अमायरा सुसाइड केस: सीबीएसई का हाई कोर्ट में जवाब पेश, कागजी है नीरजा-मोदी स्कूल में एंटी-बुलिंग कमेटी

सीबीएसई ने राजस्थान में जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल की व्यवस्थाओं में भारी कमी पाई हैं। उसने इस स्कूल की संबद्धता रद्द करने के मामले में हाई कोर्ट में जवाब पेश कर दिया है।

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Mukesh Sharma
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Neerja modi school

Photograph: (the sootr)

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News In Short 

  • जयपुर में नीरजा मोदी स्कूल की संबद्धता खत्म करने का मामला 
  • सीबीएसई ने हाई कोर्ट में पेश किया 170 पेज का जवाब 
  • जवाब में कहा, कागजी है स्कूल की एंटी-बुलिंग कमेटी 
  • स्कूल का माहौल बेहद असुरक्षित, नहीं दे सकते पढ़ने की अनुमति 
  • सीसीटीवी की मॉनिटरिंग होती तो अमायरा की बच सकती थी जान  

News In Detail

राजस्थान में जयपुर के नीरजा मोदी स्कूल की संबद्धता रद्द करने के मामले में सीबीएसई ने हाई कोर्ट में अपना जवाब पेश कर दिया है। सीबीएसई ने कहा है कि स्कूल में एंटी बुलिंग और पोक्सो कमेटी सिर्फ कागजों तक ही सीमित है। वा​स्तविक रुप से यह कमेटियां कोई काम नहीं कर रही है। यही कारण है कि दिवंगत बच्ची पिछले डेढ़ साल से बुलिंग की शिकार हो रही थी। उसके माता—पिता ने भी स्कूल में चार बार इसकी शिकायत की थी। लेकिन कमेटी के काम नहीं करने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई। सीबीएसई का यह जवाब 170 पेज में है। 

असुरक्षित माहौल है स्कूल में

चौथी कक्षा में पढ़ने वाली 9 साल की अमायरा ने 1 नवंबर, 2025 को स्कूल के चौथे फ्लोर से कूदकर जान दे दी थी। सीबीएसई ने हाई कोर्ट में पेश जवाब में कहा है कि स्कूल में छात्र सुरक्षा मानकों का गंभीर उल्लंघन हुआ है। ऐसे असुरक्षित माहौल में बच्चों को पढ़ने की इजाजत नहीं दी जा सकती।  

सीसीटीवी कैमरे, लेकिन मॉनिटरिंग नहीं

सीबीएसई के अनुसार नीरजा मोदी स्कूल में चौ​थी कक्षा ग्राउंड फ्लोर पर है। वहां से निकलकर छ़ात्रा अमायरा चौथे फ्लोर पर चली गई, जबकि वहां जाना प्रतिबंधित था। स्कूल सीसीटीवी से लैस है, लेकिन उनकी मॉनिटरिंग की कोई व्यवस्था नही है। इसलिए ही किसी को पता ही नहीं चला कि बच्ची चौथे फ्लोर पर पहुंच गई है। अगर सीसीटीवी की लाइव मॉनिटरिंग हो रही होती तो बच्ची की जान बचाई जा सकती थी। 

आधे घंटे तक बच्ची की पहचान नहीं हो पाई

सीबीएसई ने कहा कि घटना के दो दिन बाद ही दो सदस्यीय कमेटी का गठन कर दिया गया था। कमेटी ने सबसे पहले स्कूल का निरीक्षण किया, स्टॉफ से बात की। उसके बाद अभिभावकों को सुना। कमेटी की रिपोर्ट में कई तरह की गंभीर खामियां आई। 

स्कूल में बच्चे आई कार्ड नहीं रखते हैं। इसलिए ही घटना के आधे घंटे तक स्कूल यह पता नहीं कर पाया कि चौथे फ्लोर से कूदने वाली बच्ची कौन और किस कक्षा की है। स्कूल में सेफ्टी नेट नहीं था। यदि नेट होता तो चौथे फ्लोर से कूदने के बावजूद ना नीचे गिरती ना ही उसकी जान जाती। बिल्डिंग बॉयलॉज और डिजास्टर मैनेजमेंट के तहत स्कूल में काउंसलर और वैलनेस एक्सपर्ट की नियुक्ति अनिवार्य हैं। लेकिन स्कूल में किसी प्रशिक्षित काउंसलर की नियुक्ति नहीं है।  

6 साल में ढ़ाई हजार छात्र-युवाओं ने सुसाइड किया

सीबीएसई ने जवाब में बताया है कि राजस्थान में साल 2020 से 2025 के बीच कोटा, जयपुर, जोधपुर, सीकर सहित कई जिलों में 2,532 छात्र और युवाओं के आत्महत्या करने के मामले हुए हैं। एनसीआरबी  के अनुसार 2022 में कुल आत्महत्याओं में 7.6 प्रतिशत मामले छात्र-तनाव से संबंधित थे।

सीबीएसई ने इसे शिक्षा संस्थानों द्वारा मानसिक स्वास्थ्य दिशा निर्देशों की अनदेखी का परिणाम बताया। बोर्ड ने कहा कि स्कूल की याचिका पूरी तरह से भ्रामक, तथ्य छुपाने वाली और वैकल्पिक कानूनी उपायों को नज़र अंदाज़ करने वाली है।

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