राजस्थान में मुख्य सूचना आयुक्त पर लगे गंभीर आरोप: राजभवन पहुंची शिकायत, पद से हटाने की गुहार
Amit Baijnath Garg | Jul 21, 2025, 21:17 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान के मुख्य सूचना आयुक्त मोहनलाल लाठर पर आरटीआई के एक मामले के शिकायतकर्ता ने मिलीभगत के आरोप लगाए हैं। उन्हें पद से हटाने के लिए शिकायत राज्यपाल को भेजी गई है।
मुकेश शर्मा @ जयपुर
राजस्थान के मुख्य सूचना आयुक्त मोहनलाल लाठर के खिलाफ गंभीर आरोपों को लेकर राज्यपाल के पास शिकायत पहुंची है। इस शिकायत में मुख्य सूचना आयुक्त पर मिलीभगत जैसे आरोप हैं। राजभवन ने इस मामले में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। वहीं मुख्य सूचना आयुक्त ने इन आरोपों को गलत बताया है।
दरअसल, राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े को यह शिकायत एडवोकेट महेंद्र गौड़ ने की है। उन्होंने राज्यपाल से सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा-17 के तहत लाठर को मुख्य सूचना आयुक्त के पद से हटाने की कार्रवाई शुरू करने और तब तक सस्पेंड करने की गुहार की है।
इस साल 15 अप्रैल को भेजी गई शिकायत में मुख्य सूचना आयुक्त लाठर पर आरटीआई के एक मामले के शिकायतकर्ता जयपुर के सीनियर सिटीजन और विशेष योग्यजन भारत गुप्ता के साथ अभ्रद्रता करने और मिलीभगत से सुनवाई का अवसर दिए बिना शिकायत रद्द करने का आरोप लगाया है। राज्यपाल को भेजी गई शिकायत की एक कॉपी राजस्थान हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को भी भेजी गई है।
शिकायत के अनुसार, जयपुर में जवाहरलाल नेहरू मार्ग की एक कॉलोनी में रहने वाले भारत गुप्ता लंबे समय से अतिक्रमण की शिकायत कर रहे थे, लेकिन जयपुर का नगर निगम हेरिटेज कोई एक्शन नहीं ले रहा था। सूचना के अधिकार में कार्यवाही के बारे में सूचना मांगने पर जानकारी नहीं दी गई, तो उन्होंने राजस्थान सूचना आयोग में शिकायत की। इसी शिकायत पर मुख्य सुचना आयुक्त की कोर्ट में सुनवाई चल रही थी। 15 अप्रैल, 2025 को यह मामला सूचीबद्ध हुआ था।
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शिकायत में कहा गया कि 28 मार्च को नगर निगम के प्रतिनिधि राजेश बैरवा शिकायतकर्ता भारत गुप्ता के एडवोकेट महेंद्र गौड़ के दफ्तर आकर अतिक्रमणों की फोटो लेकर गए थे। इसके बावजूद मुख्य सूचना आयुक्त ने नगर निगम से अतिक्रमण हटाने के अपने निर्देश की पालना रिपोर्ट मांगने के स्थान पर शिकायतकर्ता भारत गुप्ता को सुनवाई के अवसर दिए बिना सीधे ही शिकायत रद्द कर दी। उनका कहना है कि यह आपसी मिलीभगत का मामला जाहिर होता है।
राज्यपाल को भेजी गई शिकायत में राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही का अभाव बताया है। आरोप है कि मुख्य सूचना आयुक्त ने कोर्ट रूम से अपीलार्थियों और एडवोकेट्स के बैठने के लिए रखी कुर्सियां भी हटवा दी हैं। सुनवाई पूरी तरह से इन-कैमरा होती है। इस दौरान बाकी अपीलार्थियों व वकीलों को जबरन बाहर रोका जाता है। संवेदनशील मामलों के अलावा सभी मामलों की सुनवाई ओपन-कोर्ट में होनी चाहिए। सूचना आयोग का स्टाफ अपीलार्थियों और शिकायत करने वालों से अभद्र व्यवहार करता है। शिकायत में राज्यपाल से आयोग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता व जवाबदेही और अपीलार्थियों व एडवोकेट्स के बैठने की उचित व्यवस्था करने के निर्देश देने की गुहार भी की गई है।
