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Photograph: (the sootr)
News In Short
- 8वें वेतन आयोग के लिए गठित होगी हाईपॉवर कमेटी
- ​महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर और सरोगेसी लीव
- सरकारी दफ्तरों में 'शिशु-पालन सदन' खुलेंगे, जहां 6 वर्ष तक के बच्चों की देखभाल होगी।
- कर्मचारी की मौत पर अनुकंपा नियुक्ति में अब 'पुत्रवधू' भी पा सकेगी नौकरी
- राजस्थान में अब 'रूल बेस्ड' से 'रोल बेस्ड' गवर्नेंस का नया दौर
News In Detail
Jaipur: राजस्थान की भजनलाल सरकार ने वर्ष 2026-27 के बजट में राज्य के लाखों कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए 'खुशियों का पिटारा' खोल दिया है। राज्य विधानसभा में बुधवार को पेश हुए बजट में घोषणाओं की ऐसी झड़ी लगाई, जिसने प्रदेश के प्रशासनिक तंत्र में नई ऊर्जा का संचार कर दिया है। 8वें वेतन आयोग की सुगबुगाहट से लेकर महिला कर्मचारियों को चाइल्ड केयर लीव में बड़ी राहत देने तक इस बजट में हर वर्ग का ख्याल रखा गया है।
8वें वेतन आयोग की राह हुई साफ: गठित होगी हाईपॉवर कमेटी
राजस्थान बजट 2026 की सबसे बड़ी और बहुप्रतीक्षित घोषणा 8वें वेतन आयोग को लेकर रही। सरकार ने इसके क्रियान्वयन और विसंगतियों के अध्ययन के लिए एक 'उच्च स्तरीय समिति' के गठन का ऐलान किया है। यह समिति कर्मचारी संगठनों की मांगों—जैसे पदोन्नति के अवसर, वेतनमान संशोधन और भत्तों के तुलनात्मक विश्लेषण का गहराई से अध्ययन करेगी। जैसे ही केंद्र स्तर पर 8वें वेतन आयोग की रिपोर्ट आएगी, यह समिति उसे प्रदेश में लागू करने के तौर-तरीकों का परीक्षण करेगी।
​महिला कार्मिकों को 'डबल राहत': चाइल्ड केयर और सरोगेसी लीव
​महिला सशक्तिकरण की दिशा में बजट में अहम प्रस्ताव हैं। कार्य और परिवार के बीच संतुलन बनाने के लिए सेवा नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं:
​चाइल्ड केयर लीव (CCL): अब महिला कर्मचारी एक साल में 3 के बजाय 6 चरणों में यह अवकाश ले सकेंगी। इससे छोटे बच्चों की परवरिश और स्कूल की छुट्टियों के दौरान माताओं को अधिक लचीलापन मिलेगा।
​सरोगेसी मातृत्व अवकाश: बदलते सामाजिक परिवेश को देखते हुए सरकार ने संवेदनशील निर्णय लिया है। अब सरोगेसी से मां बनने वाली महिला (कमीशनिंग मदर) को 90 दिन और सरोगेट मदर को 180 दिन का मातृत्व अवकाश मिलेगा।
​मुख्यमंत्री शिशु-पालन सदन: दफ्तरों में बच्चों की चिंता खत्म करने के लिए चरणबद्ध तरीके से
'शिशु-पालन सदन' खुलेंगे, जहाँ 6 माह से 6 वर्ष तक के बच्चों की देखभाल होगी।
अनुकंपा नियुक्ति में अब 'पुत्रवधू' भी हकदार
सरकार ने सेवा नियमों के मानवीय पक्ष को मजबूत करते हुए अनुकंपा नियुक्ति के दायरे को बढ़ाया है। अब मृत सरकारी कर्मचारी के आश्रितों की सूची में 'पुत्रवधू' को भी शामिल किया जाएगा। इसके अलावा, यदि कोई कर्मचारी ड्यूटी के दौरान ऐसी दिव्यांगता का शिकार होता है कि वह राजकार्य करने में सक्षम न रहे, तो उसके परिवार के पात्र सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जाएगी। यह कदम परिवारों को आर्थिक असुरक्षा से बचाने में मील का पत्थर साबित होगा।
​बजट में पेंशनर्स के लिए 'डिजिटल कवच'
फेस ऑथेंटिकेशन: मोबाइल ऐप के जरिए घर बैठे चेहरा दिखाकर 'वार्षिक जीवन प्रमाण पत्र' जमा हो सकेगा।
​दिव्यांग बच्चों को राहत: पारिवारिक पेंशन पाने वाले विशेष योग्यजन बच्चों को अब हर 3 साल में दिव्यांगता प्रमाण पत्र नहीं देना होगा; अब सिर्फ एक बार का प्रमाण पत्र ही मान्य होगा।
'रूल बेस्ड' से 'रोल बेस्ड' गवर्नेंस का नया दौर
सरकार केवल पैसे ही नहीं बढ़ा रही, बल्कि काम करने का तरीका भी बदल रही है। प्रदेश में “आउटकम बेस्ड वर्क कल्चर” लागू किया जाएगा। राज्य सेवा के अधिकारियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के पाठ्यक्रमों से प्रशिक्षित किया जाएगा।
​स्मार्ट गवर्नेंस: उद्देश्य है कि प्रशासन केवल नियमों की लकीर न पीटे, बल्कि अपनी भूमिका (Role) को समझकर जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करे।
​भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और प्रतीक्षा सूची
​अक्सर देखा जाता है कि चयनित अभ्यर्थी जॉइन नहीं करते और पद खाली रह जाते हैं। बजट में प्रावधान किया गया है कि यदि कोई चयनित अभ्यर्थी 1 साल तक ज्वॉइन नहीं करता या किसी कारणवश पद रिक्त होता है, तो प्रतीक्षा सूची से तुरंत वरीयता क्रम में नियुक्ति दी जाएगी। इससे बेरोजगार युवाओं को समय पर नौकरी मिलेगी।
​सैलरी अकाउंट पैकेज और वित्तीय ताकत
​कर्मचारियों और 70 वर्ष तक के पेंशनर्स के लिए 'सैलरी अकाउंट पैकेज' पेश किया गया है। इसमें एडवांस डिजिटल बैंकिंग, रियायती कर्ज और बीमा जैसी वीआईपी सुविधाएं शामिल होंगी। साथ ही, ग्रामीण और शहरी निकायों के जनप्रतिनिधियों की वित्तीय शक्तियां भी बढ़ाई गई हैं ताकि स्थानीय स्तर पर विकास के काम फाइलों में न अटकें।
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