मोहन भागवत बोले, दुनिया चल रही स्वार्थ से, लेकिन भारत धर्म की राह पर

आरएसएस के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने राजस्थान में डीडवाना के छोटी खाटू कस्बे में मर्यादा महोत्सव में भाग लिया। उन्होने कहा कि दुनिया स्वार्थ के साथ चल रही है, लेकिन भारत ने पाकिस्तान सहित कई देशों की बिना स्वार्थ के मदद की।

author-image
Purshottam Kumar Joshi
New Update
mohan

Photograph: (the sootr)

Listen to this article
0.75x1x1.5x
00:00/ 00:00

News In Short

  •  राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ के सरसंघचालक डॉक्टर मोहन भागवत ने तेरापंथ धर्मसंघ के 162वें मर्यादा महोत्सव में अपने विचार साझा किए।

  • उन्होंने धर्म के सिद्धांतों जैसे सत्य, अहिंसा और अपरिग्रह पर जोर दिया।

  • भारत की एकता और सभी को समान मानने की बात की।

  • भागवत ने कहा कि दुनिया में स्वार्थ की प्रधानता है, जबकि भारत में समाज का कल्याण प्राथमिक है।

  • आचार्य महाश्रमण के साथ मिलकर उन्होंने धर्म के महत्व और अनुशासन पर चर्चा की।

News In Detail

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने एक कार्यक्रम में धर्म के मूल सिद्धांतों की अहमियत पर जोर दिया है। उन्होने कहा कि आज की दुनिया स्वार्थ पर चल रही है लेकिन भारत की परंपरा इससे अलग है। भारत केवल अपने हित की चिंता नहीं करता है बल्कि पूरी दुनिया की चिंता करता है। भारत एक मात्र ऐसा देश है जिसने बिना स्वार्थ के पाकिस्तान, श्रीलंका सहित कई देशों की बिना किसी स्वार्थ के संकट के समय मदद की है। भागवन ने डीडवाना के छोटी खाटू कस्बे में तेरापंथ धर्मसंघ के 162वें मर्यादा महोत्सव में भाग लिया।  

 दुनिया के देशों में स्वार्थ

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने दुनिया के देशों के स्वार्थी दृष्टिकोण की आलोचना करते हुए भारत की अद्वितीयता को बताया। उन्होंने कहा कि जहां बाकी देश अपने स्वार्थ को प्राथमिकता देते हैं, वहीं भारत ने हमेशा मानवता और समाज के कल्याण को महत्व दिया है। भारत की परंपरा और संस्कारों में जीवन का उद्देश्य दूसरों की भलाई के लिए काम करना रहा है।

भारत का दृष्टिकोण

भागवत ने यह भी कहा कि हमारे पूर्वजों ने यह सिद्धांत जान लिया था कि भले ही हम अलग-अलग दिखते हैं, लेकिन हमारी जड़ें एक ही हैं। उन्होंने धर्म, अहिंसा और सत्य के सिद्धांतों को जीवन का मूल बताया और कहा कि धर्म के पीछे जो सत्य है, वह बाकी दुनिया नहीं जानती। भारत में ही यह गहरे अनुभवों और ज्ञान से प्राप्त हुआ है।

धर्म के सिद्धांत और जीवन की दिशा

डॉक्टर मोहन भागवत ने धर्मग्रंथों के महत्व पर जोर दिया और कहा कि इन ग्रंथों से जीवन की दिशा बदली जा सकती है। उन्होंने आचार्य महाश्रमण के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि अहिंसा और करुणा जीवन के अहम हिस्से हैं। जब समाज और देश की रक्षा की आवश्यकता हो, तो शस्त्र उठाने की भी आवश्यकता हो सकती है।

मर्यादा और अनुशासन के महत्व पर जोर

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने मर्यादा और अनुशासन को राष्ट्रीय प्रगति के लिए मजबूत नींव बताया। उनका मानना है कि जब हम सबको अपना मानकर चलते हैं। तब समाज में समरसता और अनुशासन स्थापित होता है। जो राष्ट्र के विकास में सहायक है।

तेरापंथ धर्मसंघ का 162वां मर्यादा महोत्सव

छोटी खाटू कस्बे में आयोजित तेरापंथ धर्मसंघ के 162वें मर्यादा महोत्सव में भारी संख्या में श्रद्धालु और संघ कार्यकर्ता शामिल हुए। इस धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यक्रम में आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत ने आचार्य महाश्रमण से आशीर्वाद लिया और समारोह के बाद संघ कार्यकर्ताओं के साथ संवाद भी किया।

खबरें यह भी पढ़िए...

मध्यप्रदेश में ठंड बरकरार, राजस्थान में पड़ रहा घना कोहरा, छत्तीसगढ़ में बढ़ेगी सर्द

सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार का आश्वासन, अरावली क्षेत्र में नहीं होने देंगे खनन गतिविधियां

भोपाल RKDF यूनिवर्सिटी पर राजस्थान STF का छापा: संचालक सुनील कपूर के घर भी छानबीन

हैपी कुमारी बनीं राजस्थान की पहली महिला डब्लूपीएल क्रिकेटर, लड़कों के साथ खेलकर बनाई पहचान

राजस्थान मोहन भागवत आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत राष्ट्रीय स्वय सेवक संघ
Advertisment