मौसम की मार से अब किसानों को सुरक्षा, फल-सब्जियों का भी होगा बीमा, जानें कैसे लें लाभ
Jageshwar prasad | Aug 24, 2026, 17:41 IST
राजस्थान के किसानों के लिए राहत, पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू
राजस्थान सरकार ने किसानों को सूखा, भारी बारिश, अत्यधिक गर्मी या पाले से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) लागू की है। यह योजना खरीफ 2026 से रबी 2026-27 तक राज्य के सभी 41 जिलों में प्रभावी रहेगी।
समझें क्या है पूरा मामला
- राजस्थान के किसानों के लिए राहत, पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना लागू।
- प्राकृतिक आपदाओं से फसल नुकसान पर मिलेगा आर्थिक सुरक्षा कवच।
- पारंपरिक फसलों के साथ बागवानी व सब्जी फसलें भी बीमे के दायरे में।
- खरीफ 2026 और रबी 2026-27 के लिए सभी 41 जिलों में योजना प्रभावी।
- किसान को देना होगा केवल 5% प्रीमियम, बाकी खर्च उठाएगी सरकार।
इस योजना के तहत अब सूखा, भारी बारिश, असामान्य गर्मी, पाला और अन्य विपरीत मौसमी परिस्थितियों से फसल को होने वाले नुकसान का पूरा मुआवजा मिलेगा।
प्रदेश के सभी 41 जिलों में अलग-अलग वाणिज्यिक और बागवानी फसलों को इस योजना में शामिल किया गया है। इस योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AIC) को सौंपी गई है।
कौन-कौन सी फसलें होंगी कवर?
रबी 2026-27: आंवला, बैंगन, सौंफ, फूलगोभी, लहसुन, प्याज, मटर, टमाटर, आलू, अमरूद, नींबू, आम, खरबूजा, तरबूज, बेर, पत्तागोभी, मौसमी और पपीता।
केवल वही फसल बीमित की जा सकेगी जो उस विशेष जिले के लिए अधिसूचित की गई हो।
अनार-किन्नू खराब होने पर भी मिलेगा क्लेम, अधिकतम 5% प्रीमियम
किसान को कितना प्रीमियम देना होगा?
कौन कर सकता है बीमा?
बीमा के लिए क्या दस्तावेज चाहिए?
बैंक खाते की जानकारी/पासबुक
मोबाइल नंबर
भूमि से जुड़े दस्तावेज
एग्रीस्टैक आईडी
बंटाईदार किसानों को पात्रता साबित करने वाले दस्तावेज
किसान कहां से करा सकते हैं बीमा?
अगर किसान बीमा नहीं करवाना चाहता तो क्या करे?
गलत फसल दर्ज: किसान 29 अगस्त 2026 तक फसल के नाम में बदलाव करवा सकता है।
क्या हर नुकसान पर मिलेगा पैसा?
RWBCIS (पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना) से जुड़े मुख्य सवाल और उनके जवाब
RWBCIS क्या है?
यह सामान्य फसल बीमा से अलग कैसे है?
RWBCIS (मौसम बीमा): इसमें फसल काटने के बजाय मौसम के आंकड़ों (जैसे कितनी बारिश हुई, तापमान कितना था) को देखा जाता है। अगर मौसम तय सीमा से ज्यादा बिगड़ता है, तो नुकसान मानकर पैसा दे दिया जाता है।
इस योजना का लाभ कौन-कौन ले सकता है?
अपनी ज़मीन वाले किसान, बटाईदार (Sharecroppers) और किराये पर ज़मीन लेकर खेती करने वाले किसान।
(फसल सरकार द्वारा अधिसूचित क्षेत्र और सूची में होनी चाहिए।)
कौन-कौन सी फसलें इस योजना में आती हैं?
बीमा का प्रीमियम (किश्त) कैसे तय होता है?
बीमित राशि (Sum Insured) कैसे तय होती है?
क्लेम (पैसा) मिलने की प्रक्रिया क्या है?
स्थानीय आपदा (जैसे ओले पड़ना): इसमें किसान को 72 घंटे के अंदर बीमा कंपनी, बैंक या कृषि अधिकारी को सूचित करना होता है।
किसान इसमें रजिस्ट्रेशन (नामांकन) कैसे करा सकते हैं?
बिना लोन वाले किसान: सीएससी (CSC) सेंटर, बीमा कंपनी के दफ्तर, एजेंट या NCIP पोर्टल (राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल) से ऑनलाइन कर सकते हैं।
ऐड-ऑन कवर (Add-on Cover) क्या हैं?
मौसम का डेटा कहां से लिया जाता है?
क्लेम का पैसा कब तक मिलता है?
स्थानीय आपदा के मामलों में: 72 घंटे में सूचना देने के बाद, 48 घंटे में सर्वेयर आएगा, 10 दिन में सर्वे पूरा होगा और 15 दिनों के भीतर क्लेम दिया जाएगा।
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