एवोकाडो की खेती से बढ़ेगी किसानों की कमाई, 500 रुपए का है बाजार भाव

Raghvendra Singh Rathore | Sept 11, 2026, 16:55 IST
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राजस्थान में एवोकाडो की खेती शुरू हो रही है।
राजस्थान में एवोकाडो की खेती शुरू हो रही है।

राजस्थान में एवोकाडो यानी बटर फ्रूट की खेती शुरू की गई है। कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के तहत 12 जिलों में इसकी खेती की जा रही है। इसकी कीमत 500 रुपए किलो तक पहुंचती है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • राजस्थान में एवोकाडो की खेती शुरू हो रही है।
  • कृषि विभाग ने 12 जिलों में पहल की है।
  • एवोकाडो को बटर फ्रूट भी कहा जाता है।
  • एवोकाडो की बाजार कीमत 500 रुपए किलो तक है।
  • किसानों को नई आय का विकल्प मिल सकता है।
राजस्थान में अब पारंपरिक फसलों के साथ नए फल की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी कड़ी में एवोकाडो की खेती शुरू की गई है। कृषि विभाग की आत्मा परियोजना के तहत उदयपुर, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, राजसमन्द, प्रतापगढ़ और कोटा सहित करीब 12 जिलों में इसकी खेती की शुरुआत हुई है।

एवोकाडो को बटर फ्रूट भी कहा जाता है। इसमें हेल्दी फैट, विटामिन और मिनरल्स पाए जाते हैं। स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। बाजार में एवोकाडो की कीमत 200 से 500 रुपए प्रति किलो तक मिल सकती है।

कई किस्मों की खेती

एवोकाडो की कई उन्नत किस्में किसानों के लिए उपलब्ध हैं। इनमें हैस किस्म सबसे ज्यादा लोकप्रिय मानी जाती है। हैस किस्म के फल पकने के बाद गहरे बैंगनी या काले रंग के हो जाते हैं। दुनियाभर में इस किस्म की मांग ज्यादा है।

फुएटै किस्म राजस्थान के वातावरण के लिए उपयुक्त बताई जाती है। वहीं पिंकर्टन किस्म अधिक तापमान सहन करने में सक्षम है। पिंकर्टन किस्म में करीब 18 प्रतिशत तेल पाया जाता है। इसके अलावा अर्का सुप्रीम और अर्का कुर्ग रवि जैसी किस्में भी उपयोगी हैं।

ऐसी होनी चाहिए जमीन

एवोकाडो की खेती के लिए दोमट और बलुई दोमट मिट्टी सबसे बेहतर मानी जाती है। मिट्टी का पीएच स्तर 6 से 7.5 के बीच होना चाहिए। खेत में पानी का जमाव नहीं होना चाहिए। इस फसल के लिए 20 से 30 डिग्री तापमान सबसे अच्छा रहता है। हालांकि कुछ किस्में 45 डिग्री तक तापमान सहन कर सकती हैं।
किसानों को खेत तैयार करने से पहले मिट्टी की जांच करवाने की सलाह दी जाती है।

पौधे लगाने का तरीका

एवोकाडो के पौधे बीज और ग्राफ्टिंग दोनों तरीकों से तैयार किए जा सकते हैं। बीज से पौधा तैयार करने के लिए ताजे पके हुए फल का उपयोग किया जाता है।खेती के लिए मानसून का समय बेहतर माना जाता है।

पौधे लगाने के बाद सही देखभाल करने पर यह करीब 40 साल तक उत्पादन दे सकते हैं। पौधों के बीच पर्याप्त दूरी रखना जरूरी है। पौधे से पौधे की दूरी करीब 3.5 मीटर और लाइन से लाइन की दूरी 7 मीटर रखनी चाहिए।

सिंचाई और खाद प्रबंधन

एवोकाडो के पौधों के लिए ड्रिप सिंचाई बेहतर विकल्प है। पौधे लगाने से पहले ड्रिप सिस्टम लगाने की सलाह दी जाती है। पहले छह महीने पौधों की विशेष देखभाल जरूरी होती है। सामान्य रूप से प्रति पौधा 20 किलो एफवाईएम (Farm Yard Manure) और 100:50:50 ग्राम एनपीके देने की सलाह दी जाती है।खाद का इस्तेमाल मिट्टी जांच के आधार पर करना चाहिए।

एक पेड़ से 50 किलो तक फल

ग्राफ्टेड पौधे जल्दी उत्पादन देना शुरू कर देते हैं। एक पेड़ से 30 से 50 किलो तक फल मिल सकते हैं। सामान्य तौर पर तीन साल बाद उत्पादन शुरू हो जाता है। जब फल गहरे हरे रंग के हो जाएं, तब उन्हें तोड़ना बेहतर होता है।

फसल को थ्रिप्स और माइट्स जैसे कीटों से बचाने के लिए नीम तेल का उपयोग किया जा सकता है। इसके लिए पांच मिलीलीटर नीम तेल को एक लीटर पानी में मिलाकर छिड़काव किया जा सकता है। जड़ सड़ने की समस्या में ट्राइकोडर्मा या जैविक फफूंदनाशक का इस्तेमाल किया जाता है।

आत्मा परियोजना

राजस्थान में आत्मा परियोजना (Agricultural Technology Management Agency) कृषि विभाग के माध्यम से संचालित कृषि विस्तार कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य किसानों तक आधुनिक कृषि तकनीक, नई खेती पद्धतियों और सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना है।

परियोजना के तहत किसानों के लिए प्रशिक्षण, किसान मेले, कृषि प्रदर्शन और भ्रमण आयोजित किए जाते हैं। इसके जरिए किसानों को कृषि विशेषज्ञों से जोड़कर उत्पादन बढ़ाने, खेती की लागत कम करने और आय बढ़ाने पर जोर दिया जाता है।

किसानों के लिए नया विकल्प

राजस्थान में एवोकाडो की खेती किसानों के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है। बढ़ती मांग और अच्छे बाजार भाव के कारण यह फल किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है। कृषि विभाग की यह पहल राज्य में बागवानी क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में एक कदम मानी जा रही है।

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