सुप्रीम कोर्ट का आदेश: भ्रष्टाचार किया तो केंद्रीय कर्मचारी भी एसीबी के दायरे में

सुप्रीम कोर्ट ने राजस्थान हाई कोर्ट के उस आदेश को सही ठहराया है, जिसमें उसने कहा था कि एसीबी को राज्य की सीमा में भ्रष्टाचार को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ एक्शन का अधिकार है।

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Mukesh Sharma
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News In Short

  • सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि भ्रष्टाचार के मामलों में एसीबी केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम
  • शीर्ष कोर्ट ने इस मामले में राजस्थान हाई कोर्ट के तीन अक्टूबर 2025 के आदेश को सही ठहराया
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाई कोर्ट ने इस मामले में सही फैसला किया है
  • एसीबी ने केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टचार निवारण अधिनियम में दर्ज किया था मामला
  • आरोपियों ने एसीबी की कार्रवाई को पहले हाईकोर्ट, फिर सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

News In Detail

जयपुर। सुप्रीम कोर्ट ने माना है कि राज्य की सीमा में भ्रष्टाचार के मामलों में एसीबी केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने में सक्षम है। इसके साथ ही शीर्ष् कोर्ट ने इस संबंध में राजस्थान हाईकोर्ट के तीन अक्टूबर, 2025 के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया है।  सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि हाई कोर्ट ने सभी कानूनी पहलुओं और शीर्ष अदालत के विभिन्न फैसलों का विश्लेषण करके सही फैसला किया है कि एसीबी भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत केंद्रीय कर्मचारियों के खिलाफ भी कार्रवाई कर सकती है। 

17-ए रिश्चत लेते हुए पकड़े जाने वालों के लिए नहीं 

सुप्रीम कोर्ट ने अपीलकर्ताओं की गुहार को खारिज करते हुए कहा है कि धारा 17-A का उद्देश्य सरकारी अधिकारियों को ड्यूटी के दौरान लिए गए फैसलों के कारण अनुचित रुप से परेशान किए जाने से बचाना है। ना कि रिश्वत लेते हुए पकड़े जाने वालों या किसी के लिए मांग करने वालों को बचाने के लिए। अपीलकर्ताओं का रिश्वत की मांग से जुड़ा है और यह सरकारी ड्यूटी की श्रेणी में नहीं आता। इसलिए आरोपी धारा 17-A के तहत संरक्षण मांगने के अधिकारी नहीं है।

हाईकोर्ट ने यह कहा था

हाईकोर्ट ने कहा था कि एसीबी को राज्य की सीमा के भीतर केंद्रीय कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज करने, जांच और चार्जशीट दायर करने का अधिकार है। इसके लिए एसीबी को सीबीआई की पूर्व अनुमति की भी जरुरत नहीं है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की बैंच ने अनिल दायमा व अन्य की अपील खारिज करते हुए यह आदेश दिए थे। इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। 

यह था पूरा मामला

एसीबी ने केंद्र सरकार के कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। आरोपियों ने एसीबी की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी। उनका कहना था कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों या अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केवल सीबीआई ही कार्रवाई कर सकती है। 
एसीबी ​सिर्फ आपात स्थिति में ही कार्रवाई कर सकती है,लेकिन इसके बाद उसे मामले को सीबीआई को सौंपना होगा या चालान पेश करने व मुकदमा चलाने के लिए सीबीआई से अनुमति लेनी होगी।  

कर सकती है एसीबी कार्रवाई

राजस्थान हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं की याचिकाएं खारिज कर दी थीं। कोर्ट ने कहा था कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत राज्य की सीमा में अपराध होने पर राज्य की एसीबी कार्रवाई करने में सक्षम है। इस आदेश को याचिकाकर्ता आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 

धारा 17-A में मांगी पनाह 

अपीलकर्ताओं ओर से भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम-1988 की धारा 17-A के संरक्षण देने की गुहार की गई। उनका कहना था कि लोक सेवक के खिलाफ सरकारी दायित्व के तहत किए गए कार्यों की जांच के लिए सक्षम प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना जरुरी है।

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