस्तेमाल कर भरतपुर के उन तमाम वर्गों को साधने की कोशिश की है, जो पीढ़ी दर पीढ़ी राजपरिवार से जुड़े रहे हैं। कुछ महीने पहले विश्वेंद्र सिंह के पुत्र अनिरुद्ध ने ​मोती महल से रियासतकालीन झंड़ा उतार कर दूसरा ध्वज लगा दिया था। इसके बाद भतरपुर की सभी खापों में उबाल आ गया था। समस्त सरदारी ने रियासतकालीन झंडा लगाने की घोषणा भी की, लेकिन यह टल गई।

लोहागढ़ की अजेय गाथा का नया पन्ना

​इतिहास गवाह है कि लोहागढ़ को कभी कोई जीत नहीं पाया। आज जब राजपरिवार के भीतर की कड़वाहट खत्म हुई और विश्वेंद्र सिंह ने खुद परचम बुलंद किया, तो लोगों ने कहा- किले की दीवारें तो हमेशा से मजबूत थीं, आज किले की रूह भी मजबूत हो गई है। ​सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को हजारों की संख्या में लाइक और शेयर मिल रहे हैं।

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