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Photograph: (The sootr)
Jaipir: राजस्थान के माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर की 10वीं और 12वीं कक्षा के एग्जाम 12 फरवरी से शुरू होने वाले हैं। इन महत्वपूर्ण परीक्षाओं से ठीक एक महीने पहले शिक्षा विभाग ने प्रिंसिपल के ट्रांसफर की लिस्ट जारी कर दी है। ये ट्रांसफर बड़ी प्रशासनिक चुनौती साबित हो सकती है, क्योंकि इसमें 406 प्रिंसिपल के ट्रांसफर किए हैं।
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कितने हुए प्रिंसिपल के ट्रांसफर
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट के अनुसार ट्रांसफर लिस्ट को शिक्षा निदेशालय से जयपुर सचिवालय भेजा गया था। 5 जनवरी को सचिवालय ने ट्रांसफर की स्वीकृति दी और इसके बाद मंगलवार को लिस्ट जारी की गई। इस लिस्ट में कुल 39 प्रिंसिपल के नाम हैं, जबकि दूसरी लिस्ट में 78 प्रिंसिपल का ट्रांसफर किया गया है। वहीं तीसरी व चौथी लिस्ट में 61 और 228 प्रिंसिपल के ट्रांसफर किए गए। ध्यान देने वाली बात यह है कि इन ट्रांसफरों में 50% से अधिक ट्रांसफर एक जिले से दूसरे जिले में किए गए हैं।
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टीए-डीए की स्थिति
जिन प्रिंसिपल ने अपने ट्रांसफर के लिए आवेदन किया था,उन सभी को टीए और डीए (ट्रैवल अलाउंस और डेली अलाउंस) नहीं दिया जाएगा। वहीं, कुछ प्रिंसिपल के ट्रांसफर बिना आवेदन के हुए हैं, जिनके लिए टीए और डीए का भुगतान किया जाएगा। इन प्रिंसिपल को बीच सत्र में स्कूल छोड़कर अन्य स्कूलों में स्थानांतरित किया गया है।
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रिटायरमेंट से पहले एडवांस ट्रांसफर
इस बार के ट्रांसफर में एक और खास बात यह है कि जिन प्रिंसिपल की 31 जनवरी को रिटायरमेंट होनी है, उनके स्थान पर पहले ही नए प्रिंसिपल का ट्रांसफर कर दिया गया है। इन ट्रांसफरों के आदेश एक फरवरी से प्रभावी होंगे। ऐसे 5 से अधिक प्रिंसिपल का ट्रांसफर किया गया है।
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जयपुर से किए ट्रांसफर
ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया जयपुर स्थित शिक्षा संकुल से की गई, जबकि बीकानेर में यह फाइल केवल हस्ताक्षर के लिए आई थी। निदेशालय स्तर पर केवल यह चेक किया गया कि लिस्ट में कोई खामी तो नहीं है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया कि ट्रांसफर राज्य सरकार से प्राप्त पत्र के आधार पर किए गए हैं।
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ट्रांसफर प्रक्रिया पर उठा सवाल
शिक्षा विभाग की ट्रांसफर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। प्रिंसिपलों के ट्रांसफर सिफारिशों और विभागीय दबाव के कारण किए गए हैं। इससे कई शिक्षक और प्रिंसिपल असंतुष्ट हैं, क्योंकि उनकी इच्छाओं और जरूरतों को नजरअंदाज किया गया है। इसके बावजूद, विभाग ने इसे एक सामान्य प्रशासनिक कार्यवाही के रूप में प्रस्तुत किया है।
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कोर्ट ने की निंदा
राजस्थान हाई कोर्ट ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि देश के अधिकांश राज्यों में न तो कोई व्यापक ट्रांसफर पॉलिसी है न ही शिक्षक सहित कर्मचारियों के ट्रांसफर को नियंत्रित करने का कोई विशेष नियम है। राज्य से संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार शासन को बढ़ावा देने की अपेक्षा की जाती है।
मुख्य बिंदु
- प्रिंसिपल के ट्रांसफर से स्कूलों में प्रशासनिक बदलाव हो सकता है, जो परीक्षा की व्यवस्था पर असर डाल सकता है। हालांकि, अगर ट्रांसफर सही समय पर किए जाएं तो इसके नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है।
- अधिकांश ट्रांसफर प्रिंसिपल द्वारा किए गए आवेदन पर आधारित होते हैं। इसके अलावा, कुछ ट्रांसफर बिना आवेदन के भी होते हैं, जिनके लिए टीए और डीए का भुगतान किया जाता है।
- जिन प्रिंसिपल की 31 जनवरी को रिटायरमेंट होनी है, उनके स्थान पर नए प्रिंसिपल को पहले से ही ट्रांसफर कर दिया गया है, ताकि सत्र के अंत से पहले प्रशासनिक कामों में कोई रुकावट न हो।
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