70 करोड़ का खाद घोटाला, 29 नमूने फेल होने पर खुला भ्रष्टाचार, जांच पर उठे सवाल

Jageshwar prasad | Jun 26, 2026, 12:44 IST
Share
राजस्थान कृषि विभाग में 70 करोड़ रुपए का बड़ा खाद घोटाला उजागर
राजस्थान कृषि विभाग में 70 करोड़ रुपए का बड़ा खाद घोटाला उजागर

राजस्थान में करीब 70 करोड़ रुपए की घटिया खाद किसानों के खेतों में खपा दी गई। इस मामलो का खुलासा तब हुआ, जब खाद के 29 सैंपल जांच में पूरी तरह फेल पाए गए।

समझें क्या है पूरा मामला

  • कृषि विभाग में घटिया खाद की सप्लाई करने का मामला सामने आया।
  • 5 साल में 70 करोड़ की घटिया खाद किसानों के खेतों में खपा दी गई।
  • यह मामला तब खुला, जब खाद के 29 सैंपल जांच में फेल पाए गए।
  • अब 14 जिलों की सेशन अदालतों में 29 अलग-अलग मुकदमे चल रहे हैं।
Jaipur: राजस्थान के कृषि विभाग में टेंडरों के जरिए करोड़ों रुपए के घटिया खाद की सप्लाई करने का बड़ा मामला सामने आया है।

पिछले 5 साल में सरकारी मिलीभगत और टेंडरों के माध्यम से करीब 70 करोड़ रुपए की घटिया व अमानक खाद (उर्वरक) किसानों के खेतों तक खपा दी गई।

इस घोटाले का खुलासा तब हुआ, जब विभाग द्वारा लिए गए खाद के 29 सैंपल जांच में पूरी तरह फेल पाए गए। नमूने फेल होने के बाद जालसाजी और भ्रष्टाचार को लेकर 14 जिलों की सेशन अदालतों में 29 अलग-अलग मुकदमे चल रहे हैं।

​बनाया फर्जी क्वालिटी कंट्रोलर

जयपुर में झोटवाड़ा के रहने वाले आनंदी लाल ने साल 2011 में विद्याधर नगर स्थित रॉयल केमिकल एंड फर्टिलाइजर्स नामक कंपनी में नौकरी के लिए आवेदन किया था।

कंपनी के कर्ताधर्ताओं - हरवेंद्र माथुर, कलीम अहमद और गिर्राज ने नौकरी देने के बहाने आनंदी लाल के शैक्षणिक और निवास संबंधी असली दस्तावेज अपने पास रख लिए।

​आनंदी को कंपनी में नौकरी तो नहीं मिली, लेकिन आरोपियों ने उसके दस्तावेजों से उसके नाम से फर्जी क्वालिटी कंट्रोलर का शपथ पत्र विभाग में लगा दिया। जब प्रयोगशाला की जांच में खाद के 29 नमूने अमानक (फेल) पाए गए तो जालसाजी पकड़ी गई।

इसके बाद विभाग ने कार्रवाई करते हुए निर्माता कंपनी, वितरक, विक्रेता और इसी कागजी (फर्जी) क्वालिटी कंट्रोलर आनंदी लाल के खिलाफ विभिन्न जिलों में 29 मुकदमे दर्ज करवा दिए।

​20 से 22 करोड़ रुपये का था फैक्ट्री का सालाना कारोबार

मुख्य आरोपियों में से एक कलीम अहमद ने 14 जून 2025 को हुई पूछताछ में स्वीकार किया था कि उनकी फैक्ट्री का सालाना कारोबार 20 से 22 करोड़ रुपए था।

आरोपी ने बताया कि यह पूरा घटिया और नकली माल को-ऑपरेटिव एजेंसियों के माध्यम से सीधे-सीधे गरीब और भोले-भाले किसानों को बेचा जाता था।

फिलहाल, सेशन कोर्ट ने आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है। इसके बाद अब हाईकोर्ट में उनकी जमानत याचिकाएं लंबित हैं।

इस गंभीर मामले में सीआईडी-सीबी (CID-CB) द्वारा फाइनल रिपोर्ट (एफआर) लगाकर क्लीन चिट देने की कोशिशों पर कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

​5 साल में 9 अफसरों ने की जांच, तीन ने माना जुर्म, चार ने बनाई दूरी

इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के ढुलमुल रवैए का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 5 साल के भीतर कुल 9 पुलिस अधिकारियों ने इसकी जांच की।

