राजस्थान में चीता प्रोजेक्ट को लेकर सुगबुगाहट, NTCA की टीम ने शुरू किया जंगल का सर्वे

Jageshwar prasad | May 21, 2026, 11:00 IST
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Ashish Bhardwaj - 2026-05-21T105907.127
Photograph: (the sootr)

NTCA ने राजस्थान के रावतभाटा में चीता बसाने के लिए सर्वे शुरू किया है। 299 वर्ग किमी क्षेत्र को मेटा पापुलेशन साइट के रूप में जांचा जा रहा है। मुकुंदरा टाइगर रिजर्व और गांधी सागर अभयारण्य से जुड़ा यह क्षेत्र चीतों के लिए उपयुक्त है।

News In Short

  • राजस्थान के रावतभाटा में चीता बसाने की तैयारी तेज, NTCA ने शुरू किया सर्वे।
  • 299 वर्ग किमी क्षेत्र का मूल्यांकन, चीतों के लिए जांचे जाएंगे माहौल, पानी और शिकार।
  • रावतभाटा क्षेत्र दोनों तरफ टाइगर रिजर्व और अभयारण्य से है कनेक्ट।
  • NTCA, WII और दो राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी कर रहे जमीनी सर्वे।
  • राणा प्रताप सागर के दोनों किनारों का निरीक्षण, आगे कुल्थी-जावदा क्षेत्र का दौरा।

News In Detail

कूनो नेशनल पार्क के बाद अब देश में चीता पुनर्स्थापन (Cheetah Reintroduction) प्रोजेक्ट का विस्तार राजस्थान (Rajasthan) की सरहदों तक होने जा रहा है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) की 28वीं बैठक में लिए गए निर्णय के अनुपालन में एक विशेष विशेषज्ञ समिति राजस्थान और मध्य प्रदेश के जंगलों की पारिस्थितिकीय अनुकूलता को अंतिम रूप देने में जुट गई है।

जमीनी स्तर पर इन मानकों की हो रही जांच

विशेषज्ञों की यह टीम दो दिनों के दौरे के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर अपनी रिपोर्ट तैयार कर रही है:



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दो राज्यों के अधिकारियों का साझा प्रयास

इस अंतरराज्यीय वाइल्डलाइफ प्रोजेक्ट को अमलीजामा पहनाने के लिए मध्य प्रदेश के गांधी सागर के डीएफओ संजय रायखेरे, एनटीसीए के एआईजी पवन जैफ, चित्तौड़गढ़ के डीएफओ राहुल झाझरिया और कोटा के उपवन संरक्षक अनुराग भटनागर संयुक्त रूप से डेटा जुटा रहे हैं।

रावतभाटा और भैंसरोड़गढ़ रेंज का यह मूल्यांकन पूरा होने के बाद कमेटी अपनी विस्तृत रिपोर्ट केंद्र सरकार और एनटीसीए को सौंपेगी, जिसके बाद कूनो या गांधी सागर से चीतों को राजस्थान के इस नए आशियाने में शिफ्ट करने की आधिकारिक प्रक्रिया शुरू होगी।

क्यों खास है रावतभाटा का यह वन क्षेत्र?

कोटा के मुख्य वन संरक्षक (CCF वाइल्डलाइफ) सुगनाराम जाट के अनुसार, किसी भी नए वन्यजीव, विशेषकर चीते जैसे बड़े शिकारी बिल्ली वंश के जीव को नए माहौल में शिफ्ट करने से पहले वहां के पारिस्थितिकीय कारकों (Ecological Factors) का गहन अध्ययन अनिवार्य होता है। रावतभाटा का यह इलाका चीतों के लिए एक आदर्श लैंडस्केप साबित हो सकता है।

यह पूरा क्षेत्र राणा प्रताप सागर बांध के पूर्वी और पश्चिमी किनारों पर फैला हुआ है। वाटर सोर्स की प्रचुरता के साथ-साथ यहां का पठारी और मैदानी मिलाजुला भूगोल चीतों की रफ्तार और उनकी शिकार करने की शैली के बिल्कुल अनुकूल माना जा रहा है। इसके अलावा, मुकुंदरा और गांधी सागर अभयारण्य के बीच स्थित होने के कारण वन्यजीवों को बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के स्वतंत्र रूप से विचरण करने के लिए एक विस्तृत प्राकृतिक गलियारा मिल सकेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

राजस्थान के किस क्षेत्र को चीतों के नए आशियाने (मेटा पापुलेशन साइट) के रूप में चिन्हित किया गया है?

चित्तौड़गढ़ प्रादेशिक वन मंडल के अंतर्गत आने वाले रावतभाटा वन क्षेत्र (भैंसरोड़गढ़ और मुकुंदरा हिल्स से सटे इलाके) को चीता पुनर्स्थापना के लिए चिन्हित किया गया है।

रावतभाटा का वन क्षेत्र भौगोलिक रूप से किन दो बड़े वन्यजीव क्षेत्रों को जोड़ता है?

यह क्षेत्र उत्तरी भाग में राजस्थान के मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व और दक्षिणी भाग में मध्य प्रदेश के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य को आपस में जोड़ता है।

इस सर्वे का आयोजन किस राष्ट्रीय संस्था के निर्देश पर किया जा रहा है?

यह सर्वे नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) के वैज्ञानिकों व वन अधिकारियों की संयुक्त समिति द्वारा किया जा रहा है।

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