राजस्थान में फिर लंपी वायरस की दस्तक, 273 गोवंश में मिला संक्रमण, पशुपालन विभाग ने तेज किया वैक्सीनेशन
Jageshwar prasad | Oct 02, 2026, 14:41 IST
चार साल के लंबे अंतराल के बाद गोवंश पर एक बार फिर लंपी स्किन डिजीज का गंभीर खतरा
अलवर-खैरथल क्षेत्र में लंपी वायरस का खतरा एक बार फिर से बढ़ गया है, जिससे संक्रमित मामलों की संख्या में वृद्धि हुई है। हालांकि, पशुपालन विभाग ने समय पर टीकाकरण अभियान की शुरुआत की है, जिससे स्थिति अब बुरी तरह बिगड़ने से बची हुई है। इस इलाके में 273 गोवंश प्रभावित हुए हैं और उनकी स्वास्थ्य स्थिति की लगातार निगरानी की जा रही है।
समझें क्या है पूरा मामला
- अलवर-खैरथल में लंपी वायरस की दस्तक।
- 273 गोवंश में मिला संक्रमण।
- यूपी सीमा से बढ़ा संक्रमण का खतरा।
- पशुपालन विभाग ने तेज किया टीकाकरण।
- 2022 में 1500 से ज्यादा गोवंश की हुई थी मौत।
इससे स्थानीय पशुपालकों के साथ-साथ राज्य प्रशासन की भी चिंता बढ़ गई है। हालांकि राहत की बात यह है कि पशुपालन विभाग की त्वरित सतर्कता और व्यापक टीकाकरण अभियान के चलते दोनों जिलों में स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। सैकड़ों पशु समय रहते खतरे से बाहर निकाल लिए गए हैं।
कहां मिला संक्रमण?
उन्होंने बताया कि जिले में 273 गोवंश में लंपी वायरस संक्रमण चिन्हित किया गया था। विभाग की ओर से इन क्षेत्रों में बचाव के लिए वैक्सीनेशन किया गया। वर्तमान में अलवर जिले में एक भी गोवंश लंपी वायरस से संक्रमित नहीं है।
2022 में मचाई थी तबाही
वर्ष 2022 में लंपी वायरस ने पूरे राजस्थान में भयंकर तबाही मचाई थी। उस दौरान अकेले अलवर जिले में ही 1500 से अधिक गोवंश की मौत हुई थी। हजारों मवेशी लंबे समय तक तड़पते रहे थे।
उस खौफनाक दौर के बाद बड़े पैमाने पर चले मवेशी टीकाकरण अभियान (Cattle Vaccination Drive) ने संक्रमण की रफ्तार को थाम लिया था। इस बार भी विभाग ने समय रहते कदम उठाए हैं। इससे बड़ी तबाही टल गई है।
कितना हुआ टीकाकरण
संयुक्त निदेशक मीणा ने बताया कि अलवर जिले में इस वर्ष 24 जून से गोवंश में लंपी वायरस से बचाव के लिए वैक्सीनेशन शुरू किया गया था। अब तक एक लाख 69 हजार 800 गोवंश का टीकाकरण किया जा चुका है।
विभाग की ओर से फील्ड में स्टाफ लगातार गोवंश की मॉनिटरिंग कर रहा है। अलवर से खैरथल-तिजारा जिले में भी लंपी वायरस से बचाव के लिए वैक्सीन भेजी जाती है। इससे दोनों जिलों में संक्रमण को रोकने में मदद मिली है।
खैरथल-तिजारा की स्थिति
खैरथल-तिजारा जिले के पशुपालन विभाग के डिप्टी डायरेक्टर पीसी यादव ने बताया कि गोवंश में लंपी वायरस का संक्रमण मिलने की सूचना मिली थी। जिले में करीब 496 पशुओं में लंपी वायरस के लक्षण मिले थे।
इसके बाद गोवंश में वैक्सीनेशन किया गया। इसके चलते संक्रमित गोवंश में से 487 ठीक हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि खैरथल-तिजारा जिले में ड्रग डिपो नहीं होने के कारण अलवर से ही दवाई आती है।
डिप्टी डायरेक्टर यादव ने पशुपालकों को सचेत किया। उन्होंने कहा कि लंपी वायरस का संक्रमण बारिश के मौसम में आता है। लेकिन सर्दी का मौसम शुरू होने के साथ ही यह संक्रमण स्वतः ही ठीक होने लगता है।
क्या हैं लक्षण
लंपी संक्रमण से गोवंश में बुखार आना, भूख कम लगना और दूध उत्पादन घटने जैसी परेशानियां दिखाई देने लगती हैं। उन्होंने बताया कि पशुओं में ऐसे बदलाव नजर आएं तो इसे सामान्य त्वचा की समस्या समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। तुरंत पशु चिकित्सक से जांच करानी चाहिए।
यूपी सीमा से बढ़ा दायरा
दोनों ही जिले दुग्ध उत्पादन और पशुपालन के मामले में राज्य के अग्रणी जिलों में गिने जाते हैं। इसलिए सीमा पार से यह संक्रमण हवा, मक्खियों और मच्छरों के जरिए यहां तक पहुंच गया। विभाग अब सीमावर्ती क्षेत्रों में विशेष निगरानी रख रहा है।
क्यों अहम है यह मामला
अलवर और खैरथल-तिजारा राज्य के प्रमुख दुग्ध उत्पादक जिले हैं। यहां संक्रमण फैलने से बड़ा आर्थिक नुकसान हो सकता था। विभाग की सतर्कता से यह टल गया। अब देखना जरूरी है कि आगे स्थिति कैसी रहती है।
- क्या लंपी वायरस क्या है और यह गोवंश के लिए क्यों खतरनाक है?
लंपी वायरस एक गंभीर संक्रामक रोग है जो गोवंश में गांठों के रूप में लक्षण प्रकट करता है। यह रोग दूध उत्पादन को प्रभावित करता है, जिससे पशुपालकों की आय पर नकारात्मक असर होता है। - हाल ही में अलवर में लंपी वायरस के संक्रमण की क्या स्थिति है?
अलवर जिले में हाल ही में 273 गोवंश में लंपी वायरस का संक्रमण पाया गया था, लेकिन पशुपालन विभाग की त्वरित टीकाकरण से स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है। - गोवंश में लंपी वायरस के लक्षण क्या होते हैं?
लंपी वायरस से संक्रमित गोवंश में शरीर पर गांठें निकलना, बुखार आना, भूख कम लगना, और दूध उत्पादन में कमी जैसी परेशानियां होती हैं।
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