इनमें से तीन अधिकारियों ने तो बीच में ही केस छोड़ दिया। साल 2021 में करधनी थाने में पहला मुकदमा दर्ज होने के बाद इसकी जांच तीन एडिशनल एसपी और एसआईटी (SIT) को सौंपी गई थी। तीनों ने शुरुआती जांच में आरोपों को पूरी तरह सही माना था।

​सीआईडी-सीबी की क्लीन चिट पर उठे गंभीर सवाल

जब तीन-तीन वरिष्ठ अधिकारी और एसआईटी आरोपों को सही मान चुके थे तो चौथी बार इस मामले की जांच अचानक सीआईडी-सीबी को सौंप दी गई।

सीआईडी-सीबी ने इस आपराधिक और जालसाजी के मामले को महज एक सिविल नेचर (दीवानी मामला) का बताते हुए 3 जून को आरोपियों को क्लीन चिट दे दी।

सीआईडी-सीबी के एडिशनल एसपी नानग्राम का कहना है कि एफआर देना पूरी तरह जांच अधिकारी (IO) की राय है। इसे उच्च अफसरों ने भी सही माना है।

कोर्ट में रिपोर्ट पेश कर दी गई है और एफआर में साफ तौर पर यह आधार लिखा गया है कि किस आधार पर यह रिपोर्ट तैयार की गई है।

5 साल तक किसानों के खेतों में खपाई गई घटिया और अमानक खाद
5 साल तक किसानों के खेतों में खपाई गई घटिया और अमानक खाद


कृषि विभाग ने झाड़ा पल्ला

दूसरी ओर, इस पूरे मामले पर कृषि आयुक्तालय ने कहा कि इस पूरे मामले की जांच सीआईडी-सीबी पहले ही कर चुकी है।

विभागीय स्तर पर इस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने मामले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि यह दोनों पक्षों के बीच का आपसी विवाद है। कृषि विभाग का इस पूरे प्रकरण से अब कोई कोई संबंध नहीं है।

ये भी पढ़ें:-

खेल संघ के पूर्व सचिव को SOG ने किया गिरफ्तार, जारी किए थे फर्जी प्रमाण पत्र

35 लाख का प्लांट 6.24 करोड़ में, जानिए स्वच्छ भारत मिशन घोटाले की पूरी कहानी

40% कमीशन कांड के बाद MLALAD नियम सख्त, सरकार ने किए 6 बदलाव

वीआईपी वाहनों के नाम पर फर्जी फ्यूल बिल, स्टेट मोटर गैराज में बड़ा घपला

Tags:
  • भ्रष्टाचार
  • कृषि विभाग
  • SIT
  • एसआईटी
  • सीआईडी
  • घटिया खाद की सप्लाई
गूगल पर द सूत्र चुनें ! Add as a preferredsource on Google
MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग

By Atul Dwivedi

MP कर्मचारी प्रमोशन: 10 साल बाद पदोन्नति, अब 4 साल की छूट पर अटका मामला, राज्य कर्मचारी संघ ने सीएम मोहन यादव से की मांग
एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री

By Ramanand Tiwari

एमपी भाजपा में 30 सितंबर को तीन दिग्गजों की एकसाथ आमद, 236 दिन बाद मिला प्रदेश संगठन महामंत्री
मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा

By Ramanand Tiwari

मध्य प्रदेश भाजपा में अब लक्ष्मण रेखा कौन खींचेगा? चंद्रशेखर की होगी असली परीक्षा
मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन

By Jitendra Shrivastava

मध्य प्रदेश के किसानों को बड़ी राहत: मिनी ट्रैक्टर पर मिलेगी 50 प्रतिशत तक सब्सिडी, ऑनलाइन पोर्टल पर ऐसे करें आवेदन
mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें

By Sanjay Dhiman

mp-top-news: खबरें काम की... ब्राह्मणों ने कभी शासन नहीं किया, नरोत्तम मिश्रा बोले खामोशी को कमजोरी न समझें
झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे

By Sanjay Gupta

झाबुआ संयुक्त कलेक्टर अक्षय सिंह की नौकरी खतरे में, फर्जी जाति प्रमाणपत्र में ऐसे घिरे
बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा

By Arun Tiwari

बस्तर में बाढ़ का जायजा लेने पहुंचे CM साय, प्रभावित परिवारों से मिले, 10 हजार रुपए अतिरिक्त सहायता की घोषणा