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Photograph: (the sootr)
News In Short
- मिड-डे मील में भोजन पकाने वालों को मिल रहे हैं 2297 रुपए मासिक वेतन। यानी 76.56 रुपए रोज
- राजस्थान में मिड-डे मील योजना में कुल 1.16 लाख कुक कम हैल्पर कर रहे हैं काम
- भोजन पकाने के साथ कुक करते हैं रसाई और बर्तनों की साफ-सफाई का काम
- पीएम पोषण योजना के नाम से चल रही है योजना।
- राजस्थान सरकार ने मानदेय में कुछ उदारता दिखाई, फिर भी नहीं मिल रहा सम्मानजनक वेतन
News In Detail
क्या आप भरोसा कर सकते हैं कि सरकारी काम में किसी व्यक्ति की एक दिन का मेहनताना 76 रुपए 56 पैसे हो सकता है। जी हां, राजस्थान में सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील में भोजन पकाने वालों को इतनी राशि में गुजारा करना पड़ रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि पीएम शक्ति निर्माण योजना के तहत चल रहे मिड-डे मील में कुक कम हैल्पर के प्रति राज्य सरकार ने थोड़ी दरियादिली भी दिखाई। इसके बावजूद उन्हें मासिक मानदेय 2297 रुपए मासिक ही मिल रहा है। यह न्यूनतम मजदूरी से भी बहुत कम है।
एक लाख 16 हजार से ज्यादा कुक
केंद्र सरकार के निर्दैश पर मिड-डे मील योजना के तहत स्कूलों में पोषाहार पकाने के लिए 2010 से कुक कम हैल्पर की सेवाएं मानदेय आधार पर ली जा रही है। वर्तमान में राजस्थान में योजना के तहत 1,15,726 कुक कम हैल्पर पोषाहार पकाने का काम कर रहे हैं। मानदेय देने के लिए केंद्र और राज्य 60: 40 अनुपात में हिस्सा होता है। केंद्र की तरफ से प्रत्येक कुक कम हैल्पर के लिए यह हिस्सा सिर्फ 600 रुपए प्रति माह है।
राजस्थान सरकार ने दिखाई थोड़ी दरियादिली
निर्धारित मापदंड के हिसाब से प्रत्येक कुक कम हैल्पर के मानदेय में राजस्थान सरकार का हिस्सा 400 रुपए माह है। इस तरह केंद्र और राज्य का हिस्सा मिलाकर प्रत्येक कुक का मानदेय 1000 रुपए है। नाममात्र के इस मानदेय के विरोध में कुक कम हैल्परों ने आवाज उठाई तो राज्य सकरार ने अपनी तरफ से थोड़ी दरियादिली दिखाई। दो बार की बढ़ोतरी के बाद राजस्थान सरकार अपनी तरफ से 1697 रुपए देती है। इसमें 2023-24 की बजट घोषण के 261 रुपए भी शामिल हैं।
यह कैसी योजना, जिसमें मानदेय सिर्फ दिखाने का
मिड-डे मील योजना के एक कुक का सवाल है कि क्या एक व्यक्ति 2297 रुपए के मानदेय में अपने परिवार का भरण पोषण कर सकता है। उसका कहना है कि हम बरसों से इस योजना में काम कर रहे हैं। लेकिन, हमें नाममात्र का मानदेय देकर एक तरह से चिढ़ाया जा रहा है। यह न्यूनतम मजदूरी से भी कम है।
एक अन्य कुक का कहना है कि हमारे पास भोजन पकाने, खाना परोसने, रसोईघर और बर्तनों की साफ-सफाई का काम है। इसमें लगभग पूरा दिन लग जाता है। हमने इस बारे में राज्य सरकार को कई बार ज्ञापन दिया है। लेकिन, लगता है कि यह योजना सरकारों की प्राथमिकता में नहीं है।
6 रुपए से 10 रुपए है कुकिंग कॉस्ट
सरकार के अनुसार एक से पांचवीं कक्षा तक एक बच्चे की पोषणा कुकिंग कॉस्ट 6.78 रुपए बैठती है। इसी तरह 6 से 8 कक्षा तक एक बच्चे के मिड डे मील पर 10 रुपए 17 पैसे प्रति दिन प्रति छात्र खर्चा होता है। हालांकि, एक शाला प्रधान का कहना है कि यह कुकिंग कॉस्ट भी इतनी कम है कि उसमें बच्चों को अच्छी क्वालिटी का आहार नहीं दिया जा सकता है। हम किसी तरह व्यवस्था कर बच्चों को अच्छा आहार देने का प्रयास करते हैं।
अब केंद्र से मानदेय बढ़ाने की गुहार
कुक कम हैल्पर के रुप में स्कूलों में काम करने वाली अधिकांश महिला और पुरुष बेहद गरीब तबके के हैं। इनके ज्ञापनों पर गौर करने के बाद अब राज्य सरकार ने केंद्र को पत्र लिखकर कुक कम हैल्पर का मानदेय बढ़ाने के ​लिए पत्र लिखा है। यह पत्र राजस्थान के मिड-डे मील आयुक्त आईएएस विश्व मोहन शर्मा ने 12 जनवरी 2026 को शिक्षा मंत्रालय में स्कूल शिक्षा व साक्षरता विभाग के अवर सचिव को भेजा है।
पत्र में बताया है कि कुक-कम हैल्पर को वर्तमान में कुल 2297 रुपए प्रति माह मानदेय मिल रहा है। यह लोग समय—समय पर मानदेय बढ़ाने की मांग करते रहे हैं। पत्र में इस तबके की कमजोर आर्थिक स्थिति को देखते हुए केंद्र के हिस्सा 400 रुपए में उचित बढ़ोतरी करने की गुहार की है।
2019 से हो रही है मानदेय वृद्धि की मांग
राजस्थान सरकार हालांकि कुक-हैल्पर का मानदेय बढ़ाने के लिए 2019 से केंद्र सरकार को पत्र लिख रही है। सूत्रों के अनुसार राजस्थान सरकार इस योजना में केंद्र का हिस्सा बढ़ाने के लिए अब तक केंद्र को 24 अक्टूबर, 2019, 10 जुलाई,2020, 6 सितंबर,2021 और 10 अप्रेल, 2023 को पत्र लिख चुकी है। इसके अतिरिक्त राजस्थान के स्कूली शिक्षा के शासन सचिव ने 25 जुलाई, 2024 को केंद्र को अर्द्धशासकीय पत्र लिखकर कुक कम हैल्पर का मानदेय बढ़ाने की मांग की थी। लेकिन, केंद्र सरकार ने अभी तक इन पत्रों पर कुछ नहीं किया है।
क्या है मिड डे मील योजना
मिड-डे मील केंद्र की प्रवर्तित योजना है। यह योजना 15 अगस्त, 1995 को पूरे देश में लागू हुई थी। दिसंबर 2004 में मेन्यू आधारित पका हुआ गर्म भोजन देने की व्यवस्था प्रारंभ हुई थी। इस योजना का नामकरण अब पीएम शक्ति निर्माण योजना कर दिया है।
वर्तमान में मिड-डे मील योजना राजस्थान के उच्च प्राथमिक स्तर तक के सभी सरकारी,अनुदानित स्कूल, स्थानीय निकाय के संचालित स्कूल, शिक्षा गारंटी योजना व एआईई सेंटर, नेशनल चाईल्ड लेबर प्रोजेक्ट के तहत संचालित विशेष स्कूल तथा मदरसों में चल रही है। योजना में अब राजस्थान सरकार की ओर से बच्चों को दूध भी दिया जाता है।
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