मुख्य सूचना आयुक्त मोहनलाल लाठर का कहना है कि सूचना आयोग में दोनों पक्षों को सुनकर विधि सम्मत निर्णय दिए जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति आयोग के निर्णय से असंतुष्ट है, तो हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट तक जा सकता है। मैंने अब तक 30 हजार मामलों का निपटारा किया है। प्राय: मनमाफिक निर्णय नहीं होने पर अनर्गल आरोप लगाए जाते हैं। बाकी यह क्या मामला था, देखकर ही बताया जा सकता है। वहीं एडवोकेट महेंद्र गौड़ का कहना है कि मुझे आज तक राजभवन से शिकायत के संबंध में कोई जानकारी नहीं दी गई है। मैं इस मामले को लेका जल्द ही आगे हाई कोर्ट का रुख करूंगा।
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राजस्थान के मुख्य सूचना आयुक्त मोहनलाल लाठर के खिलाफ गंभीर आरोपों को लेकर राज्यपाल के पास शिकायत पहुंची है। इस शिकायत में मुख्य सूचना आयुक्त पर मिलीभगत जैसे आरोप हैं। राजभवन ने इस मामले में कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया है। वहीं मुख्य सूचना आयुक्त ने इन आरोपों को गलत बताया है।
दरअसल, राज्यपाल हरिभाऊ किसनराव बागड़े को यह शिकायत एडवोकेट महेंद्र गौड़ ने की है। उन्होंने राज्यपाल से सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 की धारा-17 के तहत लाठर को मुख्य सूचना आयुक्त के पद से हटाने की कार्रवाई शुरू करने और तब तक सस्पेंड करने की गुहार की है।
राजभवन के साथ चीफ जस्टिस को भी भेजी कॉपी
कॉलोनी में अतिक्रमण का था मामला
कर दिया शिकायत को रद्द सुनवाई के लिए बुलाए जाने पर भारत गुप्ता अपने एडवोकेट महेंद्र गौड़ के साथ कोर्ट रूम में दाखिल हुए। वहां नगर निगम के प्रतिनिधि राजेश बैरवा और निगम के एडवोकेट पहले से ही उपस्थित थे। उन्होंने निगम की ओर से जवाब पेश कर दिया था और इसकी कॉपी तक उन्हें नहीं दी थी। इसी दौरान मुख्य सूचना आयुक्त ने शिकायतकर्ता और उनके वकील को सुने बिना ही सीधे ही शिकायत को रद्द कर दिया। इससे पहले सूचना आयोग ने 24 मार्च को सुनवाई स्थगित करते हुए नगर निगम को 15 दिन में अतिक्रमण हटाकर पालना रिपोर्ट देने के निर्देश दिए थे।
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मिलीभगत के लगे आरोप
न कोई जवाबदेही, ना पारदर्शिता
मनमाफिक निर्णय नहीं होने पर अनर्गल आरोप: लाठर
FAQ
- 1. मुख्य सूचना आयुक्त मोहनलाल लाठर पर क्या आरोप हैं?
मुख्य सूचना आयुक्त पर मिलीभगत के गंभीर आरोप हैं। आरोप हैं कि उन्होंने एक शिकायत को बिना सुनवाई के रद्द कर दिया और नगर निगम के साथ मिलीभगत की। - 2. मुख्य सूचना आयुक्त का इस पर क्या कहना है?
मुख्य सूचना आयुक्त लाठर ने आरोपों को खारिज किया और कहा कि आयोग में दोनों पक्षों को सुनकर विधि सम्मत निर्णय लिए जाते हैं। यदि कोई असंतुष्ट है, तो वह उच्च न्यायालय में अपील कर सकता है।
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