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Photograph: (the sootr)
Jaipur. राजस्थान में लागू धर्म परिवर्तन विरोधी कानून को अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा चुनौती दी गई है। राजस्थान सरकार द्वारा पारित यह कानून अब सीधे सुप्रीम कोर्ट में खड़ा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस कानून को चुनौती देने वाली चौथी रिट याचिका पर सरकार को नोटिस जारी किया है।
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खंडपीठ ने दिया आदेश
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने यह आदेश दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को यूपी, मध्य प्रदेश, गुजरात और अन्य राज्यों के समान कानूनों से जुड़ी याचिकाओं के साथ जोड़ दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के धर्म परिवर्तन विरोधी कानून को चुनौती देने वाली पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया।
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सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
PUCL की इस याचिका में कहा गया है कि यह कानून संविधान के खिलाफ है और नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया कि यह कानून व्यक्तिगत आस्था और धर्म चुनने की स्वतंत्रता पर अत्यधिक सरकारी नियंत्रण लगाता है।
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राष्ट्रीय बेंच में सुनवाई
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान के कानून को अन्य राज्यों के समान कानूनों के साथ जोड़ दिया। अब राजस्थान का धर्म परिवर्तन विरोधी कानून उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, हिमाचल, उत्तराखंड और अन्य राज्यों के एंटी कन्वर्जन कानूनों के साथ एक साथ सुना जाएगा। इस फैसले से पूरे देश के लगभग 9 राज्यों के धर्म परिवर्तन विरोधी कानूनों की संवैधानिक वैधता की एक साथ जांच की जाएगी।
PUCL का आरोप
PUCL ने राजस्थान के कानून को चुनौती देते हुए कहा कि यह नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करता है। याचिका में यह भी कहा गया कि यह कानून धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार को कमजोर करता है और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर अनुचित नियंत्रण लागू करता है।
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राजस्थान सरकार का पक्ष
राजस्थान सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और अतिरिक्त महाधिवक्ता शिवमंगल शर्मा ने कोर्ट में पेश होकर राज्य के कानून के समर्थन में दलील दी। उन्होंने बताया कि यह कानून संविधान के अनुरूप है और इससे धार्मिक स्वतंत्रता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता। इसके साथ ही राज्य ने सभी संबंधित याचिकाओं की एक विस्तृत सूची सुप्रीम कोर्ट में पेश की, जिसमें अन्य राज्यों के कानूनों को भी शामिल किया गया।
एक साथ सुनवाई के आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने 30 से अधिक संबंधित याचिकाओं को एक साथ टैग करने का निर्देश दिया है। इन याचिकाओं में समान संवैधानिक प्रश्न उठाए गए हैं, जिनकी एक साथ सुनवाई की जाएगी। अदालत ने कहा कि जब सभी संबंधित पक्षों की ओर से काउंटर एफिडेविट्स और रीजॉइनडर्स दायर होंगे, तब अगली सुनवाई की तारीख तय की जाएगी।
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सुनवाई से संबंधित जानकारी
कोर्ट का आदेश : राजस्थान और अन्य राज्यों के एंटी कन्वर्जन कानूनों पर एक साथ सुनवाई
मुख्य याचिकाएं : पीपुल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज द्वारा दायर याचिका
राज्य सरकार का पक्ष : संविधान के अनुरूप होने का दावा
सुप्रीम कोर्ट के आदेश : 30 से अधिक याचिकाओं को एक साथ टैग किया गया
अगली सुनवाई : काउंटर एफिडेविट्स और रीजॉइनडर्स के बाद होगी
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