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Photograph: (the sootr)
News in Short
- राजस्थान के बजट बनाने में वित्त विभाग के पांच दिग्गज अफसरों की अहम भूमिका।
- भजनलाल सरकार अपना तीसरा बजट बुधवार 11 फरवरी 2026 को करेगी पेश।
- बजट टीम में देखने को मिला 'जोश' और 'होश' का गजब का संगम।
- तीन चेहरों के लिए था 'अग्निपरीक्षा' जैसा, इनमें वैभव गालरिया, टीना सोनी और राजन विशाल।
- अनुभव का 'बैकबोन', इनमें ​कृष्ण पाल गौतम और ब्रजेश किशोर शर्मा बजट के पुराने खिलाड़ी
News in Detail
​जयपुर। राजस्थान विधानसभा में बुधवार 11 फरवरी को सुबह 11 बजे जब भजनलाल सरकार का बजट पिटारा खुलेगा, तो प्रदेश की 8 करोड़ जनता की उम्मीदें चमक उठेंगी। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इस भारी-भरकम बजट के पीछे वो कौन से 'चाणक्य' हैं, जिन्होंने महीनों तक फाइलों के अंबार और नंबरों के जाल में उलझकर राजस्थान की नई विकास गाथा लिखी है।
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यह कहानी है वित्त विभाग के उन 5 दिग्गज अफसरों की, जिन्होंने पिछले 180 दिन से न ठीक से नींद ली और न ही परिवार को वक्त दिया। इस बजट टीम की सबसे खास बात यह है कि इसमें 'जोश' और 'होश' का गजब का संगम देखने को मिला है। तीन अधिकारियों के लिए यह पहला अनुभव था, वहीं दो अधिकारी पुराने मंझे हुए खिलाड़ी रहे।
​इन तीन चेहरों के लिए था 'अग्निपरीक्षा' जैसा
​इस बार के बजट की सबसे रोचक बात यह रही कि टीम के मुख्य स्तंभ माने जाने वाले तीन वरिष्ठ अधिकारियों के लिए बजट तैयार करने का यह बिल्कुल पहला अनुभव था।
​वैभव गालरिया (प्रमुख वित्त सचिव): टीम के कप्तान के तौर पर वैभव गालरिया ने अपनी पहली ही पारी में शानदार कप्तानी दिखाई। बजट की पूरी रूपरेखा उनकी देखरेख में तैयार हुई। नए होने के बावजूद उन्होंने विभाग के हर छोटे-बड़े पहलू को बारीकी से समझा और मुख्यमंत्री की मंशा के अनुरूप योजनाओं को अमलीजामा पहनाया।
​टीना सोनी (वित्त सचिव- व्यय): टीना सोनी के कंधे पर सबसे बड़ी जिम्मेदारी थी—खर्चों पर लगाम लगाना और मांगों की छंटनी करना। बजट से पहले हर विभाग से मांगों का पहाड़ आता है। टीना सोनी ने यह सुनिश्चित किया कि कौन सी मांग व्यावहारिक है और किसे पूरा किया जा सकता है। उनकी 'फिल्टरिंग' ही बजट को संतुलित बनाती है।
​राजन विशाल (वित्त सचिव - बजट): बजट के प्रावधानों का विश्लेषण और उनकी समीक्षा करना राजन विशाल की मुख्य भूमिका रही। पहली बार बजट प्रक्रिया का हिस्सा होने के बावजूद उन्होंने वित्तीय आंकड़ों के विश्लेषण में गहरी सूझबूझ का परिचय दिया।
​पुराने दिग्गजों ने संभाला मोर्चा
टीम में तीन सदस्य नए थे, वहीं दो अनुभवी अधिकारियों ने इस पूरी प्रक्रिया में 'सेंस ऑफ सिक्योरिटी' प्रदान की:
​कृष्ण पाल गौतम (वित्त सचिव - राजस्व): इनका यह दूसरा बजट अनुभव था। उनका मुख्य काम था यह देखना कि सरकार के पास पैसा आएगा कहां से? टैक्स, शुल्क और सेस का आकलन करना
इनकी मुख्य जिम्मेदारी रही।
​ब्रजेश किशोर शर्मा (निदेशक - बजट): इन्हें इस टीम का 'पितामह' कहा जा सकता है। यह उनका छठा बजट है। राजस्व, ऋण और वित्तीय प्रबंधन की पेचीदगियों को उनसे बेहतर कोई नहीं जानता। उनके अनुभव ने पूरी टीम के लिए मार्गदर्शक का काम किया।
​6 महीने की मेहनत और 10 दिनों का महायुद्ध
​यह बजट कोई एक-दो दिन की मेहनत नहीं है। टीम ने 6 महीनों की लंबी तैयारी के बाद इसे अंतिम रूप दिया है। मंगलवार को जब वित्त मंत्री ने बजट फाइल पर आखिरी हस्ताक्षर किए, तब जाकर इस टीम ने राहत की सांस ली। ​लेकिन काम अभी खत्म नहीं हुआ है। बजट पेश होने के बाद विधानसभा में असली 'रणनीति' शुरू होगी:
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बहस का दौर: बुधवार को बजट पेश होने के बाद 3 दिनों तक इस पर जोरदार बहस होगी।
​सरकार का जवाब: चौथे दिन सरकार विपक्ष के सवालों का जवाब देगी।
​अनुदान मांगें: इसके बाद 8 दिन तक अलग-अलग विभागों की बजट मांगों पर चर्चा होगी।
​अंतिम मुहर: 9वें दिन बजट पारित होगा।
​सरकार की मंशा इस बजट सत्र को 27-28 फरवरी तक चलाने की है। यानी आने वाले 20 दिन राजस्थान की राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
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